एकलौता ओलंपिक पदक - जॉर्डन के ताइक्वांडो चैंपियन की कहानी

स्वर्ण पदक विजेता, जॉर्डन के Ahmad Abughaush ने 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में पुरुषों -68 किलोग्राम गोल्ड मेडल ताइक्वांडो मैच जीतने के बाद पोडियम पर जश्न मनाया। (Laurence Griffiths/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
स्वर्ण पदक विजेता, जॉर्डन के Ahmad Abughaush ने 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में पुरुषों -68 किलोग्राम गोल्ड मेडल ताइक्वांडो मैच जीतने के बाद पोडियम पर जश्न मनाया। (Laurence Griffiths/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

ओलंपिक मेडल जीतना हजारों एथलीट्स के लिए एक लक्ष्य है, लेकिन इन 24 देशों के लिए यह एक सपना है जो केवल एक बार ही सच हुआ है। Tokyo2020.org उन शानदार क्षणों पर एक नज़र डालता है।

बैकग्राउंड

मॉस्को 1980 खेलों में अपनी शुरुआत करने के छत्तीस साल बाद, जॉर्डन ने अपना पहला ओलंपिक पदक जीता और यह स्वर्ण पदक था।

Ahmad Abughaush, जो सिर्फ 20 साल के थे, ने ओलंपिक खेलों रियो 2016 में पुरुषों की ताइक्वांडो -68 किग्रा डिवीजन में पदक के लिए एक बाहरी दावेदार के रूप में नेतृत्व किया था।

जॉर्डन की राजधानी अम्मान में जन्मे, Abughaush ने पहली बार स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र में छह साल की उम्र में ताइक्वांडो किया।

उनकी प्रतिभा को जल्दी पहचान लिया गया और उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के लिए चुना गया। 2010 में, वह जूनियर ताइक्वांडो विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले एकमात्र अरब एथलीट थे।

अगले वर्ष, उन्होंने फ़िन-वेट डिवीज़न (-54 किग्रा) में विश्व ताइक्वांडो चैंपियनशिप में एक वरिष्ठ के रूप में प्रतिस्पर्धा की, लेकिन 32 के दौर में अंतिम कांस्य पदक विजेता, Meisam Bagheri से हार गए। भले ही उन्हें देश की ओलंपिक समिति द्वारा सर्वश्रेष्ठ जॉर्डन का एथलीट पुरस्कार मिला, लेकिन चोटों ने उनकी तैयारियों को परेशान करना शुरू कर दिया।

सबसे पहले उन्हें कुल्हे की चोट ने परेशान किया और वह करीब दो महीने तक बाहर रहे। कूल्हे में लगी चोट से उभरने के हफ्तों के बाद उन्हें अपने दाहिने एसीएल को घायल कर दिया, जिसके लिए उन्हें पूरे एक वर्ष खेल से दूर रहने पर विवश होना पड़ा। वापस लौटने के बाद, उन्होंने फिर से अपना बायां घुटना जख्मी कर लिया और दो साल तक खेल से दूर रहे।

रूस के Alexey Denisenko ने जॉर्डन के Ahmad Abughaush के खिलाफ 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में गोल्ड-मेडल ताइक्वांडो मैच में मुकाबला किया (Laurence Griffiths/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
रूस के Alexey Denisenko ने जॉर्डन के Ahmad Abughaush के खिलाफ 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में गोल्ड-मेडल ताइक्वांडो मैच में मुकाबला किया (Laurence Griffiths/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 Getty Images

इतिहास बनाना

सात मिलियन से अधिक लोगों वाला देश जॉर्डन ने कभी भी 10 से अधिक एथलीट्स को ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं भेजा है। वास्तव में, ब्राजील में केवल आठ जॉर्डन के एथलीट थे। हालांकि, सिडनी 2000 में ओलंपिक इवेंट में ताइक्वांडो की शुरुआत के बाद से, जॉर्डन ने हमेशा प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक एथलीट भेजा था।

देश Ibrahim Aqil के साथ एथेंस 2004 में अपना पहला पदक जीतने के करीब आया - जो कांस्य पदक मैच में पहुंच गया था, लेकिन वह फ्रेंचमैन Pascal Gentil से हार गया और चौथे स्थान पर रहा।

बारह साल बाद, Abughaush ने रियो 2016 खेलों में दुनिया के 10वें नंबर खिलाड़ी के रूप में प्रवेश किया।

उन्होंने पहले दो बार के विश्व चैंपियन और लंदन 2012 के रजत पदक विजेता, Lee Dae-hoon को क्वार्टर फाइनल में हराया; और फिर ओलंपिक चैंपियन, स्पेन के Joel Gonzalez को सेमीफाइनल में हराकर, उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया।

फाइनल में, उन्होंने रूस के Alexey Denisenko का सामना किया, जिन्होंने 2015 विश्व चैम्पियनशिप में 64 के राउंड में Abughaush को हराया था। लेकिन इस बार, उन्होंने अपना बदला लिया और मैच जीत लिया। जॉर्डन के एथलीट ने अपने कौशल और शक्ति का प्रदर्शन किया - और जॉर्डन को उसका पहला ओलंपिक पदक दिलवाया - 10-6 की जीत के साथ।

अपनी जीत के बाद बोलते हुए, Abughaush ने कहा: "सभी खेलों में जॉर्डन के इतिहास में पहला पदक जीतने में सक्षम होना एक अवर्णनीय भावना है।“

"पूरी दुनिया के सामने रियो में बजे जा रहे जॉर्डन के राष्ट्रगान को सुनना भी एक शानदार एहसास है।"

जीवन बदलने वाला प्रभाव

ओलंपिक चैंपियन बनने के बाद से, Abughaush जॉर्डन में एक सेलिब्रिटी बन गया है।

2018 में Olympic.org से उन्होंने कहा, "जब भी लोग मुझे देखते हैं तो हर कोई मेरे से मिलने के लिए आता है। अब जब मैं मॉल या दुकानों पर जाता हूं, तो लोग मुझे पहचानते हैं और मेरे साथ कुछ तस्वीरें लेने आते हैं।"

स्वर्ण पदक जीतने के बाद, वह विभिन्न चैनलों को साक्षात्कार देने में व्यस्त हैं और हाल ही में उन्हें जॉर्डन की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम के प्रशिक्षण सत्र को देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, उनका लक्ष्य अगली पीढ़ी को प्रेरित करना है।

“मेरी पसंदीदा चीज़ जॉर्डन में यहाँ के युवाओं के लिए एक उदाहरण बनना है।

"[गोल्ड मेडल जीतने] के बाद से कई लोगों ने ताइक्वांडो खेलना शुरू कर दिया है। मैं उनका रोल मॉडल बन गया हूं, और सिर्फ ताइक्वांडो एथलीट्स के लिए नहीं, बल्कि हर खेल में हर किसी के लिए। यही सबसे अच्छी बात है।"

रियो 2016 खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद से, Abughaush ने अपने संग्रह में पदक जोड़ना जारी रखा है - 2017 में विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक और दो साल बाद उसी प्रतियोगिता में एक रजत पदक जीता। उन्होंने 2017 ग्रैंड पिक्स में दो स्वर्ण पदक और 2018 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता।

वह टोक्यो 2020 में ओलंपिक खेलों में लौटने का भी लक्ष्य बना रहे हैं और चाहते हैं कि उनका नाम एक बार फिर से इतिहास की किताबों में लिखा जाए।

"मुझे उम्मीद है कि मैं जॉर्डन से दो ओलंपिक पदक जीतने वाला पहला एथलीट बन सकता हूं। मेरा लक्ष्य पोडियम पर होना और फिर से स्वर्ण हासिल करना है।"