Norman Pritchard: भारत के पहले ओलिंपिक पदक विजेता 

भारतीय एथलीट, Norman Pritchard ने 1900 ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स में पदक जीता था। (इमेज क्रेडिट - गेटी)
भारतीय एथलीट, Norman Pritchard ने 1900 ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स में पदक जीता था। (इमेज क्रेडिट - गेटी)

भारत के ओलिंपिक इतिहास में व्यक्तिगत पदक जीतने वालों की सूची में कई महान खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी कहानी खेल प्रेमियों को आज भी याद हैं। टोक्यो 2020 हर सप्ताह आपको बताएगा भारत के व्यक्तिगत पदक विजेताओं की कहानी और इस सूची में पहला नाम है Norman Pritchard, जिन्होंने 1900 पेरिस ओलिंपिक खेलों शानदार प्रदर्शन दिखाया। 

पहले की कहानी

खेल के इतिहासकारों के लिए, Norman Pritchard का नाम बहुत ही ज़्यादा रूचि प्रकट करता है क्योंकि बहुत समय तक उन्हें भारतीय होने की मान्यता नहीं मिली।

Pritchard का जन्म अंग्रेज़ों के राज में भारत के शहर कलकत्ता में 1895 में हुआ था, और बहुत कम आयु से ही उन्हें खेल में रूचि थी। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में कई खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया और वह फुटबॉल के एक कुशल खिलाड़ी थे।

Pritchard के माता पिता अंग्रेज़ थे लेकिन उनके शुरुआती जीवन का बहुत समय भारत में बीता और अपने युवा खेल जीवन में उन्होंने कलकत्ता में कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और जीते।

कई खेलों में रूचि होने के बाद भी, Pritchard को दौड़ना ज़्यादा पसंद था। इसका सीधा परिणाम इस बात से देखा जा सकता है कि उन्होंने बंगाल में कई रिकॉर्ड अपने नाम किये।

कैसे जीते पदक

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि Pritchard इंग्लैंड में अवकाश पर थे जब उन्होंने निर्णय लिया की वह ओलिंपिक खेलों में भाग लेंगे। एक तेज़ धावक होने के कारण उन्होंने 200 मीटर हर्डल, 200 मीटर दौड़ और तीन अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

ओलिंपिक खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में अमरीका का दबदबा था, और Norman Pritchard को पदक जीतने के लिए कड़ी टक्कर मिलने वाली थी।

उनका मुकाबला 200 मी हर्डल में अमरीका के Alvin Kraenzlein और Walter Tewksbury से हुआ।

एक कड़े मुकाबले के बाद, Pritchard ने यह दौड़ 25.9 सेकंड में पूरी करी, और Kraenzlein ने यह दौड़ 0.5 सेकंड कम में समाप्त कर स्वर्ण जीत लिया।

Pritchard की शानदार दौड़ के कारण वह एशिया में जन्म लेने वाले पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने ओलिंपिक पदक जीता और इससे उनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ चूका था।

एक पदक जीतने के बाद उन्होंने 200 मी दौड़ में भाग लिया और एक बार फिर उनके सामने अमरीका के Tewksbury थे।

अमरीका के Tewksbury स्वर्ण जीतने के प्रबल दावेदार थे, और उन्होंने दौड़ को 22.2 सेकंड में पूरी कर जीत अपने नाम करी लेकिन रजत के लिए मुकाबला बहुत कड़ा था। Pritchard का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के Stanley Rowley के साथ था, और अंत में उन्होंने 0.1 सेकंड के समय से रजत पदक अपने नाम कर लिया।

आगे की कहानी

Norman Pritchard ने भारत के खेल इतिहास में जो कर दिखाया वह आज तक किसी और खिलाड़ी ने नहीं किया।

इसके साथ ही Pritchard के दो रजत पदक के बाद भारत के किसी भी खिलाड़ी ने एथलेटिक्स में ओलिंपिक सफलता हासिल नहीं करि है।

ओलिंपिक खेलों में दो पदक जीतने के बाद, Norman Pritchard कुछ समय के लिए भारतीय फुटबॉल संघ के लिए काम किया लेकिन वर्ष 1905 में इंग्लैंड बसने चले गए। खेल संसार में अपना नाम करने के बाद Pritchard अदाकारी कि ओर रुख किया और हॉलीवुड में कई फिल्मों में काम किया।

भारत के खेल इतिहास में कई महान खिलाड़ी रहे हैं लेकिन जो Pritchard ने कर के दिखाया वह आज तक दोबारा नहीं हुआ।