NAKAMURA Chiharu: राष्ट्रीय रग्बी सेवेंस कप्तान और एक टीम मैनेजर

ओलिंपिक खेलों की चमक से कहीं दूर होता है कुछ खिलाड़ियों का आम जीवन और उनकी दैनिक कार्यशैली। टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के लिए तैयारी कर रहे बहुत सारे खिलाड़ी अपना जीवन व्यतीत करने के लिए अलग तरह के काम करते हैं। इस सप्ताह हम आपको जापान की रग्बी सेवेंस कप्तान NAKAMURA Chiharu और उनके जीवन के बारे में बताएँगे।

ओलिंपिक जगत में कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो खेल के अलावा भी एक जीवन की रचना करते हैं और उनमे से एक हैं जापान की राष्ट्रीय रग्बी सेवेंस की कप्तान NAKAMURA Chiharu जो एक अन्य टीम की मैनेजर भी हैं। इतना ही नहीं, NAKAMURA ने फुकोका क्षेत्र स्थित इस टीम की स्थापना भी करि है और वह उनके लिए खेलती भी हैं।

खेल के लिए योगदान देने का लक्ष्य

रग्बी खिलाड़ी और मैनेजर जैसे दो कठिन कार्य एक साथ करना किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी चुनौती होती है। NAKAMURA एक मैनेजर होते हुए टीम के अभ्यास सत्र से लेकर नए खिलाड़ियों को सम्मिलित करने तक सारे कार्य करती हैं और यह सरल नहीं है।

एक मैनेजर होना शुरू से NAKAMURA का सपना नहीं था लेकिन एक रग्बी खिलाड़ी बनने के बाद वह खेल से जुड़ी रहना चाहती थी और उसकी प्रगति के लिए अपना योगदान देना चाहती थी।

कुछ समय कोच बनने की पढ़ाई करने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि वह एक ज़्यादा अच्छी प्रबंधक हैं और उन्होंने एक नयी टीम की स्थापना करी। महिलाओं की रग्बी व्यवस्था को आगे बढ़ाना NAKAMURA का मुख्य उद्देश्य था और वह जानती थी कि खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाना बहुत ज़रूरी है।

इस बारे में बात करते हुए, NAKAMURA कहती हैं, "फुकोका में बहुत लड़कियां रग्बी खेलती हैं लेकिन वहां कोई क्लब टीम नहीं थी और अगर उन्हें अपना करियर इस खेल में बनाना था तो एक व्यवस्था का होना अनिवार्य था। टीम न होने के कारण खिलाड़ियों को काँटो क्षेत्र जाना पड़ता इसलिए मुझे लगा कि अगर क्यूशू में ही एक टीम हो तो बेहतर होगा।"

ओलिंपिक खेलों पर नज़र

रग्बी टीम की स्थापना करे हुए NAKAMURA को एक वर्ष से ज़्यादा हो गया है और उनका इतना काम बचा है कि पिछला साल उन्हें एक दशक के जैसा लगता है। उन्होंने इस टीम की स्थापना ओलिंपिक खेल शुरू होने के पहले करि और इसके पीछे एक खास कारण है।

NAKAMURA कहती हैं, "अगर आपको महिलाओं की रग्बी के लिए कुछ करना है तो ओलिंपिक खेलों में भाग लेना और अच्छे परिणाम लाना बहुत मददगार साबित होता है लेकिन मैं इसके साथ ही चाहती थी कि क्यूशू में एक टीम हो जो खेल को उस क्षेत्र में खेल को अधिक लोकप्रिय बना दे। यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी और मैंने इसे स्वीकार किया।"

कुमागया शहर में स्थित एक क्लब की खिलाड़ी होने कि वजह से उन्हें फुकोका से वहां यात्रा करनी पड़ती है और अपने क्लब का ध्यान रखना पड़ता है।

एक आदर्श खिलाड़ी

अगर आप NAKAMURA से पूछें तो कोई भी व्यवसाय हो, अपने लक्ष्य को निर्धारित करना और उसके बारे में बात करते रहना बहुत ज़रूरी होता है। उनके क्लब का मूल सिद्धांत खेल की सहायता से पूरे समाज का कल्याण और एकता को बढ़ावा देना है।

एक मैनेजर के नाते वह इस बात का भी प्रयास करती हैं की अपनी टीम के खिलाड़ियों को रग्बी में कामयाब होने के साथ ही सन्यास के बाद के जीवन कि भी योजना बनाना सिखाती हैं।

 NAKAMURA कहती हैं, "जापान की सबसे सफल टीम बनना हमारा लक्ष्य है लेकिन कोरोना महामारी से उत्पन्न हुई चुनौती ने मुझे सिखाया है कि हमारा कर्त्तव्य खेल से ज़्यादा होता है और सफलता से अधिक मैं खिलाड़ियों के सुख पर ध्यान देती हूँ। प्रतियोगिताओं के परिणाम जो भी हो, मैं चाहती हूँ की मेरी टीम के सदस्य जापान के सबसे खुश लोगों में से हों।"

एक मैनेजर के किरदार में वह खेल और जीवन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास हर रोज़ कर रही हैं।

स्पष्ट लक्ष्य और उद्देश्य

जीवन में किसी भी सपने को देखना बहुत आसान होता है लेकिन वास्तविकता का सामना करना भी बहुत ज़रूरी होता है और NAKAMURA रोज़ाना अनेकों चुनौतियों से लड़ती हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में उनका स्पष्ट उद्देश्य और दृष्टिकोण बहुत काम आता है चाहे वह खिलाड़ी का हो या मैनेजर के रूप में हो।

अपने उद्देश्य के बारे में उन्होंने बताया, "जब मैंने 2016 रियो ओलिंपिक खेलों में भाग लिया तो मेरा लक्ष्य स्वर्ण जीतना था लेकिन उसके पीछे कोई उद्देश्य नहीं था और इसकी वजह से मैं विफल रही। उस विफलता के बाद मैं टूट गयी थी और मुझे ऐसा लगा कि मेरा जीवन समाप्त हो गया है।"

परिस्तिथियाँ और विफलताएं एक इंसान को बहुत कुछ सीखा देती हैं और चार साल बाद NAKAMURA का जीवन उद्देश्य बहुत अलग है और उनके पास हर चुनौती के लिए एक योजना तैयार है।

पिछले ओलिंपिक खेलों में जापान की महिला रग्बी टीम का लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था लेकिन एक निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10वां स्थान प्राप्त किया लेकिन इस हार से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है।

इस बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा, "शायद 2016 रियो खेलों के समय तक मैं ओलिंपिक खेलों के सार को नहीं समझ पायी और शायद इसी कारण हमारे परिणाम भी ठीक नहीं थे। उन खेलों के बाद मैं अपने अंदर बदलाव लायी और अच्छे प्रदर्शन के आलावा एक सकारात्मक सोच पर भी ध्यान दिया।"

NAKAMURA का दृढ निश्चय उनकी बहुत सहायता करता है और वह निरंतर प्रयास करती हैं कि हर विफलता या हार के बाद भी आगे बढ़ती रहें। टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में जापान के लिए स्वर्ण जीतना कठिन होगा लेकिन उनकी कप्तान इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि वह परिणाम से निरपेक्ष एक सकारात्मक सोच रखें।