Tomi Poikolainen: फ़िनलैंड के सबसे कम उम्र के स्वर्ण पदक विजेता 

फ़िनलैंड के Tomi POIKOLAINEN 1980 मास्को खेलों में तीरंदाज़ी स्वर्ण पदक जीतने के बाद।
फ़िनलैंड के Tomi POIKOLAINEN 1980 मास्को खेलों में तीरंदाज़ी स्वर्ण पदक जीतने के बाद।

ओलिंपिक खेलों का इतिहास चैंपियन खिलाड़ियों, अद्भुत कहानियों और कीर्तिमानों से भरा हुआ है लेकिन हर चार साल में एक बार आयोजित होने वाले प्रतियोगिता में कुछ ऐसे क्षण होते हैं जो सदैव याद किये जाते हैं। हर सप्ताह हम आपको ऐसे ही एक क्षण के बारे में बताते हैं जिसने विश्व भर में खेल प्रेमियों को भावुक कर दिया और इस भाग में हम आपको बताएँगे फिनलैंड के तीरंदाज़ Tomi Poikolainen की कहानी। 

पहले की कहानी

ठीक चार दशक पूर्व फ़िनलैंड के तीरंदाज़ Tomi Poikolainen ने सिर्फ 18 वर्ष की आयू में पहली बार ओलिंपिक खेलों में भाग लिया था। अमरीका के 1980 मास्को खेलों में भाग न लेने से बहुत से अन्य देशों को पदक जीतने का मौका मिल गया और इस चीज़ ने मुकाबले को अत्यधिक रोमांचक बना दिया था।

Poikolainen के कोच थे Kyosti Laasonen जिन्होंने 1972 म्युनिक ओलिंपिक खेलों में पदक जीता था और अब अपने शिष्य का मार्गदर्शन कर रहे थे। कम आयु और अनुभव होने के कारण परिस्थितियां Poikolainen के लिए कठिन थी क्योंकि इतने बड़े खेल मंच पर प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन या तो बहुत अच्छा होता या बेहद निराशाजनक।

उनके अलावा ओलिंपिक पदक जीतने का प्रयास कर रहे थे 25 देशों के अन्य 38 पुरुष और 29 महिला तीरंदाज़ जिनका भी एक ही सपना था।

तीरंदाज़ी के लिए 1980 मास्को खेल बहुत महत्वपूर्ण थे क्योंकि 1972 म्युनिक खेलों में इस प्रतियोगिता ने 52 साल बाद अपनी वापसी करि थी। ऐसे समय में 1980 ओलिंपिक खेल अधिक महत्वपूर्ण थे क्योंकि रूस संघ में इनसे पहले सिर्फ एक बड़ी तीरंदाज़ी प्रतियोगिता हुई थी और वह थी पिछले वर्ष आयोजित विश्व कप फाइनल था।

विजय का क्षण

मास्को ओलिंपिक खेलों की तीरंदाज़ी प्रतियोगिता का आयोजन क्राइलट्सकोए ओलिंपिक खेल केंद्र में हुआ था और यह 30 जुलाई से लेकर 2 अगस्त तक खेली गई। हर पुरुष तीरंदाज़ को चार अलग दूरियों पर स्थित लक्ष्यों पर 36 बाण चलाने थे और इस प्रक्रिया के दो राउंड होते। वह चार दूरियां थी 90, 50, 70 और तीस मीटर और हर बाण से एक खिलाड़ी दस अंक तक प्राप्त कर सकता था जिसका मतलब था कि पूरी प्रतियोगिता में एक तीरंदाज़ 2880 अंक सम्मिलित कर सकता था।

प्रतियोगिता के पहले दो दिनों में Pokolainen अपने प्रतिद्वंदियों से पीछे चल रहे थे लेकिन तीसरे दिन फ़िनलैंड के इस तीरंदाज़ ने अपनी प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया की पूरा खेल जगत देखता रह गया।

वर्ल्डआर्चरी की अनुसार, रजत पदक विजेता Boris Isachenko ने कहा था, "वह प्रमुख पदक दावेदार नहीं थे लेकिन प्रतियोगिता के तीसरे दिन उनकी गति को पकड़ पाना बाकी सबके लिए बहुत कठिन था।" 

प्रतियोगिता के अंतिम दिन बहुत तेज़ बारिश हो रही थी लेकिन Poikolainen ने अपना संतुलन बनाये रखा और 2455 अंक सम्मिलित कर Isachenko को हराया और स्वर्ण अपने नाम कर लिया।

फ़िनलैंड के तीरंदाज़ Tomi POKOLAINEN 1984 Los Angeles खेलों में भाग लेते हुए।
फ़िनलैंड के तीरंदाज़ Tomi POKOLAINEN 1984 Los Angeles खेलों में भाग लेते हुए।
© 1984 / IOPP / VREEKER, Paul

प्रभाव

Poikolainen की फ़िनलैंड के खेल इतिहास में एक खास जगह है और उन्हें हमेशा अपने देश के सबसे कम आयु वाले ओलिंपिक स्वर्ण विजेता के रूप में याद रखा जायेगा।

वह दोबारा तो स्वर्ण पदक न जीत पाए लेकिन Poikolainen ने पांच ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लिया जिनमे से 1996 के एटलांटा खेल अंतिम थे। मास्को के चार साल बाद 1984 लॉस एंजेलेस खेलों में वह पांचवे स्थान पर आये लेकिन 1992 के बार्सिलोना खेलों में उन्होंने टीम प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

चार दशक से ज़्यादा तीरंदाज़ी करने वाले ओलिंपिक तीरंदाज़ Poikolainen 35 साल से अपने गृहनगर हिविन्का के एक दमकल विभाग में काम कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, Poikolainen ने 2014 में खेल में वापसी करी और राष्ट्रिय कीर्तिमान को ध्वस्त किया।