जब Saina Nehwal ने रचा भारत के लिए बैडमिंटन इतिहास 

भारत की Saina Nehwal 2012 लंदन ओलिंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद ओलिंपिक पदक पटल पर।
भारत की Saina Nehwal 2012 लंदन ओलिंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद ओलिंपिक पदक पटल पर।

भारत के ओलिंपिक इतिहास में व्यक्तिगत पदक जीतने वालों की सूची में कई महान खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी कहानी खेल प्रेमियों को आज भी याद हैं। टोक्यो 2020 हर सप्ताह आपको बताएगा भारत के व्यक्तिगत पदक विजेताओं की कहानी और इस भाग में हम आपको बताएँगे कैसे Saina Nehwal की पदक विजय की कहानी। 

पहले की कहानी

बैडमिंटन का भारत से बहुत गहरा संबंध है और यह एक ऐसा खेल है जिसका भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत विकास हुआ। इसी कारण भारत में बैडमिंटन बहुत लोकप्रिय रहा है और पूरे देश में खेला जाता है। भारत के इतिहास में 21वीं सदी की शुरुआत से पहले महिला बैडमिंटन खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतने सफल नहीं होती थी लेकिन हरयाणा में पैदा हुई और हैदराबाद में अपना अधिकतम जीवन बिताने वाली Saina Nehwal इस स्थिति को बदल दिया।

हरयाणा राज्य के हिसार जिले में जन्मी Saina Nehwal ने आठ साल की आयू में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था और जब वह बड़ी हो रही थी तो उनके पिता का तबादला हैदराबाद हो गया। यह परिवर्तन उनके खेल जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ। Saina के माता पिता दोनो ही कुशल बैडमिंटन खिलाड़ी थे और इसी कारण उन्होंने अपनी बेटी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने का सपना देखा।

Saina की प्रतिभा बहुत कम आयू में उभर के आने लगी और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। साल 2008 में Saina ने विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप को जीत कर पूरे विश्व को अपनी प्रतिभा और कौशल का परिचय दिया। उसी साल बीजिंग में आयोजित हुए ओलिंपिक खेलों में Saina ने भाग लिया और भारत की ओर से बैडमिंटन प्रतियोगिता के क्वार्टरफाइनल में पहुँचने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी।

अगले कुछ सालों में Saina ने कई अंतर्राष्ट्रीय ख़िताब जीते और विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक बन गयी। साल 2009 में इंडोनेशिया ओपन जीत कर वह भारत के इतिहास में पहली खिलाड़ी बनी जिन्होंने एक बीडब्लूएफ ख़िताब अपने नाम किया। भारत के पूर्व खिलाड़ी Pullela Gopichand के संरक्षण में खेलते हुए Saina अपने खेल को एक अलग स्तर पर ले कर गयीं और उन्होंने वह कर दिखाया जो किसी और भारतीय महिला खिलाड़ी ने नहीं किया था।

लंदन ओलिंपिक खेलों के पहले Saina शानदार फॉर्म में थी और उन्होंने तीन ख़िताब जीत कर अपनी पदक दावेदारी को और भी मज़बूत कर लिया।

कैसे जीता पदक

Saina ने 2012 लंदन ओलिंपिक खेलों के अपने पहले मुकाबले में स्विट्ज़रलैंड की Sabrina Jacquet को आसानी से हराया और अपनी अगली प्रतिद्वंदी Lianne Tan को भी मैच में चुनौती देने का मौका नहीं दिया। उनका अगला मुकाबला नेदरलैंड की Yao Jie से हुआ और 21-14, 21-16 की आसान जीत के साथ उन्होंने अगले चरण में अपनी जगह बना ली।

लंदन ओलिंपिक खेलों के क्वार्टरफाइनल मुकाबले में Saina के सामने थी Tine Baun और शायद हरयाणा की इस खिलाड़ी के जीवन का यह सबसे कठिन मैच था। एक कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में Saina ने शानदार खेल दिखाते हुए सीधे गेम में मैच जीत कर सेमिफाइनल में अपनी जगह बना ली। फाइनल में पहुंचे के लिए Saina को स्वर्ण जीतने की सबसे प्रबल दावेदार Wang Yihan से मुकाबला करना पड़ा और चीन की खिलाड़ी ने शानदार खेल दिखाते हुए अपनी भारतीय प्रतिद्वंदी को सीधे गेम में 21-13, 21-13 से परास्त कर दिया।

Saina स्वर्ण जीतने का अवसर तो खो चुकी थी लेकिन कांस्य पदक जीतना उनके लिए अभी भी संभव था। उनके और भारत के पहले ओलिंपिक बैडमिंटन पदक के बीच थी चीन की Wang Xin जिन्होंने मैच की शानदार शुरुआत करते हुए पहला गेम 21-18 से अपने नाम कर लिया। दुसरे गेम के पहले ही कुछ मिनटों में Xin को चोट लग गयी और उन्हें दर्द के कारण मैच छोड़ना पड़ा जिसका मतलब था कि Saina ओलिंपिक कांस्य पदक कि विजेता बन चुकी थी।

उनका सपना सच हो चुका था और इस पदक को जीतने के बाद Saina ने कहा, "मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब उन्होंने मैच छोड़ दिया क्योंकि मैं अपनी प्रतिद्वंदी को हरा कर पदक जीतना चाहती थी। उसे दर्द में देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा और तभी मैं भाग कर Xin के पास गयी।"

भाग्य ने उनका साथ ज़रूर दिया लेकिन Saina कांस्य पदक की पूर्ण रूप से हक़दार थी और यह भी याद रखना होगा कि ओलिंपिक खेलों के कुछ समय पहले उन्हें बुखार का भी सामना करना पड़ा था।

LONDON, ENGLAND - AUGUST 04:  Xin Wang of China is consoled by Saina Nehwal of India after sustaining an injury forcing her to retire from her Women's Singles Badminton Bronze Medal match on Day 8 of the London 2012 Olympic Games at Wembley Arena on August 4, 2012 in London, England.  (Photo by Michael Regan/Getty Images)
LONDON, ENGLAND - AUGUST 04: Xin Wang of China is consoled by Saina Nehwal of India after sustaining an injury forcing her to retire from her Women's Singles Badminton Bronze Medal match on Day 8 of the London 2012 Olympic Games at Wembley Arena on August 4, 2012 in London, England. (Photo by Michael Regan/Getty Images)
2012 Getty Images

आगे कि कहानी

ओलिंपिक खेलों में पदक जीतने के बाद Saina राष्ट्रिय स्तर पर एक बहुत लोकप्रिय खेल हस्ती बन चुकी थी और उन्हें देख कर कई युवाओं ने बैडमिंटन को चुना। लंदन खेलों के बाद Saina ने अपना फॉर्म बरक़रार रखा और अक्टूबर 2012 में डेनमार्क ओपन अपने नाम किया। अगले कुछ सालों में Saina कई प्रतियोगिताएं के फाइनल में पहुंची और अनेकों में पदक जीते।

साल 2015 के विश्व चैंपियनशिप फाइनल में पहुँचने के बाद Saina स्पेन की Carolina Marin से एक कड़े मुकाबले में हार गयी और दो साल बाद उसी प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीता। रियो में आयोजित हुए 2016 ओलिंपिक खेलों में Saina दुसरे मैच में हार गयीं और क्वार्टरफाइनल में अपनी जगह नहीं बना पायीं।

कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करना और उन्हें परास्त करना Saina के स्वभाव का एक अहम् हिस्सा है और उन्होंने 2018 में यह पूरे विश्व को दिखाया। ख़राब फॉर्म और चोटों से जूझ रही Saina ने 2018 इंडोनेशिया मास्टर्स में रजत पदक जीता और गोल्ड कोस्ट में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ खेलों में अपने ही देश की PV Sindhu को हरा कर स्वर्ण अपने नाम किया।

ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतना अभी भी Saina के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण लक्ष्य है और हालांकि पिछले दो सालों में उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया है, उनकी सहनशीलता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। इस साल होने वाले टोक्यो 2020 खेलों में Saina पदक जीतने की प्रबल दावेदारों में नहीं गिनी जा रही हैं लेकिन वह अभी भी आशा करेंगी कि पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर सकें।