फॉर्म में लौटने लिए बढ़ी हुई भूख के साथ वापसी करेंगे निशानेबाज़: सुमा शिरूर

भारत की Suma Shirur ने एथेंस 2004 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के दौरान महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल फ़ाइनल के दौरान प्रतिस्पर्धा की। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत की Suma Shirur ने एथेंस 2004 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के दौरान महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल फ़ाइनल के दौरान प्रतिस्पर्धा की। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

भारतीय राइफल टीम की हाई-परफॉर्मेंस कोच को पूरा भरोसा है कि नए साल में प्रतियोगिताओं के फिर से शुरू होने पर भारतीय निशानेबाज़ अच्छा करेंगे।

भारतीय निशानेबाज़ों को साल 2020 में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यही वजह है कि कुछ विश्व स्तरीय निशानेबाज़ों वाले भारत के इस दल से टोक्यो ओलंपिक में बहुत अधिक उम्मीद लगाई जा रही है।

लेकिन कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी ने सभी की फॉर्म को खराब कर दिया, जिसके चलते भारतीय एथलीटों सहित दुनियाभर के खिलाड़ियों को एक बार फिर से सबकुछ शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या भारतीय निशानेबाज़ महामारी की अवधि से पहले की फॉर्म में वापसी कर सकते हैं। इसपर भारतीय राइफल टीम की हाई-परफॉर्मेंस कोच सुमा शिरूर (Suma Shirur) के पास अच्छा करने की उम्मीद का कारण भी मौजूद है।

उन्होंने नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिविर से ओलंपिक चैनल को बताया, “मैं जो इस समय देख रही हूं वह यह है कि निशानेबाज़ मानसिक तौर पर बहुत मजबूत हैं और उनमें बहुत अधिक स्पष्टता है और उनमें बाहर जाकर शूटिंग करने के लिए काफी भूख दिखाई देती है। यह एक सकारात्मक बदलाव है।”

“हां, COVID से पहले हम सभी वहां जाने के लिए तैयार थे और ओलंपिक में छा जाने के लिए भी तैयार थे। हम सभी इसके बारे में तैयार थे। COVID-19 के साथ यह अधिकांश निशानेबाजों के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। लेकिन उनमें से कुछ ने लॉकडाउन के समय का पूरा फायदा उठाया है और अपने खेल पर काम किया है।”

सुमा शिरूर ने जोर देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा करने की भूख टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने में निशानेबाज़ों की काफी मदद कर सकती है।

उन्होंने कहा, "अरे हां, यह सफलता के लिए काफी महत्वपूर्ण चीज़ों में से एक है। आप जितने भूखे होंगे, और सटीक होंगे, उतना ही बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। आप अपनी क्षमता की सबसे ऊंची सीमा तक प्रदर्शन कर सकते हैं।”

“सभी वास्तव में अच्छी मानसिक स्थिति में हैं। वे वहां हैं... जिस समय वे यहां होंगे, वे हर शॉट के लिए प्रतिबद्ध होंगे। वे अपने हाथों में आए हर काम को करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

अब जब टोक्यो ओलंपिक के लिए एक साल से भी कम का समय बचा है तो सुमा शिरूर को उस समय की कमी का एहसास होता है जिसमें वे खुद को पाती हैं।

और आगामी सीज़न के बारे में बहुत अधिक स्पष्टता न होने के चलते प्रतिस्पर्धी शूटिंग एक बड़ा मुद्दा हो सकती है, क्योंकि टीम टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी करेगी। लेकिन राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के भारतीय कोच ने इस समस्या से निपटने के लिए एक योजना बनाई है।

उन्होंने कहा, “हां, अभी भी इस बारे में संदेह है कि आने वाला सीज़न कैसे शुरू होगा और COVID-19 की स्थिति क्या होगी। लेकिन इसके बावजूद हम यह जानते हैं कि ओलंपिक जरूर होंगे।”

“हम उसके लिए तैयार रहना चाहते हैं। हमें यहां प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने के लिए स्मार्ट और नए तरीके अपनाने होंगे। जैसा कि (NRAI) अध्यक्ष ने बताया है कि अगर अन्य प्रतियोगिताएं नहीं होती हैं तो वे शायद अन्य देशों को आमंत्रित (एक इवेंट के लिए) कर सकते हैं।”

ओलिंपिक चैनल द्वारा!