Lynda Kiejko: एक ओलिंपिक निशानेबाज़ और इंजीनियर 

कनाडा की Lynda Kiejko 2010 कॉमनवेल्थ खेलों कि 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में हिस्सा लेती हुई। फोटो गेट्टी इमेजेस के Graham Crouch द्वारा।
कनाडा की Lynda Kiejko 2010 कॉमनवेल्थ खेलों कि 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में हिस्सा लेती हुई। फोटो गेट्टी इमेजेस के Graham Crouch द्वारा।

ओलिंपिक खेलों की चमक से कहीं दूर होता है कुछ खिलाड़ियों का आम जीवन और उनकी दैनिक कार्यशैली। टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के लिए तैयारी कर रहे बहुत सारे खिलाड़ी अपना जीवन व्यतीत करने के लिए अलग तरह के काम करते हैं। इस सप्ताह हम आपको कनाडा की निशानेबाज़ Lynda Kiejko के बारे में बताएँगे।

ज़रूरी जानकारी

  • नाम: Lydia Kiejko
  • आयु: 40
  • राष्ट्र: Canada
  • खेल: पिस्टल निशानेबाज़ी

उनका खेल जीवन

Lynda Kiejko एक ओलिंपिक निशानेबाज़ों के परिवार से आती हैं और उनके स्वर्गीय पिता Bill Hare ने टोक्यो 1964, मेक्सिको शहर 1968 और Munich 1972 खेलों में हिस्सा लिया था जबकि उनकी बहन Dorothy Ludwig ने 2012 लंदन ओलंपिक्स में अपनी जगह बनाई थी। 

बहुत ही कम आयु में Lynda Kiejko ने निशानेबाज़ी करना शुरू कर दिया था और उनके पिता ने घर के तलघर में एक पिस्टल रेंज बना दी थी जिसकी वजह से उनकी बेटियां अच्छे से अभ्यास कर पाएं।

Kiejko और उनकी बहन को मिले इस प्रोत्साहन का बहुत फायदा हुआ और उन्होंने विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। नई दिल्ली में आयोजित हुए 2010 कॉमनवेल्थ खेलों में दोनों ने एयर पिस्टल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था।

वर्ष 2015 तक Kiejko व्यक्तिगत प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हो चुकी थी और उन्होंने कोरिया में आयोजित विश्व कप में छठा स्थान प्राप्त किया। अपना अच्छा प्रदर्शन बरक़रार रखते हुए उन्होंने पैन अमरीकी खेलों में अपने ही देश की राजधानी टोरंटो में दो स्वर्ण पदक जीते।

दिल्ली में आयोजित 2010 कॉमनवेल्थ खेलों में 10 मी एयर पिस्टल पेयर्स प्रतियोगिता में कांस्य जीतने के बाद कनाडा की Lynda Kiejko और Dorothy Ludwig ख़ुशी मनाती हुई। फोटो गेट्टी इमेजेस के Graham Crouch द्वारा।
दिल्ली में आयोजित 2010 कॉमनवेल्थ खेलों में 10 मी एयर पिस्टल पेयर्स प्रतियोगिता में कांस्य जीतने के बाद कनाडा की Lynda Kiejko और Dorothy Ludwig ख़ुशी मनाती हुई। फोटो गेट्टी इमेजेस के Graham Crouch द्वारा।
2010 Getty Images

अपने पिता की तरह ओलिंपिक खेलों में भाग लेने का सपना Kiejko ने 2016 में पूरा किया जब उन्होंने रियो खेलों की पिस्टल निशानेबाज़ी प्रतियोगिता में अपनी जगह बनायी।

ओलिंपिक चैनल से बात करते हुए, Kiejko ने कहा, "रियो खेलों की ऊर्जा, वातावरण और वहां उपस्थित सारे लोगों के बीच रहना बहुत ही कमाल का अनुभव था लेकिन मेरा ध्यान हमेशा से प्रतियोगिता पर था और इसलिए मैंने अपने विश्राम का विशेष ध्यान रखा।"

रियो ओलिंपिक खेलों में वह 38वें स्थान पर आयीं लेकिन उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह तैयार नहीं थी।

"मुझे ऐसा लगता है कि ओलिंपिक खेलों के पहले मुझे अपने लक्ष्य को देखने के सम्बन्ध में कुछ तकनिकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और शायद मैंने उस वातावरण में बहुत कम अभ्यास किया था।"

Kiejko के पास अपना ओलिंपिक पदक जीतने का सपना पूरा करने का मौका शायद टोक्यो 2020 खेलों में मिल सकता है।

कनाडा के शूटिंग संघ ने उन्हें राष्ट्र का एकमात्र निशानेबाज़ी ओलिंपिक स्थान दिया है और इसका कारण Kiejko कि कुशलता और पदक जीतने की दावेदारी है।

अपने खेल सफर और सपने के बारे में वह कहती हैं, "किसी भी खिलाड़ी के लिए ओलिंपिक खेलों में भाग लेना बहुत ही बड़ी बात होती है और हर निशानेबाज़ चाहता है कि ओलिंपिक खेलों जैसे बड़े महोत्सव का भाग बनें।"

उनका व्यावसायिक जीवन

निशानेबाज़ होने के साथ Kiejko एक इंजीनियर भी हैं और एक इलेक्ट्रिकल कंपनी के लिए अपने शहर कैलगरी में काम करती हैं। अपने ऑफिस में काम करने के आलावा उन्हें बिजली मीनारों का भी दौरा करना पड़ता है।

अगर आप Kiejko से पूछें तो इंजीनियर बनने का मूल कारण उनका गणित से प्रेम है और उन्हें लगता है कि निशानेबाज़ी से यह काम सीधा जुड़ा हुआ है।

"एक इंजीनियर के सामने जब कोई चुनौती या समस्या आती है तो वह पहले एक सामूहिक दृष्टिकोण से देखता है और बाद में उस बड़ी चीज़ को व्यक्तिगत हिस्सों में तोड़ कर देखता है।"

"निशानेबाज़ी भी काफी समान होती है अगर आप एक सही दृष्टिकोण से देखें तो क्योंकि इस खेल में भी आपको एक बड़ी समस्या को छोटे भागों में बाटने के बाद हल निकालते हैं और फिर उन सभी को सम्मिलित करने के बाद सही परिणाम आता है।"

Kiejko अपना काम करते समय ओलिंपिक लक्ष्य और उनके पिता कि विरासत को आगे बढ़ाने के सपने को कभी नहीं भूलती। अपने पिता की कहानी सुनते हुए वह प्रेरित हुई थी और उनके लिए ओलिंपिक खेलों में कनाडा का प्रतिनिधित्व करना बहुत बड़ी प्रतिष्ठा की बात है।

कैनेडियन प्रेस से बात करते हुए उन्होंने 2016 में कहा था, "मेरे लिए जीवन लक्ष्य और सपना होने से कहीं ज़्यादा बड़ी बात है ओलिंपिक खेल। यह मेरा पारिवारिक मुद्दा है।"

अपने पिता की दी हुई विरासत और ओलिंपिक पदक जीतने के सपने को पूरा करने के लिए Kiejko तैयार हैं और टोक्यो 2020 शायद वह मंच हो जहाँ उनके परिवार को विश्व स्तर पर मान्यता मिले।