Maarten van der Weijden के संघर्ष और ओलिंपिक स्वर्ण जीत की कहानी

BEIJING - AUGUST 21:  Gold medalist Maarten van der Weijden of the Netherlands poses with his medal after competing in the men's 10 km marathon swimming event held at the National Aquatics Center during Day 13 of the Beijing 2008 Olympic Games on August 21, 2008 in Beijing, China.  (Photo by Cameron Spencer/Getty Images)
BEIJING - AUGUST 21: Gold medalist Maarten van der Weijden of the Netherlands poses with his medal after competing in the men's 10 km marathon swimming event held at the National Aquatics Center during Day 13 of the Beijing 2008 Olympic Games on August 21, 2008 in Beijing, China. (Photo by Cameron Spencer/Getty Images)

ओलिंपिक खेलों का इतिहास चैंपियन खिलाड़ियों, अद्भुत कहानियों और कीर्तिमानों से भरा हुआ है लेकिन हर चार साल में एक बार आयोजित होने वाले प्रतियोगिता में कुछ ऐसे क्षण होते हैं जो सदैव याद किये जाते हैं। हर सप्ताह हम आपको ऐसे ही एक क्षण के बारे में बताते हैं जिसने विश्व भर में खेल प्रेमियों को भावुक कर दिया और इस भाग में हम आपको नीदरलैण्ड के महान तैराक Maarten van der Weijden की कहानी बताएँगे। 

पहले की कहानी

Maarten van der Weijden ने तैराकी को तब चुना जब उन्होंने अपनी बहन को पूल में तैरते हुए देखा। तैराकी शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि वह अपनी बहन से बेहतर तैराक हैं।

नीदरलैण्ड के इस तैराक ने अपने शुरुआती दौर में ही कई ख़िताब जीते जिनमें राष्ट्रिय चैंपियनशिप शामिल हैं। इतना ही नहीं, जब साल 2000 में ओपन जल विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होनोलुलु में हुआ तो पांच किमी और दस किमी प्रतियोगिताओं में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया।

उनका खेल जीवन सही दिशा में जा रहा था लेकिन तभी van der Weijden के साथ एक बहुत बड़ी दुर्घटना घटी।

साल 2001 में van der Weijden को पता चला की उन्हें ल्यूकेमिया है जिसका मतलब था कि उनका करियर समाप्त होने कि कगार पर था। यह उनके लिए एक बहुत बड़ा परिवर्तन था क्योंकि वह चैंपियन के जीवन से सीधा एक ऐसे व्यक्ति बन गए जो अपने जीवन के लिए हॉस्पिटल में संघर्ष कर रहा है।

उस कठिन समय को याद करते हुए, van der Weijden ने बताया, "जब मुझे साल 2001 में ल्यूकेमिया हुआ तो मैंने तैराकी और ओलिंपिक स्वर्ण के बारे में विचार करना बंद कर दिया था। मैं बस अगले दिन के बारे में सोचता रहता था और आशा करता था कि मेरा दर्द थोड़ा कम हो जाये।"

वास्तविकता का सामना करने के लिए तैयार इस तैराक को पता था कि अगर भाग्य ने उनका साथ दिया तो वह पूरी तरह ठीक हो जायेंगे अथवा ल्यूकेमिया उनके प्राण भी ले सकता था।

अंत में उनके साहस, सहनशीलता और संघर्ष के कारण van der Weijden ने बहुत सारे कीमोथेरेपी और एक स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद ल्यूकेमिया को पराजित किया और वह उनके लिए पहला स्वर्ण था।

एक नया जीवन मिलने के बाद van der Weijden ने निर्णय लिया कि वह ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे और उन्हें यह भी पता था कि सफल होने कि क्षमता उनमे है।

BEIJING - AUGUST 21:  (L-R) Silver medalist David Davies of Great Britain, gold medalist Maarten van der Weijden of the Netherlands and bronze medalist Thomas Lurz of Germany stand on the podium after competing in the men's 10 km marathon swimming event held at the National Aquatics Center during Day 13 of the Beijing 2008 Olympic Games on August 21, 2008 in Beijing, China.  (Photo by Cameron Spencer/Getty Images)
BEIJING - AUGUST 21: (L-R) Silver medalist David Davies of Great Britain, gold medalist Maarten van der Weijden of the Netherlands and bronze medalist Thomas Lurz of Germany stand on the podium after competing in the men's 10 km marathon swimming event held at the National Aquatics Center during Day 13 of the Beijing 2008 Olympic Games on August 21, 2008 in Beijing, China. (Photo by Cameron Spencer/Getty Images)
2008 Getty Images

फाइनल मुकाबला

मैराथन तैराकी प्रतियोगिता ओलिंपिक के इतिहास में पहली बार 2008 बीजिंग खेलों में आयोजित हुई और पूरे विश्व के सामने Maarten van der Weijden को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार थे। उनके लम्बे कद के कारण सभी तैराकों में वह अलग नज़र आ रहे थे।

पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका मुकाबला ब्रिटेन के David Davies और जर्मनी के Thomas Lurz से हुआ लेकिन van der Weijden को पूरा विश्वास था कि उन्होंने सफल होने के लिए पूरी मेहनत करि थी। उनके अनुसार वह सबसे तेज़ तैराक नहीं थे लेकिन अगर वह अपनी ऊर्जा का सही प्रयोग करते तो जीत सकते थे।

मैराथन के आखरी 500 मीटर में David Davies रेस में सबसे आगे थे और ऐसा लग रहा था कि वह ही स्वर्ण पदक जीतेंगे लेकिन अचानक van der Weijden ने अद्भुत शक्ति दिखाते हुए पहले स्थान के बहुत करीब पहुँच गए।

Davies और Lurz के बीच आखरी 200 मीटर में मुकाबला चल रहा था और van der Weijden पीछे से आये और बढ़त ले ली। अंत में उन्होंने दोनों को पछाड़ते हुए 1:51:51.6 के समय में रेस समाप्त करि और मैराथन तैराकी में पहला ओलिंपिक स्वर्ण जीतने वाले पहले तैराक बने।

जैसे ही van der Weijden ने रेस को जीता तो कमेंटरी कर रहे नीदरलैण्ड के महान तैराक और तीन ओलिंपिक स्वर्ण जीतने वाले Pieter van den Hoogenband अपनी जगह से उठ कर आये और van der Weijden को बधाई देने के लिए आये। यह क्षण देख कर उस प्रतियोगिता स्थल में प्रस्तुत हर दर्शक बहुत भावुक हो गया।

मेंस 10 किमी स्वीमिंग मैराथन | बीजिंग 2008 | ओलंपिक के ख़ास पल
02:14:31

देखिए ओलंपिक के ख़ास पल में बीजिंग 2008 की सुनहरी यादें जहां मेंस 10 किमी स्वीमिंग मैराथन में नीदरलैंड के कैंसर सर्वाइवर मार्टेन वैन डर ने स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया था। न्यूज़ीलैंड की लिडिया को ने रजत पदक हासिल किया जबकि चीन की शानशन को कांस्य पदक मिला था।

आगे की कहानी

साल 2008 में आयोजित हुए डच तैराक ऑफ़ द ईयर पुरस्कार समारोह में अपने सन्यास की घोषणा और उन्होंने यह भी कहा कि वह तैराकी को अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे चुके थे।

वह प्रतियोगिता में अब भाग नहीं लेते लेकिन van der Weijden अभी भी मैराथन तैराकी करते हैं और कर्क रोग संस्थाओं के लिए योगदान देते हैं।

साल 2017 में उन्होंने कर्क रोग अनुसंधान प्रोजेक्ट के लिए धनराशि इकठ्ठा करने के लिए मार्टिन वैन डर वाईडेन संस्था की स्थापना करी।

नीदरलैण्ड के इस महान तैराक के संघर्ष और जीत कि कहानी आज भी पूरे देश में याद करि जाती है और वह अपने देश के खेल इतिहास में अमर रहेंगे।