एकलौता ओलंपिक पदक - Opeloge को आखिरकार पहचान मिली

समोआ की Ele Opeloge महिलाओं की +75 किग्रा ग्रुप A में बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में भारोत्तोलन में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। (Jed Jacobsohn/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
समोआ की Ele Opeloge महिलाओं की +75 किग्रा ग्रुप A में बीजिंग 2008 ओलंपिक खेलों में भारोत्तोलन में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। (Jed Jacobsohn/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

ओलंपिक मेडल जीतना हजारों एथलीट्स के लिए एक लक्ष्य है, लेकिन इन 24 देशों के लिए यह एक सपना है जो केवल एक बार ही सच हुआ है। Tokyo2020.org उन शानदार क्षणों पर एक नज़र डालता है।

बैकग्राउंड

समोआ के छोटे राष्ट्र की आबादी सिर्फ 196,000 से अधिक है, लेकिन वे ओलंपिक में पदक जीतने वाले दो पसिफ़िक द्वीप देशों में से एक हैं।

समोआ जो 1984 के लॉस एंजिल्स खेलों के बाद से ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रहा था, उसने 2017 में अपना पहला पदक जीता, जब वेटलिफ्टर Ele Opeloge ने ओलंपिक 2008 बीजिंग से अपना योग्य रजत पदक प्राप्त किया।

Opeloge, जिन्होंने महिला +75 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा की, एक वेटलिफ्टिंग परिवार से आती है। उनका भाई एक राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक विजेता है और छोटी बहन भी ओलंपियन है जबकि चार अन्य रिश्तेदारों ने भी राष्ट्रमंडल स्तर पर प्रतिस्पर्धा की है।

वेटलिफ्टर ओलंपिक पदक के लिए ओशिनिया क्षेत्र से सबसे मजबूत दावेदारों में से एक थी। 2008 में बीजिंग खेलों में प्रतिस्पर्धा करने से पहले, उन्होंने 2007 पसिफ़िक खेलों और ओशिनिया वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप दोनों में स्वर्ण पदक जीते थे।

इतिहास बनाना

Opeloge को समोआ के लिए ध्वजवाहक के रूप में नामित किया गया था, जहाँ वह सिर्फ छह एथलीट्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही थी।

वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता Beihang University Gymnasium में आयोजित की गई थी जहाँ Opeloge ने 269kg का वजन उठाकर अपना व्यक्तिगत रिकॉर्ड मैच किया। हालांकि, वह पोडियम तक पहुंचने में नाकाम रही, क्योंकि कजाकिस्तान की Mariya Grabovetsykaya ने कांस्य पदक का दावा करने के लिए 270 किग्रा का वजन उठाया था।

दुर्भाग्य से, इसका मतलब है कि Opeloge खाली हाथ घर आई थी। उन्होंने समोआ के लोगों से खेलों में पदक न जीतने के लिए माफी भी मांगी थी।

लेकिन 2016 में, अंतरराष्ट्रीय वेइलिफ्टिंग महासंघ (IWF) ने बीजिंग ओलंपिक 2008 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के विश्लेषण में बताया कि महिला +75 किग्रा वर्ग में रजत और कांस्य पदक विजेता दोनों ही अपने डोपिंग टेस्ट में फेल होगए।

इसका मतलब यह था कि Opeloge, जो पहले ही रिटायर हो चुकी थी, ने रजत पदक जीता और इस तरह समोआ के लिए पहला ओलंपिक पदक हासिल किया।

"मैं बहुत खुश हूं और भगवान की शुक्रगुजार हूं," Opeloge ने 2017 में New Zealand's 1 न्यूज़ को बताया।

इस पदक के साथ, समोआ फिजी के बाद केवल दूसरा पसिफ़िक द्वीप राष्ट्र बन गया जिसने ओलंपिक पदक जीता था।

समोआ ओलंपिक वेटलिफ्टिंग टीम की Ele Opeloge ने लंदन 2012 ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह के दौरान अपने देश का झंडा फहराया। (Laurence Griffiths/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
समोआ ओलंपिक वेटलिफ्टिंग टीम की Ele Opeloge ने लंदन 2012 ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह के दौरान अपने देश का झंडा फहराया। (Laurence Griffiths/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2012 Getty Images

जीवन बदलने वाला प्रभाव

बीजिंग 2008 के बाद, Opeloge ने दिल्ली में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता, इसके बाद ग्लासगो में 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत जीता।

बीच में, वह लंदन 2012 के लिए ओलंपिक चरण में लौटी, जहां वह एक बार फिर से ध्वजवाहक थी। हालाँकि, चूंकि वह खेलों से ठीक पहले चिकन-पॉक्स और टाइफाइड से उबर चुकी थी, वह अपने फॉर्म में शीर्ष पर नहीं थी और इस तरह वह छठे स्थान पर रही।

बाद में, कांस्य पदक विजेता के अयोग्य होने के बाद उन्हें पाँचवें स्थान पर रखा गया।

2008 में बीजिंग खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के नौ साल बाद, Opeloge, जिन्हें 'समोआ की गोल्डन गर्ल' करार दिया गया था, को 5 अप्रैल 2017 को सरकारी भवन के सामने एक छोटे से समारोह के दौरान ओलंपिक पदक प्रदान किया गया।

समारोह के दौरान, उन्होंने समोआ ऑब्जर्वर से एक उपहार भी प्राप्त किया। उस ऑब्जर्वर ने Opeloge के लिए एक फंड की स्थापना की थी जब सामोन सरकार ने कहा था कि वे उन्हें आर्थिक रूप से पुरस्कार नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने स्वर्ण पदक नहीं जीता था।

फंड में योगदान न केवल सामोआ से बल्कि दुनिया भर के लोगों ने Opeloge की उपलब्धि को पहचानने के लिए किया था।

उनके पदक प्राप्त करने के बाद, वेटलिफ्टर, जो तब 30 वर्ष की थी, ने उम्मीद की कि उनकी उपलब्धि कुछ और सामोआ के एथलीट्स को प्रेरित कर सकती है।