जापानी जिम्नास्ट और स्वर्ण पदक पर जापानियों का कब्ज़ा!!

टोक्यो 1964 ओलंपिक खेल, कलात्मक जिमनास्टिक्स, पैरेलल बार्स मेंस - Yukio ENDO (JPN)
टोक्यो 1964 ओलंपिक खेल, कलात्मक जिमनास्टिक्स, पैरेलल बार्स मेंस - Yukio ENDO (JPN)

अक्टूबर 1964 में, टोक्यो ने अपने पहले ओलंपिक खेलों की मेजबानी की थी। उन ऐतिहासिक पलों को याद करते हुए टोक्यो 2020 आपको कुछ सबसे अविश्वसनीय और जिंदादिल इवेंट्स से रूबरू कराएगा, जो आज से 56 साल पहले हुए थे। श्रृंखला के नवीनतम भाग में, हम इस बात पर एक नज़र डालते हैं कि जापान ने अपनी ही मिट्टी पर ओलंपिक इतिहास कैसे लिखा। 

पहले की कहानी

‘जिम्नास्टिक’ जापान के सबसे सफल ओलंपिक खेलों में से एक है, और उन्होंने कुल 98 पदक (31 स्वर्ण, 33 रजत और 34 कांस्य) अर्जित किए हैं।

Nadia Comaneci, Simone Biles, VěraČáslavská और Larisa Latynina, जैसे पसंदीदा खिलाड़ियों के अलावा, एक नाम है जो देश में जिम्नास्टिक का पर्याय है - UCHIMURA Kohei - सात बार लगातार ओलंपिक पदक विजेता।

यह कहा जा सकता है कि जापान में पुरुषों के जिम्नास्टिक के महानायक का जन्म टोक्यो 1964 खेलों में हुआ था, क्योंकि जब वह मैदान में उतरते थे तो उनके इरादे के मुताबिक इवेंट में वही होता था जो वह सोचते थे।

जापान ने रोम 1960 में पुरुषों के जिम्नास्टिक में चार स्वर्ण सहित नौ पदक जीते थे - लेकिन चार साल बाद वे इससे भी आगे एक नया मुकाम हासिल करेंगे।

टोक्यो 1964 ओलंपिक खेल, कलात्मक जिमनास्टिक्स, पैरेलल बार्स मेंस - Yukio ENDO (JPN)
टोक्यो 1964 ओलंपिक खेल, कलात्मक जिमनास्टिक्स, पैरेलल बार्स मेंस - Yukio ENDO (JPN)
© 1964 / Kishimoto/IOC

वह पल…

ENDO Yukio और ONO Takashi ने टोक्यो 1964 में जापानी चुनौती का नेतृत्व किया, और उन्हें सोवियत संघ के Boris Shakhlin और Viktor Lisitsky से सिंगल इवेंट् में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। वास्तव में, Shakhlin चार साल पहले के सिंगल इवेंट में ONO Takashi से बेहतर थे जब उन्होंने स्वर्ण पदक के लिए संघर्ष की शुरुआत की।

रोम में एक सफल आउटिंग के बावजूद, जापान को ऑल-राउंड इवेंट में एक ओलंपिक सिंगल स्वर्ण पदक जीतना बाकी था और ENDO Yukio ने इस स्थिति को चुनौती देने की जिम्मेदारी खुद पर ले ली।

जापान के पुरुष जिम्नास्ट, पूर्व ओलंपियन, UESAKO Tadao के साथ सोवियत संघ का मुकाबला करने के लिए पहले से कहीं अधिक कठिन प्रशिक्षण कर रहे थे, जो टीम के उद्देश्य को उस स्तर तक पहुंचने के लिए तैयार कर रहा था जो स्कोरिंग के मामले में जिम्नास्टिक में सबसे कठिन माना जाता था- ’सी’ ग्रेड से भी ऊपर।

Endo एक शीर्ष-श्रेणी के खिलाड़ी थे। जब टीम इवेंट की बात आती है तो Endo का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने ना केवल रोम में स्वर्ण पदक जीता, बल्कि 1962 की विश्व चैंपियनशिप में सिंगल इवेंट में भी अपनी छाप छोड़नी शुरू की, जहाँ उन्होंने फ़्लोर अभ्यास में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी जीत दर्ज की।

ओलंपिक चैंपियन, Shakhlin और नवोदित खिलाड़ी Lisitsky के खिलाफ व्यक्तिगत ऑल-राउंड इवेंट में, Endo ने स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए शानदार प्रदर्शन किया, जबकि दो सोवियत एथलीटों को रजत के लिए समझौता करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि Endo के ही देश के Shuji Tsurumi के साथ Lisitsky और Shakhlin को दिए गए तीन रजत पदक के साथ कोई कांस्य पदक नहीं दिया गया था।

जापान के लिए सबसे-पहले सिंगल जिम्नास्टिक में स्वर्ण-पदक जीतने के बाद, Endo ने पैरेलल बार्स में भी स्वर्ण पदक हासिल कर जीत दर्ज की, साथ ही टीम को ऑल-राउंड टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने में मदद की।

जापान और सोवियत संघ पुरुषों की जिम्नास्टिक स्पर्धाओं में पहला स्थान पाने के लिए आपसी-लड़ाई में शामिल थे, क्योंकि, मेजबान देश को शीर्ष पर आने के लिए आठ में से पांच स्वर्ण पदक जीतने की जरूरी थी।

जापान ने पुरुषों के जिम्नास्टिक में सोवियत संघ के जीत के इतिहास को तोड़ते हुए टोक्यो में 1964 में HAYATA Takuji और YAMASHITA Haruhiro को व्यक्तिगत स्वर्ण पदक का विजेता घोषित किया।

हालांकि, सोवियत संघ ने महिलाओं की इवेंट्स में अपने प्रदर्शन के आधार पर अंत में अधिक पदक जीते, लेकिन जापान अधिक स्वर्ण और 10 पदक के साथ तालिका में शीर्ष पर रहा। यह वाक़ई एक आश्चर्यजनक उपलब्धि थी।

टोक्यो 1964 में मेंस आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक

आगे क्या हुआ

1964 में टोक्यो में जिम्नास्टिक टीम को उनके प्रदर्शन के लिए सराहा गया और Endo की वापसी एक महानायक के रूप में हुई। उनके शानदार प्रदर्शन का ही नतीजा था कि, दो साल बाद टोक्यो और विश्व चैंपियनशिप में उन्हें मेक्सिको सिटी 1968 खेलों में जापान के लिए ध्वजवाहक होने का सम्मान मिला।

जापानी पुरुष जिमनास्ट ने 1960 के दशक में अपने पूर्वजों द्वारा बनाई विरासत को जारी रखा है और तब से कई बार ओलंपिक में अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं।

सात ओलंपिक पदक और 10 वर्ल्ड चैम्पियनशिप स्वर्ण पदक के साथ, Uchimura Kohei को कई लोगों द्वारा अब तक का सबसे बड़ा पुरुष जिमनास्ट माना जाता है। हालांकि, इस बात का श्रेय 1960 के दशक में जापानी पुरुषों की जिम्नास्टिक टीम द्वारा बनाई गई विरासत को जाता है, विशेष रूप से टोक्यो 1964 में।

और टोक्यो 2020 के साथ, मेजबान राष्ट्र पूरी नई पीढ़ी को खेलों की ओर प्रेरित करने के लिए सभी पड़ावों को पार करने के लिए तैयार हैं।