फुटबॉल में ओलिंपिक स्वर्ण जीतने की रोमांचक प्रतियोगिता और उसका कारण

फ़ीफ़ा विश्व कप फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता होती है लेकिन ओलिंपिक खेल देशों को एक और अवसर देता है। आज जापान के राष्ट्रीय फुटबॉल दिवस के दिन टोक्यो 2020 आपको इस खेल के ओलिंपिक इतिहास के बारे में बताएगा। 

पुरुषों की फुटबॉल प्रतियोगिता ओलिंपिक खेलों की चुनिंदा प्रतिस्पर्धाओं में से है जिनके अंदर आयु सीमा होती है।

बार्सिलोना में आयोजित हुए 1992 ओलिंपिक खेलों से शुरू हुए इस नियम के अनुसार भाग लेने वाले खिलाड़ियों की आयु सीमा 23 वर्ष कर दी गई और 1996 एटलांटा खेलों में आयोजकों ने 24 वर्ष से ज़्यादा की आयु वाले तीन खिलाड़ियों को टीम में सम्मिलित करने की अनुमति दे दी। फीफा विश्व कप फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है लेकिन ओलिंपिक खेलों में फुटबॉल का अपना एक विशेष स्थान है।

हर राष्ट्र के पास जीत का अवसर

खेल इतिहास का पहला विश्व कप वर्ष 1930 में उरुग्वे में हुआ था और 2018 में रूस ने 21वी प्रतिस्पर्धा की मेज़बानी करि थी लेकिन आज तक सिर्फ आठ राष्ट्र ही यह ख़िताब अपने नाम कर पाए हैं।

ब्राज़ील ने विश्व कप पांच बार जीता है जबकि इटली और जर्मनी के नाम चार ख़िताब हैं। उरुग्वे, अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड और स्पेन अन्य देश हैं जिन्होंने विश्व कप जीता है। यह आठ राष्ट्र विश्व फुटबॉल के शक्तिकेंद्र माने जाते हैं और विश्व कप जीत के साथ खेल प्रेम भी इसका एक बड़ा कारण है।

किसी भी विश्व कप में एक राष्ट्र की प्रगति देखें तो पता चलेगा की जैसे ही टीम आगे बढ़ती है उसके सामने इन शक्तिकेंद्रों में से एक आ जाता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है 2018 विश्व कप जिसमे क्रोएशिया फाइनल में ज़रूर पहुंची लेकिन फ्रांस के हाथों हार का सामना करना पड़ा। किसी भी देश ने अगर पहले विश्व कप जीता हो तो यह अनुभव विश्व कप में काम आता है।

दूसरी तरफ अगली ओलिंपिक खेलों की बात करें तो पुरुषों की फुटबॉल प्रतियोगिता पहली बार 1900 पेरिस खेलों में आयोजित हुई थी और यह पहले विश्व कप से 30 साल पहले हुआ था। ओलिंपिक इतिहास में 26 बार हुई फुटबॉल प्रतियोगिता में 19 राष्ट्र स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।

सिर्फ पांच ऐसे देश हैं जिन्होंने एक से ज़्यादा बार ओलिंपिक स्वर्ण जीता है और वह हैं हंगरी, इंग्लैंड, अर्जेंटीना, सोवियत संघ और उरुग्वे। पांच बार विश्व चैंपियन रह चुकी ब्राज़ील को यह स्वर्ण पदक जीतने में 116 साल लगे और उन्होंने ख़िताब 2016 रियो खेलों में अपने नाम किया।

अगर पिछले कुछ ओलिंपिक खेलों को देखें तो मेक्सिको और नाइजीरिया जैसे राष्ट्र जो विश्व कप में कभी क्वार्टरफाइनल से आगे नहीं बढे वह भी स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं।

लंदन में आयोजित 2012 ओलिंपिक खेलों में मेक्सिको ने ब्राज़ील को हरा कर स्वर्ण पदक जीता।
लंदन में आयोजित 2012 ओलिंपिक खेलों में मेक्सिको ने ब्राज़ील को हरा कर स्वर्ण पदक जीता।

ओलिंपिक खेलों में हर किसी के पास स्वर्ण जीतने का अवसर

युवा खिलाड़ियों के खेल जीवन पर गहरा असर डालने वाली प्रतियोगिता

ओलिंपिक खेलों की फुटबॉल प्रतियोगिता 23 वर्ष से काम आयु वाले खिलाड़ियों को विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा को दिखने का अवसर देता है। अपने राष्ट्र के मान सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए लड़ने के साथ ही ओलिंपिक खेल खिलाड़ियों को अपना करियर आगे बढ़ाने का मौका भी प्रदान करता है। ओलिंपिक खेलों में अगर कोई युवा फुटबॉल खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन दिखाए तो विश्व के सबसे बड़े क्लब उनकी कुशलता देख पाते हैं।

विश्व इतिहास के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की सूची में कई नाम ऐसे हैं जिन्होंने ओलिंपिक खेलों में भाग लिया और स्वर्ण पदक भी था। अर्जेंटीना के Lionel Messi ने अपने देश को 2008 बीजिंग खेलों में स्वर्ण दिलाया और Neymar ने ब्राज़ील को 2016 रियो खेलों में यह ख़िताब हासिल करने में सहायता करी। Cristiano Ronaldo और Ronaldinho जैसे कई बड़े सितारे भी ओलिंपिक खेलों में भाग ले चुके हैं। 

बार्सिलोना में आयोजित 1992 ओलिंपिक खेलों के समय से किसी भी यूरोप के देश ने स्वर्ण पदक नहीं जीता और इसका कारण यूईएफए यूरोपीय चैम्पियनशिप है क्योंकि दोनों एक ही वर्ष में आयोजित होते हैं। यूरोपीय चैम्पियनशिप के आयोजन के साथ बहुत सारे खिलाड़ी जो 23 वर्ष से कम आयु के होते हैं वह अपने क्लब के लिए खेलने की वजह से ओलिंपिक खेलों में भाग लेने से मना कर देते हैं।

Messi (द) ने 2008 बीजिंग ओलिंपिक खेलों में भाग लिया और अर्जेंटीना को स्वर्ण पदक दिलाया।

अधिक आयु वाले खिलाड़ियों का उपयोग

भाग लेने वाले हर राष्ट्र को तीन 23 वर्ष से अधिक आयु वाले खिलाड़ियों को टीम में सम्मिलित करने की अनुमति होती है और इसके कारण अनुभवी सितारे युवाओं के साथ खेलते हुए उनका मार्गदर्शन कर पाते हैं। सिडनी में हुए 2000 ओलिंपिक खेलों के दौरान जे लीग के सितारे और बेहतरीन स्ट्राइकर Patrick M'Boma ने कैमरून का नेतृत्व करते हुए स्वर्ण पदक जिताया वहीँ 16 साल बाद ब्राज़ील जैसे फुटबॉल प्रेमी राष्ट्र की उम्मीदों को अपने कन्धों पर संभाले Neymar ने यह ख़िताब जीतने में अपनी टीम की सहायता करी।

अर्जेंटीना ने 2004 एथेंस और 2008 बीजिंग में दो लगातार स्वर्ण जीतने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों को अपने दल में सम्मिलित किया। जापान जैसे राष्ट्र ने अपनी टीम में अनुभवी खिलाड़ी को अपनी टीम में खिलाया और उन्होंने नेतृत्व किया जिसके कारण उनका प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा।

अधिक आयु वाले स्थानो के लिए खिलाड़ियों का चयन करना थोड़ा कठिन होता है क्योंकि उन्हें बाकी युवाओं के अनुसार टीम में ढालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसके साथ रणनीति को भी बदलना पड़ता है। इन स्थानों का सही उपयोग करना टीम के लिए बहुत सफल साबित होता है लेकिन अगर यह सही न हो तो यह पासा उल्टा भी पड़ सकता है।

महान फुटबॉल देशों को देखना विश्व भर में फुटबॉल प्रेमियों के लिए बहुत आकर्षक होता है लेकिन ओलिंपिक खेलों का रोमांच अलग है और किसी भी राष्ट्र के जीतने कि आशंका होने के कारण रूचि बढ़ जाती है। टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में हुए विलम्भ के कारण 24 साल से काम आयु वाले खिलाड़ियों को भाग लेने का अवसर मिलेगा और पूरा विश्व इस प्रतियोगिता पर अपनी नज़रे बनाये रखेगा।

ब्राज़ील ने 2016 रियो ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीत कर 116 साल का इतिहास बदल दिया।
ब्राज़ील ने 2016 रियो ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीत कर 116 साल का इतिहास बदल दिया।