मलेश्वरी की जीत ने गीता फ़ोगाट को सामाजिक बंदिशों को तोड़ने के लिए किया प्रेरित

Geeta Phogat

जब सिडनी ओलंपिक में कर्णम मलेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था तो गीता फ़ोगाट और बबिता फ़ोगाट के पिता महावीर फ़ोगाट ने भी अपनी बेटियों को चैंपियन बनाने का इरादा कर लिया था।

गीता फ़ोगाट (Geeta Phogat) एक ऐसी महिला रेसलर हैं जिन्होंने आज की युवा पीढ़ी को एक अलग प्रेरणा दी, लेकिन उन्हें अगर कहीं से प्रेरणा मिली तो वह थीं कर्णम मलेश्वरी (Karnam Malleswari)। ये वह पल था जब 2000 सिडनी में उन्होंने इतिहास रचा था और फिर इसे फ़ोगाट परिवार ने भी अपना सपना बना लिया था।

भिवानी में पली और बढ़ी गीता फ़ोगाट उस समय सिर्फ़ 12 साल की थीं जब कर्णम ने इतिहास रचा था और ओलंपिक में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला बनीं थीं।

हालांकि उस समय गीता को इस जीत की अहमियत का एहसास नहीं था, लेकिन उनके पिता महावीर सिंह फ़ोगाट (Mahavir Singh Phogat) ने कर्णम की इस उपलब्धि को देखने के बाद अपनी बेटियों को भी ऐसा करते हुए देखने का सपना पाल लिया था।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए गीता फ़ोगाट ने कहा, “हालांकि मुझे तब का बहुत ज़्यादा याद नहीं है लेकिन मेरे पिता के लिए वह सच में एक निर्णायक मोड़ था।”

“उनके लिए ये ऐसा था कि हरियाणा से बाहर जाकर (वेटलिफ़्टिंग में करियर बनाने) खेलों में इतना शानदार किया। और उन्होंने वेटलिफ़्टिंग में अपनी उपलब्धि से देश को गौरवान्वित किया। बस उसके बाद से ही उन्होंने ठान लिया था कि मेरी बेटियां भी देश का नाम रोशन करेंगी। आप कह सकते हैं कि कर्णम ने उनमें एक चिंगारी भर दी थी, उसके बाद मेरे पिता को किसी और चीज़ की परवाह ही नहीं थी।

मलेश्वरी की कहानियां इसके बाद महावीर सिंह फ़ोगाट के अभ्यास में आम बात हो गई थी। गीता ने माना कि उन्हें इस बात का सच में एहसास तब हुआ जब पहली बार वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची।

“मुझे लगता है उन्होंने (कर्णम) सिर्फ़ मुझे नहीं बल्कि हमारे समय की सभी महिला एथलीटों को प्रेरित किया। ओलंपिक में पदक जीतना और वह भी एक महिला द्वारा ये कोई मामूली बात नहीं, और ऐसा करके उन्होंने भविष्य के सुपरस्टार्स के लिए दरवाज़ा खोल दिया था।”

गीता फ़ोगाट फ़िलहाल एक मां की ज़िम्मेदारी निभा रही हैं लेकिन टोक्यो 2020 में जगह बनाने पर भी उनकी नज़र टिकी है। गीता ने ये भी कहा कि कर्णम ने जो किया उससे उन्हें और दूसरे एथलीटों के लिए एक रास्ता मिल गया।

ओलंपिक में भले ही गीता फ़ोगाट के नाम अब तक कोई पदक नहीं है लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स के रेसलिंग मे स्वर्ण पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला हैं।

2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने उन्हें मौजूदा दौर में कई उभरते हुए पहलवानों का आदर्श बना दिया। इतना ही नहीं जिस तरह से फ़ोगाट बहनों और महावीर फ़ोगाट ने समाज की बंदिशों को तोड़ा और आगे बढ़े उसने बॉलीवुड को भी उनपर फ़िल्म बनाने के लिए प्रेरित कर दिया।

मशहूर बॉलीवुड फ़िल्म दंगल (Dangal) में आमिर ख़ान (Aamir Khan) ने महावीर सिंह फ़ोगाट का किरदार निभाया था। इस फ़िल्म ने बॉक्स-ऑफ़िस पर ऐतिहासिक क़ामयाबी हासिल की थी।

फ़ोगाट बहनों में सबसे बड़ी गीता फ़ौगाट ने कहा, “अच्छा लगता है जब आपको ये एहसास होता है कि युवा आपको अपना आदर्श मानते हैं।“

“ख़ासतौर से तब और भी ज़्यादा जब बच्चों के माता-पिता आकर बताते हैं कि उनके बच्चे हमारा वीडियो देखते हैं और कहते हैं कि हम भी गीता और बबिता जैसा बनना चाहते हैं। अच्छा लगता है जब आज कल की युवा महिलाएं रेसलिंग जैसे कॉम्बैट स्पोर्ट्स में करियर बनाना चाहती हैं। ये ऐसा है जिसके बारे में आज से कुछ साल पहले हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे।“

_ओलिंपिक चैनल द्वारा। _