ताइक्वांडो

Photo by Dean Mouhtaropoulos/Getty Images
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ताइक्वांडो एक कॉम्बेट स्पोर्ट है, जिसका अर्थ है ''लात मरना और मुक्का मरना का खेल''

अवलोकन

लगभग 2000 सालों तक, कोरियाई पेनिनसुला पर कई मार्शल आर्ट का अभ्यास किया गया था। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ताइक्वांडो कोरिया में मार्शल आर्ट प्रचलित हो गया। इसके बाद ताइक्वांडो को कोरिया की राष्ट्रीय मार्शल आर्ट के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए काम किया गया।

ताइक्वांडो को 1988 Seoul के ओलंपिक खेलों में पहली बार कार्यक्रम के रूप में प्रदर्शित किया गया था । 1992 बार्सिलोना के खेलों में इस एक बार फिर से प्रदर्शनी के तौर पर दिखाया गया। अटलांटा 1996 में कोई प्रदर्शन खेल नहीं थे, लेकिन सिडनी 2000 में ताइक्वांडो एक पूर्ण पदक खेल के रूप में फिर से प्रकट हुआ और Athens 2004, Beijing 2008, London 2012, Rio 2016, Tokyo 2020 और Paris 2024 में अपनी पूर्ण पदक खेल की स्थिति कायम कर ली।

आज तायक्वोंडो को 200 से अधिक देशों में अनुमानित 80 मिलियन लोगों द्वारा अभ्यास किया जाता है, जो पांच महाद्वीपीय यूनियन (अफ्रीका, एशिया, यूरोप, पैन अमेरिका और ओशिनिया) द्वारा प्रशासित हैं, जो इसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक बनाता है।

वन मिनट, वन स्पोर्ट | ताइक्वांडो
01:19

कार्यक्रम

  • पुरुष -58 किग्रा 
  • पुरुष -68 किग्रा 
  • पुरुष -80 किग्रा 
  • पुरुष + 80 किग्रा 
  • महिला -49 किग्रा 
  • महिला -57 किग्रा 
  • महिला -67 किग्रा 
  • महिला + 67 किग्रा

खेल का सार

पूर्ण संपर्क - सफलता की कुंजी

ताइक्वांडो में एथलीट अपने प्रतिद्वंदी को लात और मुक्का मारते हैं, जबकि लात और मुक्का लगने से बचना भी होता है। सबसे चुनौतिपुर्ण तकनीक के आधार पर अंक दिए जाते हैं- जैसे कि सिर पर लात मारना, मुक्का से धड़ पर मारकर अंक अर्जित करना। इस खेल में भी रणनीति महत्वपर्ण भूमिका निभाती है, जब विरोधी गिर जाता है या मैट से बाहर चला जाता है तो उस एथलीट को पेनल्टी दी जाती है जिसके विरुद्ध खिलाड़ी गिरा होता है या मैट से बाहर होता है। 

ये मुकाबला एक मैटेड ऑक्टागोनल फील्ड पर खेला जाता है, जो फुटवर्क और चपल खेल के लिए प्रोत्साहित करता है। मैचों में दो मिनट के तीन राउंड होते हैं, जिसमें प्रत्येक राउंड के बीच एक मिनट का ब्रेक होता है। 

ताइक्वांडो के प्रोटेक्टर और स्कोरिंग सिस्टम या PSS, को पहली बार लंदन 2012 ओलंपिक प्रतियोगिता के लिए अपनाया गया था।

PSS इलेक्ट्रॉनिक इम्पेक्ट सेंसर का सिस्टम है जो तायक्वोंडो एथलीट के सुरक्षात्मक गियर को निर्मित करता है – सोक, ट्रंक प्रोटेक्टर और द हेड प्रोटेक्टर – बिना तार की सहायता से इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड से जुड़ा होता है। जब प्रभाव प्रतिद्वंद्वी के सिर या धड़ को पैर के सही हिस्सों के साथ बनाया जाता है, तो अंक स्वचालित रूप से स्कोरबोर्ड पर फ्लैश होते हैं।

हालांकि, ३ कॉर्नर जजेस, हाथ में पकड़ने वाला स्कोरिंग उपकरणों का उपयोग करते हैं, क्योंकि ट्रंक पर मुक्केबाज़ और लात करने या सर पर लात मरने के लिए अतरिक्त तकनीकी अंक जोड़े जाते हैं जो इन जजेस को ही तय करना होता है और अंक देना होता है ।

टोक्यो 2020 खेलों के लिए आउटलुक

दुनियाभर में बढ़ रही है इस खेल की लोकप्रियता

इस खेल पर कोरियाई लोगों का विशेष रूप से वर्चस्व कायम था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। लंदन 2012 खेलों में आठ अलग-अलग देशों के एथलीटों ने स्वर्ण पदक जीता था, वहां केवल एक स्वर्ण पदक कोरिया की झोली में गया था। ताइक्वांडो अब सबसे अधिक देशों में पदक बांटने वाला खेल बन गया है। रियो 2016 में Jordan और Cote d'Ivoire ने पहली बार ओलंपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किए और ईरान को महिला स्पर्धा में पहला गोल्ड मेडल मिला। 

इस खेल में आज तक किसी भी पुरुष एथलीट ने लगातार दो ओलंपिक खेलों में स्वर्ण नहीं जीता है। महिलाओं की इवेंट में कुछ एथलीटों ने इस खेल पर प्रभुत्व जामाया हुआ है। चीन के Wu Jingyu ने बीजिंग 2008 और लंदन 2012 दोनों में -49 kg वर्ग में स्वर्ण जीता, जबकि -57kg स्पर्धा में, ग्रेट ब्रिटेन के Jade Jones ने लंदन 2012 और रियो 2016 में स्वर्ण पदक जीता। जोंस ने कहा है कि वो टोक्यो 2020 में लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण जीतकर इस खेल की लिजेंड बनना चाहती हैं।  

ओलंपिक खेलों में पहली बार, सभी मैचों को कवर करने के लिए तायक्वांडो कोर्ट में एक 4D कैमरा स्थापित किया जाएगा। ये सिस्टम एक्शन को 360-डिग्री पर स्कैन करता है। जिससे दर्शकों को एथलीटों के शानदार कलाबाजी के हर कोण को देखने में मदद मिलती है। उच्च तकनीक सामग्री का उपयोग करके एक नई प्रतियोगिता पेश की जाएगी।

सामान्य ज्ञान