अग्निपथ पर अग्रसर Vikas Krishan Yadav लक्ष्य सिर्फ ओलिंपिक स्वर्ण 

भारतीय मुक्केबाज़ Vikas Krishan Yadav टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने का प्रयास करेंगे।
भारतीय मुक्केबाज़ Vikas Krishan Yadav टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने का प्रयास करेंगे।

टोक्यो 2020 से खास बातचीत में उन्होंने अपने जूनून, लक्ष्य और अभ्यास के बारे में बताया

भारत समेत पूरे विश्व के लिए कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन ने करोड़ों लोगों के जीवन में बाधा डाली लेकिन कुछ लोगों ने इसे एक अवसर के रूप में लिया और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का निश्चय और दृढ कर लिया।

उनमे से एक हैं भारतीय मुक्केबाज़, Vikas Krishan Yadav, जो इस समय अमरीका में अभ्यास कर रहे हैं।

दो ओलिंपिक खेलों में भाग ले चुके 28 वर्षीय Vikas ने भारतीय सरकार और खेल प्राधिकरण से निवेदन किया था कि उन्हें अमरीका में अभ्यास करने की अनुमति दी जाये।

उन्होंने बताया, "मैं अपनी मुक्केबाज़ी को एक अलग स्तर पर ले जाना चाहता हूँ और इसलिए मैंने भारतीय सरकार से अमरीका जाने की अनुमति मांगी और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया। उनसे बातचीत के दौरान मैंने उन्हें विश्वास दिलाया की जब मैं वापस आऊंगा तो मेरा खेल बिलकुल बदल चुका होगा।"

"सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण मेरी योजना और अभ्यास ढांचे से खुश हुए और मुझे यहाँ आने की अनुमति मिल गयी।"

रक्षात्मक खेल सुधारने का प्रयास

एशियाई चैंपियनशिप और कामनवेल्थ खेलों में पदक जीत चुके Vikas अपने खेल के रक्षात्मक पहलु को सुधारना चाहते हैं। इसके बारे में बताते हुए, Vikas ने कहा, "मेरा खेल कई मायने में पहले एक तरफ़ा था और इसके कारण मैं जवाबी हमला नहीं कर पाता था और इसके साथ ही मेरा संतुलन भी बिगड़ जाता था।"

"जिस दिन मैंने टोक्यो ओलिंपिक खेलों में अपना स्थान पक्का किया उसी दिन मैंने अपने खेल को सुधारने के लिए एक सूची बनायी जिसमे कई चीज़ें थी। अब मेरे खेल में काफी परिवर्तन आ गया है और इसका परिणाम आपको अगले साल होने वाले ओलिंपिक खेलों में दिखेगा।"

मुक्केबाज़ी Vikas के लिए एक कला और विरासत बनाने का लक्ष्य

किसी भी खिलाड़ी को विश्व चैंपियन के लिए सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक तौर से भी प्रबल होना पड़ता है और Vikas का मानना है की भारतीय मुक्केबाज़ों में कुछ बदलाव आना ज़रूरी है।

"मुझे ऐसा लगता है कि हमें विश्व के किसी भी देश के मुक्केबाज़ का सामना करने के बारे में चिंतित नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने का संभावना और दावेदारी दोनों बढ़ जाएगी। हमें मानसिक तौर से और मज़बूत होने की ज़रुरत है।"

"मैं टोक्यो ओलिंपिक खेलों में कुछ ऐसा करना चाहता हूँ जिससे पूरे विश्व को पता चले और एक संदेश जाये की भारत के मुक्केबाज़ भी ओलिंपिक चैंपियन बन सकते हैं।"

इतना ही नही, Vikas Krishan Yadav मुक्केबाज़ी को एक कला मानते हैं और उन्हें लगता है कि सिर्फ जीतना लक्ष्य नहीं होना चाहिए।

"अगर किसी मुक्केबाज़ का खेल दिखने में अच्छा हो तो उससे अंकों पे बहुत फर्क पड़ता है। मैं एक ऐसे मुक्केबाज़ के रूप में विख्यात होना चाहूंगा जो सिर्फ जीतता ही नहीं पर आकर्षक भी है लेकिन इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए त्याग ज़रूरी है और उसके लिए मैं तैयार हूँ।"

कड़ा अभ्यास और ओलिंपिक स्वर्ण जीतने का दृढ निश्चय

Vikas Krishan Yadav का मानना है कि अगर फिलीपींस जैसी काम जनसँख्या वाले देश से Manny Pacquiao जैसा महान मुक्केबाज़ निकल सकता है तो भारत भी यह करने में समर्थ है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा की अगर किसी भी शिखर पर एक खिलाड़ी को पहुंचना है तो त्याग करना ज़रूरी होगा।

"ओलिंपिक खेलों में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है लेकिन इसे सच करने के लिए आपको दुगना अभ्यास करने की ज़रुरत है। यदि मेरे कोच ने मुझे एक दिन में आठ किलोमीटर भागने का लक्ष्य दिया है तो मैं किसी भी सूरत में पांच पर आ कर नहीं रुक सकता।"

भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में अभी तक किसी भी खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक नहीं जीता है और Vikas Krishan Yadav को पूर्ण विश्वास है कि वह यह बदल देंगे।"आप अगले साल टोक्यो ओलिंपिक खेलों में मुझे देखेंगे एक बिलकुल नया मुक्केबाज़ जो आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरा होगा।

"अब मैं अपने शब्दकोश से अगर को हटा देना चाहता हूं अगर मेरे मुक्केबाज़ी के करियर के अंत में ओलिंपिक चैंपियन का ख़िताब मुझे मिल जाये तो मैं समझूंगा की मैंने सफलता हासिल की है।

मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे मेरे ऊपर गर्व करें और उन्हें पता हो कि जो उनके पिता ने किया वह किसी और ने भारत के इतिहास में नहीं किया Vijender Singh के द्वारा जीते हुए ओलिंपिक पदक के बाद भारत के किसी भी पुरुष मुक्केबाज़ ने यह ख़िताब नहीं जीता है और Vikas Krishan Yadav टोक्यो खेलों में स्वर्ण जीत कर इतिहास बदलने का प्रयास करेंगे।"