Michael Parris: 1980 खेलों में गयाना के इकलौते पदक विजेता

मास्को 1980 ओलंपिक खेल, उद्घाटन समारोह - प्रतिनिधिमंडल की परेड, गुयाना (GUY)
मास्को 1980 ओलंपिक खेल, उद्घाटन समारोह - प्रतिनिधिमंडल की परेड, गुयाना (GUY)

ओलिंपिक खेलों में पदक जीतना हज़ारों खिलाड़ियों के लिए एक व्यक्तिगत सपना और लक्ष्य होता है, पर दुनिया में 24 देश ऐसे हैं जिनको उस ऐतिहासिक पोडियम पे अपना ध्वज ऊपर उठते हुए देखने का अनुभव केवल एक बार हुआ है। Tokyo2020.org आपको बताएगा ऐसे खिलाड़ियों के जीवन के बारे में जिन्होंने अपने देश का वह सपना पूरा किया। 

पहले की कहानी

गयाना के खेल इतिहास में एक ही खिलाड़ी ने ओलिंपिक पदक जीता है - मुक्केबाज़ Michael Parris.

Parris का जन्म गयाना की राजधानी जॉर्जटाउन में 4 अक्टूबर सन 1957 में हुआ था।

अपने जीवन के बारे में बात करते हुए Michael Parris ने गयाना की कैटूर न्यूज़ को बताया, 'मेरा शुरुआती जीवन बेहद कठिन था और मेरे परिवार ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। हमारे परिवार के पास इतना धन नहीं था पर हम खुश थे।'

मुक्केबाज़ी का रिवाज़ हमेशा से Michael Parris से था और उनके पिता एक मुक्केबाज़ थे। भाई और परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मुक्केबाज़ थे जिसकी वजह से Parris ने भी इस खेल को अपनाया।

'मैं और मेरे भाई हमारे मित्रों के साथ मुक्केबाज़ी का अभ्यास करते थे और हमारी कुशलता देख गाँव के एक बुज़ुर्ग ने हमें जिम में भर्ती होने की सलाह दी।'

'हमने उनकी सलाह मानी और मेरे भाइयों समेत हम सब जिम जाने लग गए और वहीँ से शुरू हुआ मेरा मुक्केबाज़ी का करियर।'

सन 1972, 15-वर्षीय Parris ने फेदरवेट वर्ग में जूनियर चैंपियनशिप जीत अपनी कुशलता का परिचय दिया।

वहीँ से Parris ने विभिन्न बॉक्सिंग प्रतोयोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया, कुछ में हार का सामना करना पड़ा कुछ में जीत का। उनकी प्रतिभा देख के बॉक्सिंग की चयन समिति ने उन्हें एक प्रतियोगिता में गयाना का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना।

साल 1978 में हुए कामनवेल्थ खेलों में Parris ने 21 साल की उम्र में भाग लिया लेकिन वह क्वार्टर फाइनल में हार गए। उन्होंने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय पदक डोमिनिकन रिपब्लिक में हुए सीएसी खेलों में जीता। इन सब प्रदर्शनों की वजह से उन्हें ओलिंपिक खेलों में भाग लेने का मौका मिला।

कैसे बना इतिहास

Parris ने 23 की उम्र में 1980 मास्को ओलिंपिक खेलों में भाग लिया और उसी साल अमरीका ने सोवियत संघ का विरोध करने के लिए खेलों का बहिष्कार किया। हालांकि 65 देशों ने इन् खेलों में भाग न लेने का निर्णय लिया, 80 देशों के खिलाड़ियों ने ओलिंपिक खेलों का हिस्सा बने और उनमे से गयाना भी था।

'मॉस्को का वातावरण मेरे लिए बहुत चुनौतीपूर्ण था लेकिन मैंने ओलिंपिक पदक जीतने का मन बना लिया था जिसकी वजह से मैंने अपने खेल पर असर नहीं पड़ने दिया।'

Parris ने मॉस्को खेलों में बैंटमवेट के 54 किग्रा वर्ग में भाग लिया और पहले दो मुकाबले जीतने के बाद उन्होंने क्वार्टर-फाइनल में अपनी जगह बना ली। उनका सामना क्वार्टर-फाइनल में मेक्सिको के Daniel Zaragoza से हुआ पर Parris ने फिर जीत हासिल कर ली। Parris का विजय रथ सेमि फाइनल में थम गया और उन्हें क्यूबा के Juan Hernandez ने हरा दिया।

सेमि फाइनल में हार के बावजूद, Parris को कांस्य पदक मिला और वह गयाना के इतिहास में इकलौता ओलिंपिक पदक है।

'उस पोडियम पर खड़े होने की जो भावना थी वह शब्दों में कह पाना असंभव है और यह मेरे लिए एक बहुत महान सफलता थी। अपने देश के लिए ओलिंपिक पदक जीतने वाला मैं पहला खिलाड़ी बना और मुझे इस बात पर बहुत गर्व हुआ।'

ओलंपिक के बाद जीवन

टेलीविज़न का प्रचलन गयाना में नहीं था और इस वजह से Michael Parris की ऐतिहासिक पदक जीत उनके देश के ज़्यादा लोग नहीं देख पाए। लेकिन जब वह गयाना वापिस लौटे तो एक बहुत ही शानदार स्वागत समारोह आयोजित किया गया, और एक गाड़ी में उन्होंने जॉर्जटाउन का दौरा किया। Parris को गयाना की सर्कार ने इस अद्भुत जीत के लिए एक घर भी प्रस्तुत किया।

उस पदक जीत के बाद, Parris एक प्रोफेशनल मुक्केबाज़ बन गए और 1972 से 1982 के बीच उन्होंने 48 मुकाबलों में हिस्सा लिया। उसके बाद 1982 से 1995 के बीच Parris ने 29 और मुकाबले लड़े जिसमे से 17 जीत मिली, 10 हार और 2 ड्रा शामिल थे।

'मैं 1984 ओलिंपिक खेलों की तैयारी कर रहा था लेकिन मुझे बताया गया की मेरी उम्र ज़्यादा है। उन्होंने आखिर में एक युवा मुक्केबाज़ का चयन किया और वह 1984 में हार गया।'

Parris की उम्र अब 62 साल है और वह अपने देश गयाना में टैक्सी चलाते हैं। 2018 में गयाना के बॉक्सिंग प्राधिकरण ने अंडर-16 प्रतियोगिता का नाम 'पेप्सी मायिक Parris' उनके सम्मान में घोषित किया। विश्व ओलिंपिक संघ ने 2019 में गयाना का इकलौता पदक जीतने की उपलब्धि के लिए उन्हें मॉस्को में सम्मानित किया।

 एक बेहद उतार चढ़ाव भरे जीवन और चुनौतियों को लगातार परास्त करने वाले Michael Parris को लगता है की उन्हें इकलौता पदक जीतने का सम्पूर्ण सम्मान नहीं मिला लेकिन वह अभी भी आशा करते हैं की उस ऐतिहासिक जीत के लिए गयाना की सर्कार सही तरह से सम्मानित करेगी।