जीवन के तीसरे ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण की आशा, Vikas Krishan Yadav रच सकते हैं मुक्केबाज़ी इतिहास

Vikas Kirshnan Yadav
Vikas Kirshnan Yadav

ओलिंपिक खेलों के प्रारंभ में कुछ ही महीने रह गए हैं और विश्व के सबसे भव्य और महत्वपूर्ण खेल महोत्सव पर भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदक जीतने का प्रयास करेंगे। निशानेबाज़ी, कुश्ती, बैडमिंटन और भारोत्तोलन जैसे खेलों में भारत के अनेक खिलाड़ी पदक की आशा करेंगे और हर सप्ताह टोक्यो 2020 आपको ऐसे ही खिलाड़ी के बारे में बताएगा।

मुक्केबाज़ी के ओलिंपिक इतिहास में 79 देशों ने 946 पदक जीते हैं और इनमे से लगभग 200 सिर्फ अमरीका और क्यूबा के मुक्केबाज़ों ने अपने नाम किये हैं।

क्यूबा और अमरीका ने कुल मिला कर 187 मुक्केबाज़ी पदक जीते हैं जिसके अंदर 87 स्वर्ण (50 अमरीका और 37 क्यूबा) शामिल हैं। इस वर्चस्व को चुनौती देना और परास्त कर पाना किसी भी देश के लिए कठिन होगा लेकिन भारत के 28 वर्षीय मुक्केबाज़ Vikas Krishan Yadav का मानना है की वह इस इतिहास को बदलने की तरफ पहला कदम आने वाले टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में उठाएंगे।

हरयाणा के भिवानी जिले के रहने वाले Vikas Krishan Yadav 2016 रियो ओलिंपिक खेलों के 75 किग्रा क्वार्टरफईनल में हार गए थे और बहुत से विशेषज्ञों ने कहा था कि वह दोबारा ओलिंपिक खेलों में भाग नहीं ले पाएंगे। ब्राज़ील में अपने सपना पूरा न कर पाने के बाद Vikas ने निश्चय किया कि वह अपनी मुक्केबाज़ी को पूरी तरह बदल देंगे और 2018 कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीत कर दिखा दिया की वह अभी हार नहीं मानने वाले।

आने वाले टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में Yadav उसी वर्ग में लड़ेंगे जिसमे 2008 में Vijender Singh ने भाग लेकर भारत को पहला ओलिंपिक मुक्केबाज़ी पदक दिलाया था। पिछले वर्ष टोक्यो2020 से बात करते हुए उन्होंने कहा था, "मैं टोक्यो ओलिंपिक खेलों में कुछ ऐसा करना चाहता हूँ जिससे पूरे विश्व को पता चले और एक संदेश जाये की भारत के मुक्केबाज़ भी ओलिंपिक चैंपियन बन सकते हैं। ओलिंपिक खेलों में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है लेकिन इसे सच करने के लिए आपको दुगना अभ्यास करने की ज़रुरत है। यदि मेरे कोच ने मुझे एक दिन में आठ किलोमीटर भागने का लक्ष्य दिया है तो मैं किसी भी सूरत में पांच पर आ कर नहीं रुक सकता।"

ओलिंपिक खेलों में पदक जीतने के अपने सपने को पूरा करने के लिए Vikas ने पूरे लॉकडाउन के दौरान अभ्यास किया और स्थिति में सुधार आने के बाद वह तैयारी करने के लिए अमरीका चले गए। विदेश में उन्होंने न केवल अपनी तकनीक और खेल पर काम किया बल्कि मनोवैज्ञानिक बल को बढ़ने के लिए भी तैयारी कर रहे थे।

भारत के ओलिंपिक इतिहास में सिर्फ दो ही मुक्केबाज़ों ने पदक जीते हैं (Mary Kom और Vijender Singh) लेकिन किसी ने भी स्वर्ण अपने नाम नहीं किया है। अगर Vikas से पूछें तो उनका लक्ष्य सिर्फ स्वर्ण पदक होगा और इसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं चाहे इसका मतलब अमरीका और क्यूबा के मुक्केबाज़ों को परास्त करना क्यों न हो।

पदक और ख़िताब

  • कांस्य पदक - 2011 विश्व एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप
  • कांस्य पदक - 2014 एशियाई खेल
  • रजत पदक - 2015 एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप
  • स्वर्ण पदक - 2018 कॉमनवेल्थ खेल

टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में Vikas Krishan Yadav अपना पहला मुकाबला 24 जुलाई को कोकुगीकान अरेना में खेलेंगे। मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता की पूरी अनुसूची के लिए यहाँ क्लिक करे ं।