फिटनेस के चलते टीम में देखने को मिले बड़े बदलाव - Rani Rampal

भारत की महिला हॉकी टीम की कप्तान Rani Rampal टीम में बदलाव लाने के लिए फिटनेस को श्रेय देती हैं। (Christopher Lee/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत की महिला हॉकी टीम की कप्तान Rani Rampal टीम में बदलाव लाने के लिए फिटनेस को श्रेय देती हैं। (Christopher Lee/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान, Rani Rampal ने विशेष रूप से टोक्यो 2020 से बात की, और बताया कि कैसे फिटनेस ने टीम की गतिशीलता को बदल दिया, और रियो 2016 में हारने के बाद से उन्होंने क्या सीखा है।

‘घर में टोक्यो के लिए अर्हता प्राप्त करना एक बड़ी बात थी'

1980 के मास्को ओलंपिक में अपनी शुरुआत करने के बाद - जहां वे चौथे स्थान पर रहे - भारतीय महिला हॉकी टीम को अपनी ओलंपिक वापसी करने के लिए 36 साल का इंतजार करना पड़ा।

उनका सपना आखिरकार तब साकार हुआ जब वे रियो 2016 के लिए क्वालिफाई हुए, लेकिन उनका सफर वहीं खत्म नहीं हुआ।

2019 में FIH क्वालिफायर में सयुंक्त राष्ट्र अमेरिका को 6-5 से हराने के बाद, महिला टीम ने सफलतापूर्वक टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई किया - जो उनका लगातार दूसरा ओलंपिक था।

Rani ने टोक्यो 2020 से कहा, "लगातार दूसरे ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना बहुत बड़ी बात है।"

हालांकि, इस क्षण का और भी अधिक महत्व था क्योंकि टीम ने भुवनेश्वर, ओडिशा में अपने घर की भीड़ के सामने अपने लक्ष्य को प्राप्त किया - एक शहर जो हॉकी के लिए अपने प्यार के लिए जाना जाता है।

"सबसे पहले जब हमने अपने देश में, भुवनेश्वर में क्वालीफाई करा था, वो बहुत बड़ी बात थी। भुवनेश्वर जैसे शहर में जहाँ पर लोग हॉकी के दीवाने है, वहाँ हमे खेलने का मौका मिला, और वो अनुभव लेने का मौका मिला की अपने देश में क्वालीफाई होना कैसा महसूस होता है,” उन्होंने बताया।

इतना ही नहीं, बल्कि Rani जिन्हें हाल ही में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया - जो की भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान है - वह थी जिन्होंने विजयी गोल किया था।

"अपने देश में क्वालीफाई करके, और ख़ास कर उसमे विनिंग गोल मारके बहुत बढ़िया फीलिंग आई की हम अपने देश को ओलंपिक में लेकर जा रहे है।"

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'पिछले पांच सालों में बहुत कुछ बदला'

इतिहास इस तथ्य का गवाह है कि विभिन्न खेलों में वर्षों से कई टीमों ने चैंपियन बनने की अपनी खोज में लगभग निश्चित विफलता का सामना करने के बाद वापसी की है।

ऐसा लग रहा था कि यह स्क्रिप्ट भारत की हॉकी टीम के साथ-साथ है।

"महिलाओं की [भारत] हॉकी में पिछले चार से पांच वर्षों में बहुत सारे बदलाव आए हैं," उन्होंने समझाया।

“हमारे देश में वूमेंस टीम को कोई इतना जयदा पूछता नहीं था, या यह कहे कोई देखता नहीं था। पर आज कल जैसे सोशल मीडिया पर लोग वूमेंस हॉकी को काफी फॉलो कर रहे हैं।"

लेकिन, कुछ और भी था जिसने महिलाओं की टीम की गतिशीलता को बदल दिया।

"पर सबसे बड़ा बदलाव जो आया हैं वूमेंस हॉकी में वह इसकी फिटनेस को लेके आया है। पहले यूरोपियन् टीम्स के साथ जब हम खड़े होते थे या जब उनके साथ खेलना होता था तो एक डर था कहीं न कहीं की हम शारीरिक रूप में उनके जितने स्ट्रांग नहीं है।

"लेकिन आज वो चीज़ बिलकुल नहीं लगती, क्यूंकि हमे लगता है हम उनके साथ पूरा कम्पीट करते हैं फिटनेस वाइज।"

'युवाओं का मिश्रण और अनुभव हमारी टीम को खास बनाते हैं'

संतुलन - यह एक ऐसा शब्द है; प्रमुख कारकों में से एक जो एक टीम को आकार देने और उन्हें महिमा के लिए एक रस्ते पर रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

हालांकि, Rani Rampal की इस टीम में, यह फिटनेस और कोचिंग शैली का एक संयोजन था जिसने टीम के सुधार में एक बड़ी भूमिका निभाई।

"हमारी टीम ने पिछले 4-5 सालों में काफी अच्छी डेवलपमेंट की है, Rampal ने समझाया।“ हमारी टीम में सीनियर खिलाड़ी भी हैं, जूनियर भी हैं, और जो हमारा कोचिंग स्टाफ हैं न उन्होंने भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई है हमारी टीम की डेवलपमेंट में।“

"जैसे की हमारे साइंटिफिक एडवाइजर हैं, उन्होंने हमारी टीम की फिटनेस पर बहुत काम किया है, हर एक खिलाड़ी पर और पूरी टीम पर भी, उन्होंने काफी मेहनत करी है।"

"क्यूंकि हॉकी अब बहुत फ़ास्ट हो चुकी है आज के टाइम में, और हमे वो फिटनेस चाइए जो दूसरी टीम के साथ मैच कर सके, और बाकि जो हमारा कोचिंग स्टाफ हैं उन्होंने हर एक खिलाडी पर अलग तरीके से काम करा है।"

कोचिंग टीम के अलावा, Rampal हॉकी इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) दोनों को टीम को और अधिक प्रतिस्पर्धी शेड्यूल प्रदान करने का श्रेय देती हैं, जिसने न केवल टीम को एक्सपोज़र दिया बल्कि खिलाड़ियों का विकास भी सुनिश्चित किया।

परिणामस्वरूप, टीम अपने वर्तमान उच्च मानकों तक पहुंच सकी।

"ख़ास कर जो हमे पिछले सालों में हॉकी इंडिया की तरफ से जो एक्सपोज़र मिला है, या फिर SAI की तरफ से भी, उन चीज़ों से हमारी काफी इम्प्रूवमेंट हुई है, क्यूंकि इसी की वजह से हमे अच्छी टीमों के ख़िलाफ़ खेलने का मौका मिला और हम बेहतर हो पाए।

Rani Rampal का मानना है कि टीम में सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों का मिश्रण इसे खास बनाता है। (Christopher Lee/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
Rani Rampal का मानना है कि टीम में सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों का मिश्रण इसे खास बनाता है। (Christopher Lee/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2018 Getty Images

‘रियो खेल एक महान अनुभव था'

भारतीय महिला हॉकी टीम रियो 2016 में अपने समूह में अंतिम स्थान पर रही, उन्होंने चार मैच हारे और एक ड्रॉ खेला।

पदक न सही, भारतीय महिला हॉकी टीम अपने साथ एक अनुभव जरूर ले कर आई। 

उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और Rani को लगता है टीम इस बार वही गलतियाँ नहीं करेंगी जब वे अगले साल टोक्यो में मैदान में उतरेंगी।

"रियो 2016 हमारा पहला अनुभव था ओलंपिक का, और हमने काफ़ी चीज़ें सीखी। हम कोशिश करेंगे की जो अगले साल के ओलंपिक्स हैं वहां हम पुरानी गलतियां न दोराहें,” उन्होंने कहा।

"इस बार भी काफी ऐसे खिलाड़ी हैं हमारी टीम में जिन्होंने रियो ओलंपिक में भाग लिया था, उनके पास अब अनुभव है,” उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा।

"काफी चीज़ें माईने रखेंगी, जैसे की आप उस प्रेशर में खुद को कैसे कूल रखोगे और कैसे चीज़ें हैंडल करोगे। आपको ट्रेनिंग में अपनी गलतियों का एहसास हो जाता है - की जो चीज़ें यहाँ गलत हुई हैं हमे वो ओलंपिक में नहीं रिपीट करनी,” Rani ने समझाया।

हरियाणा में जन्मी Rani, जिन्होंने 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था, वह जानती हैं कि ओलंपिक खेलों जैसे टूर्नामेंट में सीनियर खिलाड़ियों का होना कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय कप्तान ने बताया कि कैसे टीम के सीनियर खिलाड़ी क्रंच गेम्स के दौरान युवाओं की मदद कर सकते हैं।

"और इस टीम में जो सीनियर खिलाड़ी हैं वह जूनियर्स की मदद कर सकते हैं। हो सकता है की नए खिलाड़ी थोड़ा नर्वस हो जाए, तो यह हमारा काम हैं की हम उनकी मदद करे और उनसे कहे, "यह नार्मल है, हमे हर मैच पर फोकस करना हैं और हमे हर मैच एक-एक करके लेना है,” Rani ने टोक्यो 2020 को बताया।

"हमने यह भी सीखा हैं की हमे रश नहीं करना ओलंपिक्स में।

ज्यादा लम्बा नहीं सोचना

और एक-एक मैच लेकर चलना है।"

"हमें विश्वास है कि हम अच्छा करेंगे'

समूह में अंतिम स्थान पर रहने के चार साल बाद, यह भारत की महिला हॉकी टीम अगले साल टोक्यो में किसी के खिलाफ खेलने के लिए तैयार है।

टीम लीडर के रूप में, Rani ने अपने खिलाड़ियों को व्यक्तियों के रूप में विकसित होते और समय के साथ बेहतर खिलाड़ी बनते देखा है। वह महसूस करती हैं कि टीम में मजबूत आत्मविश्वास है कि वे अगले साल ओलंपिक खेलों में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

"हमारी टीम काफ़ी अच्छी है, हमारी टीम में काफ़ी विश्वास हैं की हम ओलिंपिक में जरूर अच्छा करेंगे।“

"हमारा पहला लक्ष्य क्वार्टरफईनल तक कैसे पहुंचना है वो होगा, क्यूंकि क्वार्टरफईनल के बाद एक दूसरा टूर्नामेंट शुरू हो जाता है, और फिर वो किसी का भी गेम हो जाता है, उसके बाद, जो अच्छा खेलेगा, अच्छा परफॉर्म करेगा, अपने चान्सेस लेगा, वो जीत जायेगा।“

"जो हमारा पहला टूर्नामेंट होगा (क्वार्टरफईनल तक), हमे पहले उसपर फोकस करना है, और फिर उसके बाद हमे अपने अगले कदम के बारे में सोचना होगा की कैसे हम सेमिफाइनल तक जा सकते हैं और कैसे फाइनल तक।"

इस बीच, Rani Rampal की अगुवाई वाली भारतीय महिला हॉकी टीम शनिवार 24 जुलाई 2021 को ओई हॉकी स्टेडियम में नीदरलैंड का सामना करेगी।