वॉटर पोलो

Photo by Ryan Pierse/Getty Images
Photo by Ryan Pierse/Getty Images

हर टीम में 7 खिलाड़ी होते हैं और दोनों ही टीमों का लक्ष्य अपने प्रतिद्वंदी के खिलाफ गोल दागना होता है। खेल के दौरान कोई भी खिलाड़ी अपने पाँव को ज़मीन पर नहीं लगा सकता।

टोक्यो 2020 प्रतियोगिता “एक मिनट, एक सपोर्ट”

हम सभी दर्शकों को वॉटर पोलो के नियम और हाईलाइट्स दिखाएंगे। यदि आप वॉटर पोलो से अवगत हैं या फिर आप ज़्यादा जानकारी लेना चाहते हैं तो “एक मिनट, एक सपोर्ट” बताएगा कि यह खेल काम कैसे करता है। निचे दी गई वीडियो देखें।

वन मिनट, वन स्पोर्ट | वाटर पोलो
01:24

अवलोकन

वॉटर पोलो स्पोर्ट का जन्म सन 1860, इंग्लैंड में हुआ था, जहां यह खेल लेक, समुन्द्र और नदि पर खेला जाता था। यह खेल स्विमिंग का कौशल और ताकत का प्रतीक माना जाता है। हालांकि खेल के नियमों को बदला गया ताकि खिलाड़ियों को चोट न लगे क्योंकि इस खेल में शारीरिक ताकत का उपयोग भारी मात्रा में होता है। साल 1900 में मेंस वॉटर पोलो को पेरिस ओलंपिक गेम्स में पहली बार शामिल किया गया। इसके बाद सिडनी में हुए 2000 ओलंपिक गेम्स में वूमेंस वॉटर पोलो को भी हिस्सा बनाया गया।

इवेंट प्रोग्राम 

  • 12 टीम टूर्नामेंट (मेन) 
  • 10 – टीम टूर्नामेंट (वूमेन)
रियो डी जनेरियो, ब्राजील - अगस्त 09: इटली के Giulia Gorlero ने 9 अगस्त 2016 को Maria Lenk Aquatics Centre में रियो 2016 ओलंपिक खेलों के 4 वें दिन इटली और ब्राजील के बीच ग्रुप ए विमेंस वाटरपोलो मैच के शुरुआती दौर में एक गोल बचाया।, रियो डी जनेरियो, ब्राजील में। (Phil Walter / गेटी इमेज द्वारा फोटो)
रियो डी जनेरियो, ब्राजील - अगस्त 09: इटली के Giulia Gorlero ने 9 अगस्त 2016 को Maria Lenk Aquatics Centre में रियो 2016 ओलंपिक खेलों के 4 वें दिन इटली और ब्राजील के बीच ग्रुप ए विमेंस वाटरपोलो मैच के शुरुआती दौर में एक गोल बचाया।, रियो डी जनेरियो, ब्राजील में। (Phil Walter / गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 Getty Images

खेल का सार

एकमात्र गेंद पूल में खेली गई

इस खेल में 4 क्वार्टर होते हैं और हर क्वार्टर 8 मिनट का होता है। गोलकीपर के अलावा, अन्य सभी खिलाड़ी बॉल को एक हाथ से संभालते हैं और उन्हें अटैक शुरू करने के 30 सेकंड के अंदर हमला करना होता है। इस 30 सेकेंड में हर टीम को बॉल अपनी तरफ रख सेंटर तक जाना होता है ताकि वह अच्छी पोज़ीशन में आकर बॉल को गोल की तरफ सफतलापूर्वक मारने में सफल हो सकें। इस शारीरिक रूप से कठिन खेल में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों का प्रयोग किया जा सकता है।

सभी खिलाड़ी 30 मीटर बटा 20 मीटर के दायरे में दौड़ सकते हैं और यह दायरा कम से कम 2 मीटर डीप भी होता है। यह खिलाड़ी चलते पानी के सामने डटकर खड़े होते हैं और शूट मारने के लिए अपने ऊपरी शरीर का प्रयोग करते हैं। एक अच्छी शॉट द्वारा बॉल को 70 किमी प्रतिघंटे की गति से मारा जा सकता है। अच्छे पास, काउंटर अटैक और प्रतिद्वंदी के डिफेंस को तोड़कर एक टीम आगे बढती है। असल मायनों में यही इस खेल की दिलचस्पी है।

वॉटर पोलो जैसे खेल में फ़ाऊल काफी ज़्यादा मात्रा में देखे जाते हैं। इसमें दो तरह के फ़ाऊल होते हैं, एक होता है “आर्डिनरी फ़ाऊल्स” और एक “पर्सनल फाऊल्स”। ज़्यादातर “आर्डिनरी फाऊल्स” बॉल को पास करने के दौरान देखा जाता है और “आर्डिनरी फाउल्स” तब होता है यदि एक खिलाड़ी 20 सेकंड से ज़्यादा अपनी टीम के गोल के बाहरी ज़ोन में खड़ा हो, और इस फ़ाऊल के दौरान सामने वाली टीम को पेनल्टी शॉट भी दिया जा सकता है। ऐसे में दोनों ही टीमों को अपनी रणनीति में बदलाव कर इसका वर्जन करना होगा।

अगर बॉल किसी खिलाड़ी के पास नहीं है और वह दूसरी टीम के किसी भी खिलाड़ी के शरीर के संपर्क में आता है तो यह भी एक फ़ाऊल की स्थिति बनती है। इसके अलावा अगर टीम का खिलाड़ी ज़्यादा देर तक पानी के नीचे रहकर खेले या फिर रेफरी की दृष्टि से परे हटकर खेले तो यह भी फ़ाऊल की संभानाएं होती हैं।

रियो डी जनेरियो, ब्राजील - अगस्त 12, 2016: ब्राजील के रियो डी जनेरियो में Maria Lenk Aquatics Centre में रियो 2016 ओलंपिक खेलों के जापान और हंगरी के बीच वाटर पोलो पुरुषों की योग्यता।
रियो डी जनेरियो, ब्राजील - अगस्त 12, 2016: ब्राजील के रियो डी जनेरियो में Maria Lenk Aquatics Centre में रियो 2016 ओलंपिक खेलों के जापान और हंगरी के बीच वाटर पोलो पुरुषों की योग्यता।

टोक्यो 2020 खेलों के लिए आउटलुक

दुनिया भर में खेल बढ़ रहा है

वॉटर पोलो का जन्म इंग्लैंड में हुआ और देखते ही देखते यह खेल पूरे यूरोप में मशहूर हो गया। इसी क्षेत्र की मेंस टीम ने सबसे ज़्यादा ओलंपिक मेडल जीते हैं। 1900 ओलंपिक गेम्स से लेकर अब तक हंगरी ने कुल 9 ओलंपिक मेडल अपने नाम किए हैं, जिनमें 3 गोल्ड सिडनी 2000 और बीजिंग 2008 के बीच आए। Yugoslavia (पहले) जहां वॉटर पोलो खेल बहुत लोकप्रिय था और वह सब ही एक दूसरे से ऊपर रहने की कोशिश में जुटे थे। इन्ही सब जद्दो-जहद के दौरान, क्रोएशिया ने 2012 लंदन गेम्स में गोल्ड जीता और वहीं सर्बिया ने रियो 2016 अपने नाम किया। इतना ही नहीं, इटली ने भी आज तक 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम कर इस खेल में अपना दबदबा बनाया हुआ है।

वूमेंस वॉटर पोलो को पहली बार 2000 सिडनी गेम्स में उतारा गया और ऑस्ट्रेलिया ने इस संस्करण में गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। इसके बाद यूएसए जोकि ओलंपिक गेम्स में खुद को बढ़ाने की कोशिश में लगी थी, उस राज्य ने लगातार दो बार गोल्ड मेडल अपने नाम किए। यूएसए ने पहली बार 2012 लंदन गेम्स में बाज़ी मारी और उसके अगले ही संस्करण में (रियो 2016) फिर एक बार खुद को विजयी साबित किया। नीदरलैंड भी कहां पीछे रहने वाली थी, उन्होंने भी उम्दा प्रदर्शन करते हुए बीजिंग 2008 में गोल्ड और इटली ने एथंस 2004 में गोल्ड मेडल जीता।

वॉटर पोलो की बढ़त को देखते हुए जापान जोकि खेल के दौरान अपनी चतुर रणनीतियों के लिए जानी जाती है वह भी इसमें भाग लेने के लिए उत्साहित हैं। International Swimming Federation World League द्वारा कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि बाकी देश भी इस रोमांचक खेल का हिस्सा बन सकें। इन बदलावों को खेल की बढ़ौतरी भी कहा जा सकता है ताकि बाकी देशों को वह सब मिल सके जिस वजह से वे इंटरनेशनल स्तर पर अपना दमख़म दिखा सके।

खेल की गति को न रोकते हुए, नए नियमों में खेल के क्षेत्र को छोटा किया जा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वॉटर पोलो जैसे खेल को बचे हुए राज्य किस तरह अपनाते हैं और उससे भी ज़्यादा दिलचस्प यह देखना होगा कि वह किस रणनीति के साथ उतरते हैं।

सामान्य ज्ञान

डाटा उपलब्ध नहीं