दुसरे खेल जीवनदान के बाद टोक्यो 2020 का सपना पूरा करने के पथ पर पहलवान Sakshi Malik

भारत की महिला पहलवान Sakshi Malik रियो ओलिंपिक खेलों में पदक जीतने के बाद ख़ुशी मनाती हुई।
भारत की महिला पहलवान Sakshi Malik रियो ओलिंपिक खेलों में पदक जीतने के बाद ख़ुशी मनाती हुई।

2016 रियो खेलों में पदक जीतने वाली महिला पहलवान की नज़र अब टोक्यो 2020 खेलों पर होंगी

भारत के लिए 2016 रियो ओलिंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद महिला पहलवान Sakshi Malik अब अगले साल होने वाले टोक्यो 2020 खेलों को अपना लक्ष्य बना लिया है। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के पहले हरयाणा की पहलवान ने टोक्यो जाने कि उम्मीद छोड़ दी थी लेकिन उनके सपने को पुनर्जीवन मिल गया है।

ओलिंपिक क्वालीफ़ायर के लिए तैयारी Sakshi Malik इस समय लखनऊ में आयोजित राष्ट्रिय कैम्प में भाग ले रही हैं और भारतीय पहलवानी संघ के निर्णय से उन्हें बहुत लाभ हुआ है। इस बारे में बात करते हुए, उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, "मुझे इस अवसर से एक नई जीवनरेखा मिली है। मैं बहुत उत्सुक हूँ और एशियाई क्वालीफ़ायर की सहायता से टोक्यो खेलों में अपनी जगह बनाने का प्रयास करुँगी।"

"मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मुझे दूसरा मौका मिलेगा लेकिन अब मैं और एकाग्रता से अभ्यास करुँगी। जो गलतियां मैंने पहले करि वह इस बार न करने का प्रयास करुँगी।"

Sakshi भारत के लिए पहलवानी में पदक जीतने वाली अकेली महिला पहलवान हैं और उन्होंने रियो ओलिंपिक खेलों में इतिहास रचा था लेकिन परिस्थितियां चार वर्ष बार बदल चुकी हैं और उन्हें टोक्यो में अपना स्थान बनाने के लिए एक कड़ी चुनौती का सामना करने पड़ेगा।

अपनी अभ्यास प्रणाली के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे लिए फिटनेस बहुत महत्वपूर्ण रहेगी और मैंने अपने ससुर के अखाड़े में काफी समय अभ्यास किया है। राष्ट्रीय कैम्प में मुझे अन्य पहलवानों के खिलाफ अभ्यास करने का मौका मिलेगा। कोच का मार्गदर्शन बहुत ज़रूरी होता है और कैम्प में मुझे इससे बहुत लाभ मिलेगा।"

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लॉकडाउन में कैसे मिली लड़ने की प्रेरणा

कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व में हर खिलाड़ी को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है लेकिन सबने कुछ नया सीखा है। Sakshi ने लॉकडाउन में बहुत समय अपने परिवार के साथ बिताया लेकिन उन्हें खेल के दृष्टिकोण से बहुत सी कठिनाइयां भी हुईं।

अपने प्रेरणा स्त्रोत के बारे में बात करते हुए Sakshi ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, "मैंने परिवार के साथ बहुत समय बिताया और कुछ नयी चीज़ें सीखी लेकिन सही तरह से अभ्यास न कर पाना मेरे लिए बहुत परेशानी की बात थी। मेरे पति और अन्य परिवार सदस्यों ने मुझे निराश नहीं होने दिया और प्रेरित किया।"

"मेरे परिवार ने मुझे ओलिंपिक खेलों पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा और समझाया कि पूरा संसार उस समय चुनौतियों का सामना कर रहा था। मैंने 14 वर्ष की आयु से पहलवानी करि है और पहली बार इतने समय तक अपने खेल से दूर रही। मैंने संगीत सुना और प्रेरित रहने के लिए किताबें भी पढ़ी।"

क्या Sakshi कर पाएंगी क्वालीफाई?

टोक्यो 2020 खेलों में अपनी जगह बनाने के लिए Sakshi को युवा पहलवान Sonam Malik का सामना करना होगा और उन्होंने अपनी रणनीति बना ली है। उन्होंने अपनी गलतियों को संज्ञान में लेते हुए अभ्यास किया है और उन्हें आशा है कि वह दोबारा नहीं होंगी।

अगर टोक्यो ओलिंपिक के लिए वह क्वालीफाई करती हैं तो उनका अनुभव बहुत काम आएगा और वह दो ओलिंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला पहलवान बनने का प्रयास करेंगी। ओलिंपिक खेलों के लक्ष्य ने Sakshi में एक नई ऊर्जा जागृत कर दी है और पूरा भारत आशा करेगा कि वह विश्व स्तर पर एक बार फिर चमकें।