ट्रेलब्लेजर्स - Ryoko Tani - पांच ओलंपिक खेलों में मैडल जीतने वाली जुडोका

अटलांटा, जॉर्जिया में 1996 के ओलंपिक खेलों में जॉर्जिया वर्ल्ड कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की Sun Hi Kye के खिलाफ ऐक्शन में जापान की Ryoko Tamura
अटलांटा, जॉर्जिया में 1996 के ओलंपिक खेलों में जॉर्जिया वर्ल्ड कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की Sun Hi Kye के खिलाफ ऐक्शन में जापान की Ryoko Tamura

आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो आसमान की ऊंचाईयों को छूने से नहीं डरते है। उन्हें हम ट्रेलब्लेजर्स कहते है। इस श्रृंखला में, हम उन एथलीट्स पर नज़र डालते हैं जिन्होंने जापान के लिए बड़ी सफलता हासिल की और अपने देश को गौरवान्वित किया। इस श्रृंखला के पांचवें भाग में, हम जुडको Ryoko Tani (nee TAMURA) की यात्रा पर नज़र डालते हैं, जिन्होंने बार्सिलोना 1992 से लेकर बीजिंग ओलिंपिक 2008 खेलों तक भाग लिया और महिलाओं की 48 किग्रा वर्ग में सभी ओलंपिक खेलों में पदक जीते

जापानी ओलंपियन Ryoko Tani

तीन बार की चैंपियन Ryoko Tani ने ओलंपिक खेलों सिडनी 2000 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कहा, "आखिरकार मैंने स्वर्ण पदक अर्जित किया, जो मेरा सपना था।"

16 साल की उम्र में ओलंपिक में डेब्यू करने के आठ साल बाद, जुडोका आखिरकार अपने करियर के शीर्ष पर पहुंच गई।

1975 में Fukuoka में जन्मी, उन्होंने अपने बड़े भाई के नक्शेकदम पर चलते हुए जूडो को अपना लिया। सिर्फ 146 सेमी लंबी होने के बावजूद, वह अपने विरोधियों से निपट सकती थी जो उनके आकार से बहुत बड़े थे; इस वजह से, उन्हें Yawara-chan (एक लोकप्रिय कार्टून करैक्टर) का उपनाम दिया गया और उन्होंने बहुत सारे समर्थक भी प्राप्त किए। बाद में वह सबसे सफल जुडोका में से एक बन गई - जिन्होंने लगातार छह विश्व जूडो चैंपियनशिप खिताब और पांच ओलंपिक खेल पदक (दो स्वर्ण, दो रजत, एक कांस्य) जीते।

Tani का पहला ओलंपिक, बार्सिलोना 1992 का खेल, उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा। फाइनल में उन्होंने फ्रांस की Cecile Nowak पर एक निर्णायक हमला किया, जो उन्होंने 16 सेमी लंबी थी, लेकिन आखिरकार उन्हें रजत पदक से ही संतुष्ठ होना पड़ा।

Tani ने कहा, "मुझे यह जानने की जरूरत है कि मैं कैसे हार गई।"

इसके बाद के चार वर्षों में, उन्होंने विश्व चैंपियनशिप सहित हर प्रतियोगिता में पोडियम में शीर्ष स्थान हासिल किया। उसके बाद उनका दूसरा ओलंपिक अटलांटा 1996 आया, जहाँ वह फिर से फाइनल में पहुंची। वहां, वह पहली बार की प्रतिद्वंद्वी, डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की Sun-hui Kye से रणनीति की कमी के कारण हार गई।

निराश होकर, Tani ने खुद से कहा: "मुझे लगता है कि मैं केवल इंसान हूं।"

"ऐसा क्यों है कि मैं एक ओलंपिक फाइनल नहीं जीत सकती?" उन्होंने खुद से पूछा।

Tani ने बार्सिलोना 1992 और अटलांटा 1996 के बीच चार वर्षों के दौरान हारने वाले मुकाबलों का बार-बार विश्लेषण किया था, जहां वह अन्य सभी प्रतियोगिताओं को जीतने के बावजूद ओलंपिक फाइनल में जीत का दावा नहीं कर सकी। हालाँकि, इससे उनकी सोच बदल गई। हारने वाली दो ओलंपिक लड़ाइयों से सीखने की कोशिश करने के बजाय, उन्होंने उन प्रतियोगिताओं का विश्लेषण करने का फैसला किया जो उन्होंने जीती थीं - अपने जीत के पैटर्न को समझने के लिए।

उन्होंने कहा, "मैं हमेशा अपनी हार से नहीं सीख सकती। मुझे जीत हासिल करके ऊंचा लक्ष्य हासिल करना चाहिए।"

सिडनी ओलंपिक खेलों की शुरुआत से पहले, Tani का उद्देश्य कम से कम स्वर्ण पदक जीतना था। रूस फेडरेशन की Lyubov Bruletova के खिलाफ, उन्होंने 30 सेकंड के बाद एक निर्णायक इप्पन अर्जित करने के लिए एक यूची-माता का उपयोग किया, जिससे उन्हें मैच जीतने में मदद मिली।

जुडोका ने अपना दाहिना हाथ हवा में ऊंचा उठाया और जश्न मनाया।

“मैंने यहाँ तक आने के लिए एक लंबा रास्ता तय किया है। मैं इस जीत का श्रेय उन सभी लोगों को देती हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया। स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए सपना सच होने जैसा है।”

इसके बाद, Tani ने एथेंस 2004 में दूसरा स्वर्ण पदक जीता। चार साल बाद बीजिंग में उन्होंने कांस्य पदक जीता - ऐसा करके वह लगातार पाँच खेलों में ओलंपिक पदक विजेता बनी।