सबसे यादगार पल: जब शूटर अभिषेक वर्मा ने जकार्ता में किया कमाल

Abhishek Verma (ISSF फोटोग्राफर द्वारा फोटो)
Abhishek Verma (ISSF फोटोग्राफर द्वारा फोटो)

जकार्ता में हुए 2018 एशियन गेम्स में भारतीय शूटर अभिषेक वर्मा ने न केवल अच्छा खेल दिखाया बल्कि पहला इंटरनेशनल पदक भी अपने नाम किया।

एक एथलीट के जीवन में बहुत से सुनहरे पल आते हैं लेकिन कई बार जीत चाहे छोटी ही क्यों न हो लेकिन ख़ास होती है। भारतीय शूटर अभिषेक वर्मा (Abhishek Verma) ने भी अपने करियर में बहुत सी कामयाबी हासिल की है जिसमें वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Championships) में सिल्वर मेडल की चमक के साथ आईएसएसएफ वर्ल्ड कप (ISSF World Cup) में गोल्ड मेडल का रूतबा भी शामिल है लेकिन इस शूटर के लिए आज भी उनका पहला अंतर्राष्ट्रीय मेडल सबसे ख़ास है। जी हाँ, अभिषेक वर्मा आज भी 2018 एशियन गेम्स (2018 Asian Games) में जीते ब्रॉन्ज़ मेडल को अपने दिल के सबसे करीब मानते हैं।

टोक्यो ओलंपिक गेम्स के कोटा हासिल कर चुके शूटर अभिषेक के लिए यह गेम्स में अपना खेल दिखाने का यह पहला मौका होगा। जकार्ता में हुए एशियाड में स्पर्धा करने के बाद से इस एथलीट को लगता है कि वह सिर्फ शूटिंग रेंज के लिए बने हैं।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए वर्मा ने कहा “वह एक ख़ास अनुभव था क्योंकि मैं पहली बार भारत की ओर से खेल रहा था और उस दरान मैं काफी सारे ओलंपियन के खिलाफ भी स्पर्धा कर रहा था, जिसमें 6 बार ओलंपिक मेडल जीतने वाला साउथ कोरिया का शूटर जिन जोंग-ओह (Jin Jong-oh) भी मौजूद था।"

वर्मा का शूटिंग करियर दूसरों से अलग रहा है। इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद वर्मा ने लॉ में दाखिला लिया और उसके बाद उन्होंने शूटिंग को चुना। शूटिंग के लिए प्यार इस एथलीट को एक्शन फ़िल्में देख कार आया।

शौक के तौर पर हिसार में अभिषेक वर्मा ने शूटिंग शुरू की लेकिन देखते ही देखते इस खेल के प्रति उनकी भावना और मज़बूत होती गई और 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू कर लिया था और तब वह केवल 29 साल के थे।

वर्मा ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा “एशियन गेम्स के 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में मुझे और सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary) को भारत की ओर से चुना गया था। जकार्ता में भी हम एक ही साथ रहे थे। मुझे याद है कि सौरभ इससे पहले कुछ जूनियर स्पर्धाओं का हिस्सा रह चुके है लेकिन वह मेरे लिए पहली ही थी।”

उस समय जब सौरभ ने गोल्ड मेडल जीता था तब वह महज़ 16 साल के थे।

क्वालिफ़ायर्स में किया कमाल

वर्मा के लिए उस स्पर्धा में सबसे पहली मुश्किल क्वालिफाई होने की थी और उन्हें 41 शूटरों में सर्वश्रेष्ठ 8 में आना था और फिर मेडल की जंग शुरू होती।

क्वालिफायर्स 6 राउंड के खेले जाते है और हर खिलाड़ी को 10 शॉट मिलते हैं जिसमें उन्हें 100 में से अंक हासिल करने होते हैं। वर्मा का स्कोर पहले 5 राउंड में 96, 97, 95, 96 और 97 था और ऐसे में उनका नाम टॉप 8 में शामिल नहीं हो रहा था।"

भारतीय शूटर ने आगे अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “पहले 50 शॉट के बाद तक मेरा नाम टॉप 8 में नहीं था और आख़िरी राउंड में मुझे 100 अंक चाहिए थे।”

अपनी बुद्धि को शांत रखते हुए वर्मा ने एक के बाद ए शॉट मारने शुरू किए और एक शॉट उनका सीधे 99 पर जा लगा और उनका कुल स्कोर 580 हो गया जस वजह से उन्होंने अपना नाम टॉप 6 में लिखवा कर खुद को प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई कराया।

“फाइनल राउंड को पार करने के लिए मैंने 2 से 3 मिनट का रेस्ट किया। मैंने अपनी शूटिंग डायरी खोली जिसमें मैं अपनी तरक्की लिखता था और उसी भाव के साथ मैं आगे बढ़ा। मुझे उस राउंड को पार पाने में इससे बहुत मदद मिली।”

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फाइनल में वर्मा का सामना कुछ ओलंपियन से होने जा रहा था जिसमें जापान केटोमोयुकी मात्सुडा (Tomoyuki Matsuda), कज़ाख़िस्तान के व्लादिमीर निकोलाईविच (Vladimir Issachenko) और साउथ कोरिया के ली डाए-म्युंग (Lee Dae-myung) और जिन जोंग-ओह शामिल थे।

जोंग-ओह जिसे सबसे शानदार ओलंपिक शूटरों में से एक माना जाता है उन्होंने भी शानदार प्रदर्शन दिखाया। उन्होंने अभी तक 4 ओलंपिक गोल्ड मेडल अपने नाम किए है जिसमे 50 मीटर एयर पिस्टल और10 मीटर ईसर पिस्टल वर्ग में आया। इतना ही नहीं बल्कि इस शूटर कर पास 10 और 50 मीटर एयर पिस्टल में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है और साथ ही दो सिल्वर मेडल पर भी इन्होंने हक जमाया हुआ है।”

वर्मा ने उस दौरान 219.3 के स्कोर से ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया था और वह भारतीय शूटर सौरभ चौधरी (240.7) से पीछे रहे थे। इसमें टोमोयुकी मात्सुडा का स्कोर 239.7 रहा था और उनके हाथ सिल्वर मेडल आया। वही चीनी वू जियाय (Wu Jiayu) चौथे स्थान पर रहे थे।

वर्मा ने आगे कहा “मेरे खिलाफ एक ओलंपिक चैंपियन स्पर्धा कर रहा था। मुझे पूरे मुकाबले के दौरान फोकस बनाए रखना था और हर शॉट पर अपना 100 प्रतिशत देना था।”

हार जीत में एक शॉट का फासला

अपनी मेहनत के दम पर अभिषेक वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोडियम पर अपनी जगह बनाई और असल मायनों में उन्होंने इस खेल के प्रति अपनी लगन और प्रेम को भी दर्शा दिया।

“पहली प्रतियोगिता होने के बावजूद भी मैंने अच्छा प्रदर्शन किया था। उसी दिन के बाद से मैंने शूटिंग को पेशे के रूप में लेना शुरू कर दिया।”

वर्मा का यह निर्णय उनके काम आया और ऐसे भात को एक और बेहतरीन एथलीट मिला इससे वह ओलपिक गेम्स में भी मेडल जीतने की उम्मीद कर सकते हैं। इसके बाद वर्मा के कदम आगे बढ़ते गए और उन्होंने साउथ कोरिया में हुई 2018 वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और रियो और बीजिंग 2019 आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल पर भी अपने नाम की मुहर लगाई थी।

टोक्यो के लिए भारतीय शूटिंग के सबसे मज़बूत पक्ष में से एक अभिषेक वर्मा पर सबकी नज़रें टिकी हैं ऐसे में उन पर दबाव भी होगा।

अभिषेक वर्मा ने आगे कहा “आने वाले ओलंपिक गेम्स में मुझे बरस सर्वश्रेष्ठ देना है और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।”

ओलिंपिक चैनल द्वारा