लॉकडाउन के समय संयुक्त परिवार के साथ रहना सौभाग्य से कम नहीं: Anjum Moudgil  

अंजुम मोदगिल का मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने से COVID-19 महामारी से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिल रही है। फोटो: ISSF
अंजुम मोदगिल का मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने से COVID-19 महामारी से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिल रही है। फोटो: ISSF

एक संयुक्त परिवार के साथ रहने वाली भारतीय शूटर काफी ख़ुश हैं कि उन्हें महामारी के दौरान अपने परिवार के साथ रहने के मौका मिला है।

कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रकोप को रोकने का सिर्फ एक ही जरिया है वो है अपने घर में रहना, और अधिकांश लोग यही कर रहे हैं, जिससे स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाया जा सके लेकिन ये किसी की मानसिक स्थिति को प्रभावित भी कर सकता है। लेकिन वो Anjum Moudgil तो बिल्कुल नहीं हैं।

भारतीय शूटर को लगता है कि इस मुद्दे से निपटने का एक तरीका उन्हें मिल गया है – उनके परिवार में एक ही छत के नीचे लगभग 10 लोग रहते हैं।

26 वर्षीय महिला शूटर का कहना है कि वो खुशकिस्मत थीं कि भारत में COVID-19 के प्रकोप के मद्देनज़र नेशनल लॉकडाउन की घोषणा के कुछ ही दिनों पहले अपने घर, चंडीगढ़ वापस आ गई थीं।

हालांकि मोदगिल परिवार को भी लॉकडाउन से निपटने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, अंजुम का कहना है कि संयुक्त परिवार में रहने के बाद से चीजें थोड़ी आसान हो गई हैं।

उन्होंने ओलंपिक चैनल से कहा कि, "आपको पता है एक दिन मैं ऐसे ही बैठकर सोच रही थी कि मैं कितनी भाग्यशाली हूं कि मेरे साथ इतने लोग रह रहे हैं।"

अंजुम मोदगिल का मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने से COVID-19 महामारी से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिल रही है। फोटो: ISSF
अंजुम मोदगिल का मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने से COVID-19 महामारी से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिल रही है। फोटो: ISSF

"मुझे लगता है कि संयुक्त परिवार में रहने के ढेर सारे फायदे हैं। आपके पास हमेशा लोग होते हैं। और सभी लोग अलग-अलग आयु वर्ग के हैं, इसलिए ये भी अच्छा लगता है। मैं अपनी मां से इसी बारे में बात कर रहा थी।’’ 

“उन लोगों के बारे में सोचिए, जो इस लॉकडाउन में अपने घरों में फंस चुके हैं। कुछ अकेले हैं जबकि कुछ लोगों के साथ 2-3 लोग हैं। मैं धन्य हूं कि मेरे पास इतने सारे लोग हैं।”

लगभग 10 लोगों के परिवार में अलग अलग आयु के लोग होने से काफी मजा आता है। अंजुम मोदगिल इस समय का फायदा उठाते हुए उन गतिविधियों में मग्न हैं जिसे करने के लिए या तो उनके पास समय नहीं होता था या उन्हें वो सब करने में शर्म आती थी।

उन्होंने कहा कि “आजकल, मैं बहुत पेंटिंग कर रही हूं। मुझे आमतौर पर ऐसा करने के लिए समय नहीं मिलता है।” उनका इंस्टाग्राम पेज भी इस बात की गवाही देता है।

“फिर मैं अपनी बहन से भी कुछ डांस स्टेप्स सीखने की कोशिश कर रही हूं। ये वो चीज है जिसमें मैंने हमेशा दिलचस्पी ली है, लेकिन मैं बहुत शर्मीली थी। अब जब मैं घर पर हूं, तो मुझे ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती है।’’

सबसे पहले अंजुम मोदगिल ने हासिल किया टोक्यो का टिकट

अंजुम मोदगिल अपने ही देश की Apurvi Chandela के साथ टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करने वाली देश की पहली एथलीट थीं।

इस जोड़ी ने 2018 विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए कोटा सील कर दिया था। जहां अंजुम मोदगिल ने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में रजत पदक जीतकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया, तो वहीं अनुभवी एयर राइफल शूटर अपूर्वी चंदेला ने भी सुनिश्चित किया कि उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल फाइनल में अपने चौथे स्थान के स्थान के साथ कोटा हासिल कर लिया है

उन्होंने कहा, 'हमें कभी भी ये नहीं मान लेना चाहिए कि हम ओलंपिक के लिए टीम में जगह बनाएंगे। अनिश्चितता की एक निश्चित मात्रा है लेकिन आत्मविश्वास भी ज़रूरी है। मुझे विश्वास है कि मैंने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है और मैं ऐसा करना जारी रख सकती हूं।”

“मैं सिर्फ उन चीजों पर ध्यान केंद्रित और काम करने के बारे में सोच सकती हूं जो मेरे बस में है। अगर मैं टीम में जगह बनाने को लेकर चिंता करना शुरू कर दूं, तो मैं अपने रास्ते से भटक सकती हूं, जिससे मेरा खेल और प्रदर्शन प्रभावित होगा।”

3-पोजिशन शूटिंग में मोदगिल को हसिल है महारत

सीनियर वर्ग में पदार्पण करने के कुछ सालों बाद से ही अंजुम मोदगिल 3-पोजिशन शूटिंग में सबसे आगे रही हैं। अनुशासन पर उसकी पकड़ इतनी है कि वह मानती है कि उन्हें इस इवेंट में महारत हासिल है।

शायद यही कारण है कि जब अंजुम मोदगिल ने 10 मीटर एयर राइफल में ओलंपिक कोटा हासिल किया, तो भारतीय खेमे में खुशी की भावना दौड़ पड़ी थी। उन्होंने कहा कि, "ये बहुत विचित्र है कि जब मैंने एयर राइफल में कोटा हासिल किया, तो किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी।"

3-पोजिशन में कोटा जीतने के लिए हर कोई मुझ पर भरोसा कर रहा था। लेकिन इवेंट (वर्ल्ड चैंपियनशिप में) इस तरह से निर्धारित किए गए थे कि एयर राइफल का फ़ाइनल 3P से पहले था, और मैंने इसमें कोटा हासिल किया।”

लेकिन विश्व चैंपियनशिप में अपनी जीत के बाद से भारतीय निशानेबाज़ एयर राइफल में अपने कौशल को निखारने के प्रयास में जुट गई हैं।

"मुझे लगता है कि कोटा के बाद मैंने एयर राइफल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। इससे पहले, मैं एयर राइफल का अभ्यास करती थी क्योंकि इसमें मुझे मज़ा आता था। लेकिन कोटा के बाद, मैंने एयर राइफल गेम पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।”

“जब मैंने अपनी शूटिंग में बदलाव देखा, तो मैंने इसके हर एक तकनीक पर अभ्यास करना शुरू कर दिया है ताकि मैं सुधार कर सकूं।"

अंजुम मोदगिल को उनके इस सफर में मदद करने वाली पूर्व एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता दीपाली देशपांडे (Deepali Deshpande) हैं।

अंजुम मोदगिल एयर राइफल में अपने कौशल को बेहतर बनाने में दीपाली देशपांडे की मदद ले रही हैं। फोटो: ISSF
अंजुम मोदगिल एयर राइफल में अपने कौशल को बेहतर बनाने में दीपाली देशपांडे की मदद ले रही हैं। फोटो: ISSF

यहां तक कि लॉकडाउन के दौरान, उनके कोच ने एक रूटीन तैयार किया है, जिसपर अंजुम मोदगिल को काम करना होता है।

मैं ये नहीं कहती कि दोनों इवेंट बहुत अलग हैं। अंजुम मोदगिल ने दोनों इवेंट में अंतर को समझाते हुए कहा कि जो अलग है वह खेल का मानसिक पहलू है।

“एयर राइफल शूटर की तुलना में एक 3P शूटर मानसिक रूप से अलग तरह से तैयार होता है और मेरे कोच मेरे साथ काम कर रहे हैं। तकनीकी रूप से इसमें ऐसा कुछ नहीं है।"

जहां उनका परिवार महामारी से बचने और ध्यान भटकाने में उनकी मदद कर रह है, वहीं अंजुम मोदगिल, COVID-19 के बाद होने वाले कार्यक्रमों का इंतज़ार कर रही हैं।