Yusra Mardini: "स्पोर्ट ही एकमात्र सहारा था"

2016 में Wasserfreunde Spandau 04 प्रशिक्षण पूल ओलंपियापार्क बर्लिन में एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान सीरिया की Yusra Mardini (IOC के लिए Alexander Hassenstein/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 में Wasserfreunde Spandau 04 प्रशिक्षण पूल ओलंपियापार्क बर्लिन में एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान सीरिया की Yusra Mardini (IOC के लिए Alexander Hassenstein/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

2016 शरणार्थी ओलंपिक टीम की तैराक सीरिया से जर्मनी तक की अपनी कठिन यात्रा और खेल ने कैसे उनकी जान बचाई, इस बारे में बात करती हैं।

यह बात है अगस्त 2015 की जब Yusra Mardini ने सीरिया के गृह युद्ध से बचने के लिए काफी मुश्किलों को पार किया।

अपनी बहन के साथ उनके लिए यह एक कठिन यात्रा थी। सीरिया से लेबनान के लिए उन्होंने एक विमान लिया और वहां से तुर्की गई। तुर्की में वे एक नाव पर सवार होकर ग्रीस पहुंची।

उस नाव की यात्रा 45 मिनट में समाप्त ही होने वाली थी। सिर्फ 10 किमी की दूरी रह गई थी। जिस नाव में सिर्फ छह से सात लोग सवार हो सकते थे, उसमें बच्चों सहित 20 लोग सवार थे और नाव पहले से टूटी हुए थी। बीस मिनट में, Mardini ने खुद को, उसकी बहन, उसके पिता के एक दोस्त और दो अन्य लोगों को पानी में तैरते पाया। वे सब अगले तीन घंटे तक टूटे हुए नाव के टुकड़ों को धक्का देते हुए किनारे पर जाने का प्रयास करते रहे।

"पूरे रास्ते, आप बस एक ही आवाज़ सुन सकते थे, हमारी प्रार्थना की आवाज़," Mardini ने मंगलवार को एक इंस्टाग्राम लाइव साक्षात्कार में ओलंपिक चैनल से कहाउनकी अंतिम गंतव्य जर्मनी की यात्रा पैदल ही जारी रही। बसों में और यहां तक कि तस्करों की मदद से भी। एक साल से भी कम समय के अंदर, Mardini ने रियो 2016 में पहली बार IOC रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के हिस्से के रूप में प्रतिस्पर्धा की। 

22 वर्षीय Mardini ने कहा, "स्पोर्ट ही हमारा एकमात्र रास्ता था", "यह कुछ इस तरह का था जिसने हमें हमारे नए जीवन के निर्माण की आशा दी थी।"

Mardini कहती हैं कि उन्होंने अपने साथी रिफ्यूजी टीम के सदस्यों के साथ एक अविश्वसनीय बंधन बनाया है और वे आज भी एक व्हाट्सएप ग्रुप में संवाद करते हैं।

वह कहती हैं, ''मैंने हर के साथ जो यादें बनाई हैं, वे काफी शानदार हैं। हर बार जब कोई कुछ अच्छा करता है, तो हम एक दूसरे को बताते हैं।"

उन बधाईयों में निश्चित रूप से Mardini भी शामिल होंगी, जिन्होंने हाल ही में शरणार्थी बच्चों के लिए तैराकी शिविर की शुरुआत की है। हालांकि वह दिसंबर 2019 में पहले शिविर में भाग नहीं ले सकीं, लेकिन उनका कहना है कि उनके आभासी अनुभव ने उन्हें इस कार्य को करने की काफी प्रेरणा दी।

"यह मेरा पहला चैरिटी प्रोजेक्ट था और यह मेरा पहला स्विमिंग स्कूल था," Mardini ने समझाया। "मैं वास्तव में निराश थी कि मैं इसमें हिस्सा नहीं ले पाई...लेकिन यह आखिरी बार नहीं है जब मैं ऐसा करूँगी। मुझे भविष्य में ऐसा करने के और भी मौके मिलेंगे।”

इसके अलावा Mardini अगर कुछ और करना चाहती हैं तो वह है - उनके ओलंपिक खेलों में जाने की उम्मीद। जैसे-जैसे साल 2020 से 2021 तक बढ़ता चला गया और खेलों का समय नज़दीक आता गया, वह कहती है कि वे आने वाले महीनों के लिए सकारात्मक मानसिकता बनाए रखेंगी।"

मैं वास्तव में बहुत उत्साहित थी जब मैंने देखा कि ओलंपिक के लिए सिर्फ 200 दिन ही रह गए थे," Mardini ने कहा। "मुझे अच्छा लग रहा है, वह समय अब बहुत करीब है, मुझे बहुत डर लग रहा है।”

"मैं उत्साहित भी हूं क्योंकि हम पूरे समय काम कर रहे हैं और प्रशिक्षण दे रहे हैं," Mardini ने जारी रखा। “यह स्पष्ट रूप से एक महामारी के साथ सामान्य दिनों की तुलना में अलग है और यह सब हो रहा है। लेकिन हम एथलीटों के लिए जितना हो सके उतना सकारात्मक बनने की कोशिश कर रहे हैं, अपने सपनों के लिए जितनी मेहनत कर सकते हैं, उतनी मेहनत करें।”

रियो ओलंपिक खेलों में तैराकी के बाद से, Mardini ने अपनी कहानी साझा की है - एक तो सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक के रूप में है जिसका शीर्षक है 'बटरफ्लाई' और दूसरी उनकी आगामी बायोपिक है।

"मैं अपनी कहानी बताती हूँ क्योंकि मैं चाहती हूँ कि लोग यह समझें कि खेलों ने मेरी जान बचाई है," Mardini ने कहा।

लेकिन यह उससे बहुत अधिक है। उन्हें उम्मीद है कि उनकी कहानी दुनिया को याद दिला सकती है कि शरणार्थी सिर्फ खबरों की कहानियों से ज्यादा हैं, वे लोग भी इंसान हैं।

“मैं हमेशा लोगों को बताती हूँ कि वे सामान्य हैं, हम सामान्य हैं। हम ऐसे देश से नहीं आते जो गरीब है। यह सच नहीं है,” Mardini ने कहा।

"यह सच नहीं है। हम बिना सपने के यहाँ नहीं आए। हमारे पास पहले से ही बहुत सारे डॉक्टर, इंजीनियर, तैराक हैं। मैं हमेशा लोगों को यह बताने की कोशिश करती हूँ कि यह सामान्य है। हमारे पास भी वह सब कुछ है जो आपके पास है।”

"मैं सभी को याद दिलाना चाहती हूँ कि शरणार्थी अभी भी शिविरों में हैं, और उन्हें वास्तव में हमारी मदद की जरूरत है।"

ओलंपिक चैनल द्वारा