ख़ुद में सुधार ही है भारतीय टेनिस स्टार सुमित नागल के आगे बढ़ने का मंत्र

भारत के Sumit Nagal ने 2019 यूएस ओपन के पहले दिन अपने मेन्स सिंगल्स के पहले मैच के दौरान स्विट्जरलैंड के Roger Federer के खिलाफ पहला सेट जीतने के बाद जश्न मनाया। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत के Sumit Nagal ने 2019 यूएस ओपन के पहले दिन अपने मेन्स सिंगल्स के पहले मैच के दौरान स्विट्जरलैंड के Roger Federer के खिलाफ पहला सेट जीतने के बाद जश्न मनाया। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

23 वर्षीय इस टेनिस खिलाड़ी ने लॉकडाउन में भी दिन के नौ घंटे सिर्फ़ अपनी प्रैक्टिस के लिए निर्धारित कर रखे हैं।

जहां एक ओर महामारी की वजह से देश और दुनियाभर में लागू किए लॉकडाउन ने अधिकांश एथलीटों को अपने-अपने घरों को लौटने पर मजबूर कर दिया, वहीं Sumit Nagal के लिए यह खुद में सुधार लाने का एक बेहतरीन मौका बनकर सामने आया।

तेज़ी से उभरता हुआ यह भारतीय टेनिस स्टार कैलिफ़ोर्निया में इंडियन वेल्स के रिवरसाइड काउंटी कम्यूनिटी में BNP परिबास ओपन में प्रतिस्पर्धा करने के लिए गया था, तभी कोरोना वायरस (COVID-19) के फैलने के चलते पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई थी।

ऐसे में 23 वर्षीय नागल ने दिल्ली में अपने परिवार के पास लौटने के बजाय जर्मनी के पाइन में स्थित नेन्सेल टेनिस अकादमी जाने का फैसला किया।

सुमित नागल ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, “मेरे पास पिछले साल प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त समय नहीं था, इसलिए मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं अच्छी ट्रेनिंग कर रहा हूं और सच कहूं तो मुझमें बहुत सुधार हुआ है। साथ ही मैं सही चीजों पर काम कर रहा हूं।”

अपने ट्रेनिंग शेड्यूल को निर्धारित करने वाले अपने कोचिंग स्टाफ के अलावा सुमित नागल की अकादमी के पास अपना फिटनेस सेंटर और टेनिस कोर्ट भी है, जो उन्हें खुद को बेहतर रखने में मदद करता है।

फिलहाल उन्होंने अपने ट्रेनिंग सेंटर को अपना दूसरा घर बना लिया है।

सुमित नागल ने अपनी फिटनेस ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, "मेरे दिन के लगभग पांच से छह घंटे टेनिस खेलने और फिटनेस सेशन में चले जाते हैं। दो-ढाई घंटे का ब्रेक रहता है। ऐसे में यह करीब आठ-नौ घंटे का सेशन हो जाता है।”

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Some warm up reps!

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लॉकडाउन ने धीमी की सुमित नागल की गति

देश की इस नई टेनिस सनसनी ने एक प्रभावशाली 2019 सीज़न के बाद 2020 सीज़न की शुरुआत की। दिग्गज Roger Federer के खिलाफ जीते गए एक सेट ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। इसके साथ ही अर्जेंटीना के Facundo Bagnis को पछाड़कर जीते गए ब्यूनस आयर्स चैलेंजर ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं।

लेकिन एटीपी रैंकिंग में आगे बढ़ने में उनकी सिर्फ इन्हीं मुकाबलों का योगदान नहीं रहा था।

सुमित नागल ने 2019 में अप्रैल से जून तक चैलेंजर सर्किट के आठ टूर्नामेंट खेले, जहां वह पांच बार सेमीफाइनल और एक बार क्वार्टर-फाइनल में पहुंचे। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें 170 अंक हासिल करने में मदद की।

इसी के चलते जनवरी में वर्ल्ड नं. 361 के तौर पर अपनी शुरुआत करने वाले इस एथलीट ने अपने टेनिस सत्र को नवंबर में वर्ल्ड न. 127 के तौर पर समाप्त किया। Prajnesh Gunneswaran के बाद वह भारत में सबसे अधिक रैंक वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए।

इसलिए, इस ब्रेक ने उनके आगे बढ़ने की गति को काफी बाधित किया, जिसका वह शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर पूरा आनन्द ले रहे थे। 

सुमित नागल ने लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा, "हां, यह टेनिस खिलाड़ियों के लिए सही नहीं रहा, क्योंकि ऐसा लगभग कभी नहीं हुआ है। आप हमेशा यात्रा करते हैं और खेलते हैं। यह निश्चित रूप से कठिन है, केवल मेरे लिए ही नहीं बल्कि सभी के लिए। लेकिन मुझे लगता है कि कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें आप नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। मेरे हाथ में कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि मैं इस तरह की चीजें करने की कोशिश करता हूं, जो मुझे बेहतर बनाएं।"

चोटों से दूरी बनाना है सबसे बड़ा लक्ष्य

हरियाणा में जन्मे इस एथलीट ने पहली बार खुद को 2017 में साबित किया, जब उन्होंने बैंगलुरु में अपना पहला चैलेंजर जीतने के लिए भारत के एक क्ले कोर्ट पर ब्रिटन जे क्लार्क (Briton Jay Clarke) से बेहतर प्रदर्शन किया।

लेकिन जब Mahesh Bhupati के ‘मिशन 2018’ की पहल के इस नतीज़े ने अपने प्रदर्शन में और अधिक सुधार लाने के संकेत दिए तो उसी समय 20 वर्षीय सुमित नागल को कुछ बड़ी चोटों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, “अगर आप 2014 से 2018 तक का समय देखें तो यह मेरे लिए काफी मुश्किल वर्ष रहे। मैं खेल रहा था और चोटिल हो रहा था। इसलिए, मैंने उन चार-पांच वर्षों में बहुत समय बर्बाद कर दिया।”

2017 में उनके कंधे में एक टॉर्न लैब्रम हुआ, जिसने उन्हें अगले साल भी परेशान करना जारी रखा। इसकी वजह से ही सुमित नागल को 18 बार पहले राउंड से ही बाहर होते हुए देखा गया।

इसलिए Rohan Bopanna और Somdev Devvarman के बाद चैलेंजर खिताब जीतने वाले और रोजर फेडरर का सामना करने वाले मात्र तीसरे भारतीय बनने के बावजूद 2019 में सुमित नागल के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य चोटों से दूर रहना है।

सुमित नागल ने कहा, “मेरा मुख्य लक्ष्य आने वाले वर्षों में चोटों से खुद को दूर रखना और अपने खेल में सुधार करना है।"

वह अपने इस लक्ष्य को बाकी सभी चीजों से ऊपर रखने का इरादा रख रहे हैं।

ओलंपिक चैनल द्वारा!