Photo by Laurence Griffiths/Getty Images
Photo by Laurence Griffiths/Getty Images

तलवारबाज़ी का उद्देश्य अपने प्रतिद्वंदी को हिट करना होता है और खुद को हिट होने से बचाएं रखना होता है। ब्लड की एक फ्लैश में सबसे तेज तलवार होती है।

टोक्यो 2020 प्रतियोगिता एनीमेशन "एक मिनट, एक स्पोर्ट"

हम आपको एक मिनट में बाड़ लगाने के नियम और हाइलाइट दिखाएंगे। चाहे आप तलवारबाजी से परिचित हैं या इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं, "एक मिनट, एक स्पोर्ट" खेल को समझाता है और यह कैसे काम करता है। नीचे वीडियो देखें –

वन मिनट, वन स्पोर्ट | फेंसिंग (तलवारबाज़ी)
01:23

अवलोकन

इस खेल में दो प्रतियोगी अपने हाथों में तलवार लेकर अपने प्रतिद्वंदी के शरीर पर प्रहार करने के लिए एक दूसरे का सामना करते हैं। इस खेल में शरीर के कुछ हिस्से निर्धारित होते हैं जहां आपको प्रहार करना होता है। तलवारबाज़ी के तीन अलग-अलग प्रारूप होते हैं। जिसे हम फ्वायल, एपे और सेबर के नाम से जानते हैं। इन प्रारुपों में हथियार, टारगेट एरिया (जहां प्रहार किया जाता है) और नियम अलग-अलग होते हैं। इसमें एक संवाहकों का पैनल होता है जो पिस्ट को तैयार करता है | जहां तलवारबाज़ी प्रतियोगिता खेली जाती है उस जगह को पिस्ट के नाम से जाना जाता है।

1896 से लेकर अब तक प्रत्येक ओलंपिक खेलों में तलवारबाज़ी को शामिल किया गया है। इसे आई ओलंपियाड के रूप में भी जाना जाता है। इसकी शुरुआत व्यक्तिगत पुरुषों की फ्वाइल और सेबर प्रारूप के साथ हुई थी। बाद में पेरिस ओलंपिक 1924 के खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत फ्वाइल स्पर्धा को शामिल किया गया, वहीं अटलांटा के 1996 खेलों में महिलाओं की अलग-अलग एपे स्पर्धा को भी शामिल कर लिया गया, जबकि एथेंस ओलंपिक 2004 के खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत सेबर स्पर्धा को शामिल किया गया। टोक्यो में आयोजित होने वाली 2020 ओलंपिक खेलों में तलवारबाज़ी के सभी 12 प्रारुपों को शामिल किया गया है |

खेल के प्रारुप

  • व्यक्तिगत फ्वाइल (पुरुष/महिला)
  • व्यक्तिगत एपे (पुरुष/महिला)
  • व्यक्तिगत सबरे (पुरुष/महिला)
  • टीम फ्वाइल (पुरुष/महिला)
  • टीम एपे (पुरुष/महिला)
  • टीम सबरे (पुरुष/महिला)

फ्वाइल और एपे में व्यक्तिगत स्पर्धाओं को तीन मिनट के तीन अवधियों में लड़ा जाता है, जिसमें 15 अंक हासिल करने वाला विजेता होता है या जो पहले 15 अंकों तक पहुंच जाता है उसे विजेता घोषित किया जाता है। अगर किसी भी खिलाड़ी के 15 अंक नहीं हुए तो तीन राउंड पूरा होने के बाद सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता होता है। अगर मुकाबला टाई होता है तो ओवर टाइम में चला जाता है। एक टाई के मामले में, मैच अचानक मौत के लिए चला जाता है। सबरे दो अवधियों में खेला जाता है जिसमें एक ब्रेक लिया जाता है। ये ब्रेक तब लिया जाता है जब पहला तलवारबाज़ 8 अंकों तक पहुंच जाता है।

टीम स्पर्धा में तीन सदस्य (एक रिजर्व सदस्य) शामिल होते हैं, जो प्रत्येक एथलीट के साथ एक राउंड-रॉबिन प्रारूप में प्रतिस्पर्धा करते हैं, प्रत्येक टीम एक समय में एक दूसरे पर तलवारबाज़ी करती है। इसका मतलब है कि तीन-मिनट के राउंड के कुल नौ सेट आयोजित किए जाते हैं। अगर टीम ने कुल 45 अंक हासिल कर लिए हैं तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है या नौ राउंड के खत्म होने के बाद उच्चतम स्कोर बनाने वाली टीम विजेता होती है।

खेल का सार

तकनीकि गतिविधिया, तेजी से बदलते मुकाबले और शानदार तलवारबाज़ी 

तलवारबाज़ी में दो एथलीटों को सही समय का चुनाव कर सटीक समय पर अपने विरोधी पर प्रहार या बचाव करना होता है। जब दोनों एथलीटों के बीच की दूरी कम होती है उस समय तलवारबाज़ी और भी रोमांचकारी और मज़ेदार हो जाता है। तलवारबाज़ी में जब अंधेरे में मुकाबला खेला जाता है तो वो और भी रोमांचक लगता है। 

तलवारबाज़ी के तीनों प्रारूप (फ्वायल, एपे और सेबर) में सिर्फ एक ही मुख्य अंतर होता है वो है टारगेट एरिया। जब फ्वायल स्पर्धा होती है तो इसमें धड़ और पीठ पर वार किया जा सकता है, जबकि सेबर में हाथ सहित पूरे धड़ पर वार किया जा सकता है। इस खेल में अकों की गड़ना के लिए इलेक्ट्रोनिक स्कोरिंग मशीनों का उपयोग किया जाता है। जब टारगेट एरिया पर वार होता है तब पिस्ट पर दाएं या बाएं वाले तलवारबाज़ के लिए हरे या लाल रंग की लाइट जलती है। जिससे पता चलता है कि किस तलवारबाज़ को अंक मिले हैं। फ्वाइल में जब प्रहार टारगेट एरिया के बाहर होता है तो एक सफेद रंग की प्रकाश निकतली है जो अमान्य प्रहार को दर्शाती है।  

फ्वायल और सेबर में वार को प्राथमिकता दी गई है। इसमें तलवारबाज़ को एक सीधे हाथ से टारगेट एरिया को तलवार के उपरी सतह से प्रहार करने की शुरूआत करनी होती है। यदि दूसरा तलवारबाज़ बच जाता है या चकमा दे देता है तो उस तलवारबाज़ को प्रहार करने की प्राथमिकता मिल जाती है और फिर वो मौका मिलते ही प्रहार करना शुरू कर देता है। 

जहां फ्वायल और सेबर में नियमों को प्राथमिकता दी गई है, वहीं एपे में ऐसे नियम नहीं होते हैं, इसके बावजूद ये स्पर्धा दर्शकों को आकर्षित करता है। इस स्पर्धा में जब तलवारबाज़ के तलवार की नोक से प्रतिद्वंदी पर वार किया जाता है तब उसे एक अंक मिल जाता है। अगर दोनों तलवारबाज़ एक ही समय में एक दूसरे पर प्रहार करता हैं तो उन दोनों को बराबर अंक मिलते हैं। ये खेल और भी रोमांचक इसलिए लगता है क्योंकि इस स्पर्धा में पूरा शरीर टारगेट एरिया होता है और तलवारबाज़ अपने प्रतिद्वंदी के शरीर के अप्रत्याशित हिस्सों (पैर की उंगलियों के नीचे) पर प्रहार करने की कोशिश करता है।

जहां फ्वायल और एपे में तलवार से जोर से मारते हुए प्रहार किया जाता है, वहीं सेबर मेंतलवार के किसी भी हिस्से से वार करने पर उसे मान्य अंक दिया जाता है | जहां सेबर मेंतेज़तर्रार एक्शन दर्शकों को आकर्षित करती है तो वहीं फ्वायल और एपे में टारगेट एरिया प्रहार करने की कला लोगों को आकर्षित करती है।  .

इस खेल में लंबी हाइट वाले एथलीट अपनी लंबाई के साथ, सही समय पर वार और तकनीक का उपयोग करते नज़र आते हैं। कुछ तलवारबाज़ पारंपरिक तलवारबाज़ी की शैली के साथ जीतते हैं जबकि कुछ तलवारबाज़ नई शैली का अभिनव कर मुकाबला खेलते हैं।

टोक्यो 2020 खेलों के लिए आउटलुक

परंपरा और आधुनिकता

एक मूल ओलंपिक इवेंट होने के साथ-साथ  तलवारबाज़ी 21वीं शताब्दी में और आधुनिक और सार्वभौमिक हुई है। तलवार चलाने की ऐतिहासिक परंपरा यूरोपीय (ज्यादातर फ्रांसीसी) खिलाड़ियों के बीच शुरू से चली आ रही है, तलवारबाज़ी के लिए इन खिलाड़ियों में सम्मान दिखता है। लेकिन इस युग मेंदुनियाभर के तलवारबाज़ तकनीक और दमदार प्रदर्शन के माध्यम से इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। 

दुनियाभर में तलवारबाज़ी वैश्विक स्तर पर खेली जाती है। तलवारबाज़ी की उत्पत्ति यूरोप में हुई लेकिन आज यूरोप, एशिया / ओशिनिया, अमेरिका और अफ्रीका में जमकर प्रतिस्पर्धाएं होती है। इस वक्त International Fencing Federation के सदस्य 157 देश हैं। यही कारण है कि दुनिया के किसी भी कोने में जब इसकी कोई प्रतियोगित होती है तो दर्शक आकर्षित हो जाते हैं। ये खेल चीन (बीजिंग ओलंपिक 2008) और ब्राजील (रियो ओलंपिक 2016) जैसे देशों में होने के साथ और भी अधिक प्रमुख हो गई है, हाल ही में विश्व चैंपियनशिप में दुनियाभर के एथलीटों ने पदक जीते और खेल के इतिहास के किताब में नए अध्याय जोड़ दिया।  

तलवारबाज़ी के मुकाबले में तकनीकि चीजों का मेलजोल है, इसमें फ्यूचरिस्टि कलाइटिंग, वायरलेस स्कोरिंग सिस्टम, इंस्टेंट वीडियो रीप्ले की व्यवस्था होती है साथ ही इसे कहीं से भी लाइव देखने की व्यवस्था होती है। ओलंपिक में तलवारबाज़ी उन खेलों में से एक है जहां सबसे उच्च तकनीक का इस्तेमाल होता है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक की तलाश में यहां अतीत और भविष्य मिलते हैं जिससे प्रशंसकों और खिलाड़ियों को एक अद्भूत अनुभव मिलता है। 

टोक्यो 2020 में तलवारबाज़ी पारंपरिक, विविधतापुर्ण और आधुनिक नज़र आएगा, क्योंकि यहां 12 नई टीमों के साथ व्यक्तिगत एथलीट ओलंपिक इतिहास बनाते दिखेंगे। यहां वो 21वीं सदी में अपने तलवार को आगे बढाएंगे, बिना धार की तलवार से वो खेल की दुनिया पर राज करेंगे और अत्याधुनिक विरासत को शानदार भविष्य देंगे।

सामान्य ज्ञान