एकलौता ओलंपिक पदक: वह चैंपियन जिसने सिर्फ एक बार अपने देश का दौरा किया था

टोगो के Benjamin Boukpeti ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में कायक (K1) फाइनल में प्रतिस्पर्धा की। (Shaun Botterill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
टोगो के Benjamin Boukpeti ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में कायक (K1) फाइनल में प्रतिस्पर्धा की। (Shaun Botterill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

ओलंपिक मैडल जीतना हजारों एथलीट्स के लिए एक लक्ष्य है, लेकिन इन 24 देशों के लिए यह एक सपना है जो केवल एक बार ही सच हुआ है। Tokyo2020.org उन शानदार क्षणों पर एक नज़र डालता है।

बिल्ड-उप

2003 में, Benjamin Boukpeti ने एक निर्णय लिया जिसने न केवल उनका जीवन हमेशा के लिए बदल दिया, बल्कि टोगो के ओलंपिक इतिहास में उनका नाम अंकित कर दिया।

Boukpeti का जन्म Lagny-sur-Marne, फ्रांस में एक फ्रांसीसी मां और टोगोली पिता के घर हुआ था। उन्होंने केवल एक बार अपने मूल देश की यात्रा की थी जब वह एक बालक थे। लेकिन ओलंपिक सपनों के साथ एक प्रतिभाशाली केयकर के रूप में, उन्होंने फ्रांस से ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना बहुत कठिन पाया - क्योंकि वह दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ कैनोइस्ट्स से रैंक में पीछे थे।

तब, Boukpeti ने टोगो का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया, एक ऐसा देश जिसमें उन्होंने केवल एक बार पैर रखा था। टोगो के लिए, वह ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम था।

उनके शब्दों में, यह एक मुश्किल फैसला था। वास्तव में, उन्होंने महसूस किया कि दोनों देशों में उन्हें कुछ बाहरी व्यक्ति माना जाता है।

“टोगो में, मैं फ्रांसीसी हूं। फ्रांस में, मैं टोगोलीज़ हूं।"

इतिहास कैसे बना

Boukpeti का पहला ओलंपिक अनुभव एथेंस 2004 में था, जहां वह हेलिनिको में Olympic Whitewater Stadium में प्रतिस्पर्धा करने वाले एकमात्र अफ्रीकी थे। वह सेमीफाइनल तक पहुंचे थे और उनकी कुल रैंक 18 थी - एक उपलब्धि जो सम्मानजनक थी।

लेकिन यह वह पल नहीं था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी और यह क्षण चार साल बाद बीजिंग में आया।

बीजिंग 2008 में, Boukpeti को उद्घाटन समारोह के लिए अपने देश के ध्वजवाहक के रूप में चुना गया था। उन्होंने अपने 8वें ओलंपिक खेलों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाली एक छोटी सी टीम के हिस्से के रूप में टोगोली के झंडे को लहराया।

जब प्रतियोगिता शुरू हुई, तो Boukpeti (दुनिया में 56वें स्थान पर) पसंदीदा से बहुत दूर था।

लेकिन Boukpeti के सपने बड़े थे। वह सिर्फ क्राउड फेवरेट नहीं बने रहना चाहते थे।

अपने सेमीफाइनल रन के दौरान, उन्होंने सबसे तेज समय पोस्ट करके सभी को चौंका दिया। फिर, अविश्वसनीय रूप से, उन्होंने फाइनल में अपना फॉर्म बनाए रखा - हालाँकि वह जर्मनी के विजेता Alexander Grimm और फ्रांस के Fabien Lefevre से पीछे तीसरे स्थान पर रहे।

Boukpeti ने कांस्य पदक जीता था। लेकिन इससे भी ज्यादा, उन्होंने टोगो के ओलंपिक इतिहास में पहला पदक जीता था।

Boukpeti ने अपनी कश्ती पर चप्पू तोड़कर जश्न मनाया - जो एक आइकोनिक ओलंपिक क्षण था।

कांस्य पदक विजेता, टोगो के Benjamin Boukpeti ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में कयाक (K1) पुरुष फाइनल में प्रतिस्पर्धा के बाद जश्न मनाया। (Adam Pretty/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
कांस्य पदक विजेता, टोगो के Benjamin Boukpeti ने बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में कयाक (K1) पुरुष फाइनल में प्रतिस्पर्धा के बाद जश्न मनाया। (Adam Pretty/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2008 Getty Images

जीवन बदलने वाला प्रभाव

2008 के अगस्त में जब Boukpeti टोगो लौटे, तो लोगों ने उनका बहुत अच्छे से स्वागत किया। उन्हें एनेहो शहर का राजकुमार बना दिया गया और वह एक राष्ट्रीय हस्ती भी बन गए थे - ऐसा कुछ जिसके लिए उन्हें अनुकूल होने में समय लगा: "यह मजेदार है कि मैं फ्रांस में कैसे गुमनामी में रहता हूं, लेकिन टोगो में, मैं काफी प्रसिद्ध हूं, और मुझे इस सब की आदत भी नहीं है।"

टोगो को उसका सबसे बड़ा ओलंपिक क्षण देने के बाद, Boukpeti ने समुदाय के लिए कुछ करने का फैसला किया। उन्होंने देश में कयाकिंग को विकसित करने के लिए एक परियोजना बनाई और एक खेल शिविर का शुभारंभ किया, जिससे सैकड़ों बच्चों को एक साल में आठ विभिन्न ओलंपिक खेलों को खेलने का मौका मिला।

उनका दृढ़ विश्वास है कि ओलंपिक आंदोलन के मूल्य लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। ओलंपिक चैनल के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा:

“ओलंपिक भावना हमें जीवित रखती है। यह यूनिवर्सल है और यह हमें बेहतर इंसान बनाती है।”

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