आलोचना से नहीं पड़ता फ़र्क, लोग प्यार भी बहुत करते हैं- Sushil Kumar 

सुशील कुमार अकेले ऐसे भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने दो व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीते
सुशील कुमार अकेले ऐसे भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने दो व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीते

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान ने उस बात का जवाब दिया, जब लोग उनकी उम्र पर बात करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे वह दबाव से दूर रहते हैं।

नॉर्थ इंडिया में रेसलिंग काफी मशहूर है। सामान्य या कामकाजी लोग भी अखाड़े में जाकर प्रैक्टिस करते हैं और लोकल प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। Sushil Kumar के प्रदर्शन के कारण ही ऐसा संभव हो पाया है।  

यह भारतीय रेसलर भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत खेलों में दो ओलंपिक पदक जीते हैं। इस खिलाड़ी ने साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य तो 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीत अपने देश का नाम रोशन किया। इसके अलावा सुशील ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 3 गोल्ड भी अपने नाम किए।

सुशील कुमार ने साल 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के 74 किलोग्राम कैटेगिरी में आखिरी बार गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद एशियन गेम्स में वह पहले ही दौर में बाहर हो गए थे। वहीं चोट के कारण उन्हें कुछ महीनों रेसलिंग से दूर होना पड़ा फिर उनकी वापसी भी इतनी अच्छी नहीं रही।

एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता Jitender Kumar ने फरवरी में सुशील कुमार को हराकर उनके चौथे ओलंपिक की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है।

इस पर सुशील कुमार ने ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि “वह इस बुरे दौर से अपने अनुभव से बाहर आएंगे”। इस भारतीय स्टार ने कहा कि “जब लोग मेरी उम्र के बारे में बात करते हैं तो मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता क्योंकि लोग मुझे प्यार भी करते हैं और मेरा समर्थन भा करते हैं।”

भारतीय पहलवान ने कहा कि “हां मैं मानता हूं कि मेरी उम्र बढ़ रही है लेकिन मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता लेकिन मैं ये जरूर कहूंगा कि बढती उम्र से आपको अनुभव के साथ आपको बहुत कुछ और भी मिलता है। अब मैं अपने खेल में अनुभव का इस्तेमाल करूंगा।

सुशील कुमार अकेले ऐसे भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने दो व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीते
सुशील कुमार अकेले ऐसे भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने दो व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीते
2012 Getty Images

दबाव से निपटना

कई सारे खिताब और ओलंपिक पदक विजेता ने अपने खेल से नई ऊंचाईयों को हासिल किया है इसलिए अब उनसे हर प्रतियोगिता में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।

सुशील कुमार जिन्होंने 2012 के ओलंपिक में अपने रजत के बाद सात वर्षों में केवल सात स्पर्धाओं में भाग लिया। इस खिलाड़ी ने ओलंपिक में अपने दोनो मेडल 66 किलोग्राम में जीते थे। इसके बाद उन्होंने 74 किलोग्राम वर्ग में खेलने का फैसला किया और फैंस को अभी भी उनसे पदक की उम्मीद है।

इस तरह के दबाव से सुशील कुमार से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। सुशील ने कहा कि “जब आप मेडल जीतते हैं तो लोग आपसे और पदक की उम्मीद करते हैं लेकिन ऐसी उम्मीदों से मेरे ऊपर बिल्कुल दबाव नहीं आता। मैं अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रहा हूं और मुझे विश्वास है कि जल्दी ही सबकुछ ठीक हो जाएगा”।

छोटे लक्ष्यों का निर्धारण

सुशील कुमार अब वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले रूस के कमल मलिकोव (Kamal Malikov) के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रहे हैं। चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन मिलाजुला रहा और इससे उन्होंने दिखा दिया कि अभी उनमें काफी दमखम है।

सुशील कुमार ने खुद के लिए छोटे छोटे लक्ष्य तय कर रखे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह टोक्यो ओलंपिक का हिस्सा बनेंगे। इस महान रेसलर ने कहा कि “सबसे पहले मेरा टारगेट ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने पर है और उसके बाद ही मैं आगे की रणनीति बनाउंगा”। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “ज्यादा सोच कर आप कभी भी अच्छा नहीं कर सकते”।

इसके साथ ही सुशील कुमार ने साफ कर दिया है कि उन्होंने अभी तक संन्यास के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।

ओलंपिक क्वालिफिकेशन का एक और मौका

ओलंपिक के टलने से सुशील को भी निराशा हुई लेकिन सभी एथलीट की तरह वह भविष्य में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जता रहे हैं। सुशील ने कहा कि “ओलंपिक को स्थगित करने का फैसला सही है क्योंकि स्वास्थ्य सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हम सभी देख सकते हैं कि दुनिया का क्या हाल हो रहा है। ओलंपिक की तैयारी काफी लंबे समय पहले से शुरू हो जाती है लेकिन अब ऐसी स्थिति में कोई कुछ नहीं कर सकते”।

अब तक चार भारतीय पहलवानों ने ओलंपिक का कोटा हासिल कर लिया है, जिनमें Vinesh Phogat, Bajrang Punia, Deepak Punia और Ravi Kumar Dahiya शामिल है। सुशील कुमार ने भी इन सब की तारीफ करते हुए कहा कि “जिस तरह से उन्होंने कोटा हासिल किया, वह दिखाता है कि भारत में रेसलिंग किस स्तर पर पहुंच गया है”।

अब सुशील कुमार ने भी दिखा दिया है कि वह भी टोक्यो जाने का माद्दा रखते हैं और अब एक साल का वक्त उनके लिए सोने पर सुहागा जैसा है। अगर ऐसा करने में वह कामयाब रहे तो उनके शानदार करियर का अंत शानदार तरीके से होगा।