मदर्स डे स्पेशल: सानिया मिर्ज़ा के लिए मां बनने के बाद होबार्ट इंटरनेशनल जीतना ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि

Sania Mirza (Steve Bell/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
Sania Mirza (Steve Bell/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी के ज़ेहन में अपने प्रदर्शन को लेकर काफ़ी संदेह था लेकिन उन्हें जीत या हार से मतलब भी नहीं था

Sania Mirza ने जब होबार्ट इंटरनेशनल की ट्रॉफ़ी पर इस साल की शुरुआत में कब्ज़ा किया तो ये उनके लिए करियर में जीते 6 ग्रैंड स्लैम से भी बढ़कर था।

ऐसा इसलिए क्योंकि ये दिग्गज भारतीय टेनिस स्टार दो साल के बाद कोर्ट पर वापसी कर रहीं थीं।

साल 2018 और 2019 में सानिया पूरी तरह से प्रतिस्पर्धी टेनिस से दूर थीं, शुरुआत में उन्हें चोट आई थी और फिर वह गर्भवती हो गईं थीं। लिहाज़ा 33 वर्षीय सानिया मिर्ज़ा के लिए टेनिस कोर्ट पर वापस आना एक दूसरी पारी की तरह है।

अपने हैदराबाद के घर से सानिया मिर्ज़ा ने ओलंपिक चैनल से बातचीत में कहा, ‘’मैंने अपनी ज़िंदगी में कई बड़ी प्रतियोगिताएं जीती हैं, जो दूसरों के लिए सपने से कम नहीं। लेकिन होबार्ट इंटरनेशनल जीतने के बाद जो अहसास था वह किसी भी उपलब्धियों से कहीं ज़्यादा था।‘’

‘’क्योंकि मैं जानती थी कि मैंने इसे किस तरह हासिल किया है, मैंने इसे अपने लिए जीता, अपने बेटे के लिए जीता और ये मैंने उस लड़ाई के बाद जीता है जिससे मैं गुज़र कर आई थी। ये सिर्फ़ एक जीत नहीं थी जो आपकी प्रतिभा से मिली हो, ये एक बच्चे का ख़्याल रखते हुए मिली जीत थी। इस जीत पर जो मुझे भावनात्मक तौर पर संतुष्टि मिली थी वह पहले कभी नहीं हासिल हुई थी।‘’

सानिया ने यूक्रेन की Nadiia Kichenok के साथ ऑस्ट्रेलिया में खेले गए होबार्ट इंटरनेशनल का महिला डबल्स ख़िताब अपने नाम कर लिया था। मां बनने के बाद सानिया का ये पहला टूर्नामेंट था और WTA डबल्स की 42वीं ख़िताबी जीत।

इस जीत पर सानिया ने कहा, ‘’जब मैं पहली बार कोर्ट पर क़दम रख रही थी तो वह मेरा शायद सबसे कठिन मैच था, क्योंकि दिमाग़ में बहुत सारा संदेह भरा हुआ था, आपको नहीं पता होता है कि आप बड़े स्तर पर कैसा खेल पाएंगी। बहुत कुछ था जो उस वक़्त चल रहा था।‘’

‘’लेकिन इसके बावजूद मैं बहुत ख़ुश थी, मुझे याद है मैं थोड़ा नर्वस भी थी लेकिन साथ ही साथ मुझे अपने ऊपर गर्व भी हो रहा था कि मैं एक बार फिर इस स्तर पर वापस आ चुकी थी। जीत या हार का तो उस समय कोई मायने ही नहीं था।‘’

जब सानिया मिर्ज़ा बनीं एक मां

सानिया मिर्ज़ा के लिए कोर्ट पर वापसी चुनौतियों से भरी हुई थी, ख़ास तौर से तब जब उनका शरीर बदल चुका था। गर्भावस्था के दौरान उनका वज़न 23 किग्रा बढ़ गया था, और वापसी करने के लिए उन्हें सबसे पहले अपना वज़न घटाना था।

सानिया ने उस समय के बारे में कहा, ‘’सबसे मुश्किल समय वह था जब मैं अपने बच्चे को दूध भी पिलाती थी और मुझे ट्रेनिंग भी करनी होती थी। साथ ही साथ सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से गुज़रना पड़ता था और उसी समय अपने बच्चे को देखना होता था, जो भूखा होता था, सोता नहीं था। और मेरी नींद भी इस वजह से कम हो गई थी।‘’

‘’उस वक़्त आपके लिए इन चीज़ों के बीच दिन का एक घंटा अपनी ट्रेनिंग के लिए निकालना आसान नहीं होता, जहां मैं उसके अलावा कुछ और सोच ही नहीं सकती थी। मेरे लिए वह दौर बहुत कठिन था।‘’

लेकिन एक एथलीट होने की वजह से इन चीज़ों का सामना करना सानिया के लिए दूसरों की तुलना में थोड़ा आसान था और यही वजह है कि वह एक बार फिर अपनी पुरानी फ़िटनेस पाने में क़ामयाब रहीं।

पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 सानिया मिर्ज़ा गर्भधारण करने के 32वें सप्ताह तक काम रही थीं, और इज़हान को जन्म देने के 6 हफ़्ते बाद ही वह घर से बाहर निकलने लगीं थीं।

View this post on Instagram

Day 4- Getting into it .. and it was all bout strength training with a bit of cardio since I still needed to drop weight but also needed to be strong for my sport .. it consisted of - 2 km warm up on tread mill followed by a lot of stretches and exercises to loosen my lower back and hips .since my body was adapting to so much exercise after a while needed to make sure I stay injury free .. Bench press - 4 sets of 10 (try and increase weight with every set and decrease reps) Lat pull downs - 4 sets x 12 reps Forward moving jumps 4 sets x 12 reps Glutal kick backs - 4 sets x12 reps Dead lifts - I started with 15 kilos 4 sets Assisted push up - 4 sets of 12 Body weight squats - 4 sets of 20 Ski abs - 4 sets of 24 Burpees - 4 sets of 8 leg press - 4 sets x 6 And finally 20 mins of running cool down on 9 km .. it’s all bout muscle memory , when I started I didn’t think I could do any of it but you’ll be amazed how quickly the muscle, body and mind adapt to exercise 🙃 #mummahustles

A post shared by Sania Mirza (@mirzasaniar) on

सानिया ने सपना देखना नहीं छोड़ा था

क़रीब दो साल तक अभ्यास से दूर रहने के बाद सानिया ने कड़े डाइट प्लान बनाए और गर्भवती होने से पहले वाली फ़िटनेस को पाने के लिए उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग शुरू कर दी थी, और उनके शरीर ने भी उनका अच्छा साथ दिया।

सानिया ने कहा, ‘’एक एथलीट की टोन हो चुकी मांसपेशी जल्द ही वापसी कर लेती है, मुझे लगता है कि एथलीट का शरीर दूसरों की तुलना में तेज़ी से बेहतर हो जाता है।‘’

सानिया मिर्ज़ा ने वापसी के बाद इसे कोर्ट पर भी साबित किया है।

होबार्ट इंटरनेशनल में एक सपने की तरह ख़िताबी जीत के बाद कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से ठप्प हुए खेल आयोजनों से ठीक पहले सानिया ने फ़ेड कप में भारतीय टीम को प्ले-ऑफ़्स तक पहुंचाते हुए एक इतिहास रच दिया।

2016 रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बेहद क़रीब पहुंच चुकी सानिया की नज़र टोक्यो ओलंपिक पर है, उनकी ज़िंदगी का भी सबसे बड़ा सपना ओलंपिक पदक जीतना ही है। सानिया मिर्ज़ा भी मानती हैं कि बेटे को जन्म देने के बाद अब ज़िंदगी को लेकर उनकी सोच भी बदल गई है। सानिया के लिए उनका बेटा इज़हान अब सबसे पहली प्राथमिकता बन गया है।

सानिया मिर्ज़ा ने बातों का सिलसिला ख़त्म करते हुए कहा, ‘’ मुझे बस यही लगता है कि एक दिन जब इज़हान बड़ा होगा, तो वह इसकी अहमियत समझेगा और अपनी मां पर गर्व करेगा।‘’

ओलंपिक चैनल द्वारा!