एकलौता ओलंपिक पदक: कैसे 400 ग्राम वज़न बदला इराक के ओलंपिक पदक का रंग

Abdul Wahid Aziz (c) ने पोडियम पर फोटो खिंचवाई।
Abdul Wahid Aziz (c) ने पोडियम पर फोटो खिंचवाई।

ओलंपिक पदक जीतना एक खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत सपना होता है पर विश्व में 24 ऐसे भी देश हैं जिनका यह सपना सिर्फ एक बार सच हुआ है। Tokyo2020.org आपको बताएगा ऐसे खिलाड़ियों और देशों की कहानियां।

पहले की कहानी

इराक के बसरा शहर में सन 1931 में जन्मे, Abdul Wahid Aziz ने अपना खेल का सफर 19 वर्ष की उम्र में शुरू किया और शुरुआत में उनकी रूचि फुटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और तैराकी में थी लेकिन थोड़े समय बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपना जूनून और करियर बना लिया।

वेटलिफ्टिंग में Wahid Aziz की प्रतिभा अद्भुत थी और पहले कुछ वर्षों में ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए शानदार प्रदर्शन दिखाया। इराक की राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 56 किग्रा वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

कामयाबी और ख़िताब ज़्यादा समय तक Wahid Aziz से दूर नहीं रहे और 1957 में उन्होंने अरब चैंपियनशिप के रूप में अपनी पहली प्रतियोगिता जीत ली। उन्होंने इस बार 75 किग्रा वर्ग में भाग लिया और अपने प्रतिद्वंदी से 27.5 किग्रा ज़्यादा वज़न उठा कर अपनी प्रतिभा का परिचय विश्व को दिया।

वह साल Wahid Aziz के शुरुआती करियर का सबसे अहम् साल साबित हुआ और उन्होंने अपनी कुशलता को कामयाबी में बदलते हुए एशियाई चैंपियनशिप में भी स्वर्ण जीत लिया। इतना ही नहीं, 1960 ओलंपिक खेलों के पहले उन्होंने पोलैंड में हुई 1959 विश्व प्रतियोगिता में कांस्य पदक भी जीता।

इतिहास की रचना

अपने कौशल, खिताबों और फॉर्म की वजह से 1960 रोम खेलों में पदक जीतने वाले वह प्रबल दावेदारों में से एक थे। Wahid Aziz ने रोम में 67.5 किग्रा वर्ग में भाग लिया और अपने तीनों प्रयास में कुल मिला के 380 किग्रा का वजन उठाया। यह करतब सिर्फ सोवियत यूनियन के तीन बार के विश्व चैंपियन रह चुके Viktor Bushuev ने पार किया था और साथ में विश्व रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिखाया।

प्रतियोगिता एक रोमांचक मोड़ पर तब पहुंची जब सिंगापुर के Tan Howe Liang ने Wahid Aziz द्वारा उठाये हुए भार (380 किग्रा) की बराबरी कर ली। रजत और कांस्य पदक विजेता का चुनाव होना बाकी था और दोनों ही दावेदार ऐसे देशों के थे जिन्होंने कभी ओलंपिक पदक नहीं जीता था। पदक के रंग का निर्णय उठाये हुए भार पर नहीं बल्कि दोनों खिलाड़ियों के वज़न पर आधारित किया गया।

Wahid Aziz का वज़न Tan Howe Lang से 400 ग्राम ज़्यादा था और बहुत देर चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया की इराकी खिलाड़ी को कांस्य पदक दिया जायेगा। अंत में रजत और कांस्य के बीच का फर्क बस 400 ग्राम निकला।

शायद Aziz के लिए रजत न जीत पाना बहुत बड़ी निराशा रही हो पर जो उन्होंने हासिल किया वह इराक के इतिहास में न पहले कभी हुआ था और न उसके बाद हुआ।

आगे की कहानी

ठीक एक साल बाद, Wahid Aziz ने 1961 विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया और पदक से चूक गए लेकिन अपने प्रदर्शन के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया। उनका निधन वर्ष में 1982 में हुआ, अपने करियर में उन्होंने ओलंपिक खेलों में एक ही बार हिस्सा लिया लेकिन Aziz की प्रतिभा और महानता इराक के इतिहास में अमर रहेगी।

वर्ष 2014 में इराकी ओलिंपिक समिति ने उनको सम्मानित करते हुए Abdul Wahid Aziz अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप की स्थापना करी।