टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में नए रूप में नज़र आना चाहते हैं तीरंदाज़ Atanu Das

2019 विश्व चैंपियनशिप में भारत के Atanu Das पुरुषों के तीरंदाज़ी रिकर्व फाइनल में भाग लेते हुए।
2019 विश्व चैंपियनशिप में भारत के Atanu Das पुरुषों के तीरंदाज़ी रिकर्व फाइनल में भाग लेते हुए।

रियो 2016 खेल, लॉकडाउन और टोक्यो 2020 के बारे में बात करते हुए Das ने अपने लक्ष्य के बारे में बताया। 

भारत के लिए ओलिंपिक खेलों पर व्यक्तिगत पदक जीतना हज़ारों खिलाड़ियों का सपना है लेकिन कुछ चुनिंदा खिलाड़ी ही यह अवसर पाते हैं और इसकी क्षमता रखते हैं। तीरंदाज़ Atanu Das उन खिलाड़ियों में से हैं जो टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में भाग लेंगे और भारत के लिए पदक जीतने वाले 17वें व्यक्ति बनना चाहते हैं।

लॉकडाउन की निराशा और आशावादी रवैया

कोरोना महामारी ने खेल जगत पर बहुत गहरा असर किया है और ओलिंपिक खेलों के लिए तैयारी कर रहे हज़ारों खिलाड़ियों को निराशा हुई थी। Das ने डीएनए से बात करते हुए बताया कि न केवल उन्हें निराशा हुई बल्कि लॉकडाउन के कारण उन्हें बहुत कुछ नया अनुभव करना पड़ा।

Das ने कहा, "जब ओलिंपिक खेल विलंबित किये गए तो एक तरफ मुझे लगा कि इतनी अच्छी तैयारी कर रहे थे और बस कुछ दिन पहले ही यह घोषणा कर दी गयी। खेल विलंबित कर दिए गए थे और हमारे पास बहुत समय था। यह हमारे लिए एक नया अनुभव था। मेरे या किसी अन्य खिलाड़ी के लिए छह महीने तक खेल न पाना बहुत मुश्किल था क्योंकि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।"

अभ्यास से लेकर प्रतियोगिताओं तक हर एक पहलू पर गहरा असर पड़ा और Das को लगता है कि ओलिंपिक खेल शुरू होने से पहले कुछ चीज़ें महत्वपूर्ण होंगी।

उन्होंने कहा, "अब इतनी कठिनाई नहीं हो रही क्योंकि हम अभ्यास कर रहे हैं और अगर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू करें तो हमारे लिए बहुत अच्छा होगा। अगर हम सीधे ओलिंपिक खेलों में जायेंगे तो परिणाम अनुत्पादक हो सकता और मैं खुश हूँ की कैम्प शुरू हो चुके हैं। प्रतियोगिताओं में भाग लेना हमारे खेल को बहुत बेहतर करेगा।"

प्रतियोगिताओं का महत्त्व

कड़ी परिश्रम और अभ्यास के अलावा एक खिलाड़ी के लिए प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना बहुत अहम् होता है और Das के अनुसार भारतीय खिलाड़ी बाकी देशों के तीरंदाजों थोड़े पीछे रह जाते हैं। उन्हें लगता है यदि भारतीय खिलाड़ी ज़्यादा प्रतियोगिताएं खेलेंगे तो पदक जीतने की दावेदारी बढ़ जाएगी।

उन्होंने बताया, "हमारे देश के खिलाड़ी बहुत कम प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं और इसकी तुलना में विदेशी खिलाड़ी ज़्यादा टूर्नामेंट खेलते हैं। पूरे साल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है और इनमे से 90 प्रतिशत में बहुत सारे देश हिस्सा लेते हैं। आप जितना इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे आपको अपनी कमज़ोरी और शक्ति के बारे में उतना ही ज़्यादा पता चलेगा। इसके साथ ही आपको अपनी मानसिक शक्ति में सुधार लाने के लिए भी इन प्रतियोगिताओं में भाग लेना ज़रूरी है।"

2016 रियो से 2020 टोक्यो तक

रियो में आयोजित हुए 2016 ओलिंपिक खेलों में Atanu Das ने नौंवां स्थान प्राप्त किया था और उनके हाथ निराशा ज़रूर लगी थी पर सीखने को भी बहुत मिला। ब्राज़ील में हुई तकनीकी गलतियों के आलावा 2019 विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता Das का कहना है कि उनका मनोवैज्ञानिक बल बढ़ गया है और दबाव को संभालना उन्हें आ गया है।

Das ने डीएनए से बात करते हुए कहा, "हर किसी को मेरे सफर के बारे में पता है और मैं नहीं चाहता यह दोबारा हो। अगर आप 2010 और 2020 में तुलना करें तो मैं बिलकुल ही अलग आर्चर और व्यक्ति बन चुका हूँ। रियो 2016 खेलों के अपने प्रदर्शन को मैंने बदला है और 2021 के लिए मैंने अपना स्तर बढ़ा दिया है। मैं कभी शिकायत नहीं करता और मुझे ऐसा लगता कि हमें अपना खेल सुधारते रहना चाहिए।"

विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है और ओलिंपिक खेलों में विलंब होने से उन्हें निराशा ज़रूर हुई होगी लेकिन यह एक सुनहरा अवसर भी बन सकता है। भारत के तीरंदाजों में पदक जीतने के लिए Das सबसे प्रबल दावेदार हैं और देखना होगा कि वह अपने नए स्तर से यह सपना सच कर पाते हैं कि नहीं।