अतीत को जाने: Wilma Rudolph - परिस्थिति को परास्त करने वाली स्वर्ण विजेता

(बाएं से दाएं) ब्रिटेन की Dorothy Hyman (कांस्य), यूएसए की Wilma Rudolph (स्वर्ण) और जर्मनी की Jutta Heine (रजत), रोम 1960 ओलंपिक खेलों में महिलाओं के 200 मीटर के फाइनल के बाद। (Central Press/Hulton Archive/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
(बाएं से दाएं) ब्रिटेन की Dorothy Hyman (कांस्य), यूएसए की Wilma Rudolph (स्वर्ण) और जर्मनी की Jutta Heine (रजत), रोम 1960 ओलंपिक खेलों में महिलाओं के 200 मीटर के फाइनल के बाद। (Central Press/Hulton Archive/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

ओलंपिक खेलों के फाइनल मुकाबले रोमांचक, भावुक और बेहद खूबसूरत होते हैं। हर सप्ताह हम बीते ओलंपिक खेलों के फाइनल्स मे देखे गए अद्भुत लम्हो को फिर से याद करते हैं और इस बार हम आपको बताएँगे कि कैसे Wilma Rudolph ने रोम ओलिंपिक खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीते।

पहले की कहानी

Wilma Rudolph को एक बार कहा गया था की वह कभी नहीं चल पाएंगी लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित कर दिखाया।

उनका बचपन आसान नहीं था और उनका जन्म असाधारण था। Rudolph का जन्म 23 जून 1940 में टेनेसी के क्लॉर्कसविल् शहर में हुआ था और वह 22 बच्चों में से 20वी थी। जब वह छोटी थी तो उन्होंने निमोनिया, स्कारलेट बुखार और पोलियो का मुकाबला किया और उनका बाईं टांग में पक्षाघात भी हो गया था। 

Rudolph की माँ ने हार नहीं मानी और इलाज के लिए हर हफ्ते दो बार वह 160 किमी गाड़ी चला कर अपनी बेटी को नैशविल ले जाती रही। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनका साथ दिया और उनकी टांग की मालिश करने में सहयोग करते रहते थे।

अपनी आत्मकथा में Rudolph ने लिखा, 'मेरे डॉक्टर ने कहा था की मैं कभी नहीं चल पाऊँगी लेकिन मेरी माँ ने कहा कि हौसला रखो सब ठीक होगा। मैंने अपनी माँ की बात मानी।'

धीमी गति से ही सही लेकिन Rudolph ने अपना संघर्ष जारी रखा और डॉक्टर को चौंकाते हुए 12 साल की उम्र में बिना मदद के चलना शुरू कर दिया।

अपनी बड़ी बहन कि तरह Rudolph ने भी बास्केटबॉल में रूचि दिखाई और स्कूल की युवा टीम में शामिल हो गयी।

शुरुआत में उन्हें ज़्यादा खेलने का मौका नहीं मिला और बेंच पर काफी समय बिताया पर उनका निश्चय दृढ था और तीन साल मेहनत के अंदर वह टीम का एक अहम् हिस्सा बन चुकी थी।

गार्ड के स्थान पर खेलते हुए उन्होंने अपनी टीम को राज्य प्रतियोगिता जीता दी और Rudolph की बहुत सराहना हुई। जब Rudolph बास्केटबॉल की दुनिया में अपना नाम कर रही थी तब विख्यात कोच Ed Temple की नज़र उनके ऊपर पड़ी। 

Temple ने Rudolph को एक ग्रीष्म कैंप के लिए बुलाया और अगले एक साल तक उन्होंने कड़ी मेहनत करि। अपनी लगन, परिश्रम और प्रतिभा की वजह से Rudolph ने अमरीका की ट्रैक और फील्ड टीम में 1956 मेलबर्न ओलंपिक खेलों के लिए जगह बना ली।

उनकी उम्र बस 16 साल की थी और अमरीका की टीम में वह सबसे युवा सदस्य थी लेकिन अनुभव न होना उनकी प्रतिभा को रोक नहीं पाया और उन्होंने 4x100 मी रीले में कांस्य पदक जीत लिया।

रोम में हो रहे 1960 ओलिंपिक खेलों में Wilma Rudolph (स्वर्ण), Dorothy Hyman (रजत) और Leone (कांस्य) 100 मी की दौड़ समाप्त करती हुई। (Douglas Miller/Keystone/गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
रोम में हो रहे 1960 ओलिंपिक खेलों में Wilma Rudolph (स्वर्ण), Dorothy Hyman (रजत) और Leone (कांस्य) 100 मी की दौड़ समाप्त करती हुई। (Douglas Miller/Keystone/गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

फाइनल मुकाबला

Rudolph ने 1956 में अपने पहले ओलंपिक खेलों में अच्छी शुरुआत ज़रूर करि लेकिन 4 साल बाद रोम खेलों में जो कर दिखाया वह अद्भुत था।

ओलंपिक इतिहास में पहली बार खेलों का लाइव प्रसारण किया गया लेकिन विश्व को नहीं पता था की वह आने वाले दिनों में क्या देखने वाले थे।

आठ दिन के अंदर Rudolph ने 9 ओलंपिक दौड़े न केवल दौड़ी बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया।

महिलाओं के 100 मी सेमि-फाइनल में Rudolph ने 11.3 सेकंड में दौड़ पूरी कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करी और फाइनल में आसानी से स्वर्ण जीत लिया। हालांकि Rudolph ने 100 मी फाइनल की दौड़ 11 सेकंड में पूरी करि पर हवा की सहायता होने के कारण इस समय को विश्व रिकॉर्ड की मान्यता नहीं मिली।

ठीक तीन दिन बाद, 20-वर्षीय Wilma Rudolph ने 200 मी का विश्व रिकॉर्ड और स्वर्ण पदक दोनों अपने नाम कर लिए। दो स्वर्ण उनके पास थे लेकिन Wilma Rudoplh की सबसे ज़रूरी दौड़ 8 सितम्बर को 4x100 मी रीले साबित हुई।

सेमीफाइनल में अमरीका ने नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया और सारे विशेषज्ञों की राय थी की Jones, Williams, Hudson और Rudolph की टीम ही स्वर्ण पदक जीतेगी।

रीले फाइनल में Rudolph से चूक हो जाती और बैटन गिरने से बचा पर उन्हें अपना लक्ष्य पता था और जर्मनी की टीम को इस भूल का फायदा उठाने नहीं दिया और स्वर्ण अमरीका के नाम हुआ। 

Rudolph ने रोम में इतिहास रच दिया और पहली अमरीकी महिला बनी जिन्होंने ओलंपिक खेलों में एक ही प्रतियोगिता में तीन ट्रैक एंड फील्ड स्वर्ण पद जीते।

विल्मा रुडोल्फ़ की अद्भुत कहानी
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परिणाम

रोम में सफलता के बाद Rudolph को अपने शहर क्लार्कस्विल में एक शानदार स्वागत समारोह के सम्मानित किया गया और इस जश्न में सभी समुदाय के लोग शामिल हुए।

अगले वर्ष Rudolph को अमरीका में बहुत सारी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए निमंत्रण दिया गया और मिलरोज़ खेलों में वह पहली भाग लेने वाली पहली महिला बनी। इतिहास रचना Rudolph के लिए आम बात हो गयी थी और उन्होंने सामाजिक सुधार में भी अपना योगदान दिया।

Rudolph ने 22 वर्ष की आयु में सन्यास ले लिया और वह उस समय 100 मी, 200 मी और 4x100 मी विश्व रिकॉर्ड की धारक थी।

उन्होंने अपनी बाकी पढ़ाई पूरी की और टेनेसी राज्य से स्नातक की डिग्री प्राप्त करी। साल 1980 में उन्हें राष्ट्रीय ट्रैक एंड फील्ड हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया और कई और सम्मान मिले। 

साल 1994 में Rudolph को कर्क रोग हो गया और नवम्बर के महीने में 54 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।