रियो ओलंपिक के बाद घर-घर में होने लगी थी PV Sindhu की चर्चा

भारत की PV Sindhu ने रियो खेलों में रजत पदक जीता था। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत की PV Sindhu ने रियो खेलों में रजत पदक जीता था। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

पांच साल पहले एक 21 वर्षीय भारतीय शटलर PV Sindhu ने अपने पदार्पण पर दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी Carolina Marine के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया था। उनके जीवन का वृतांत क्या है, हम आपको हमारी पदक विजेता श्रृंखला के नवीनतम भाग में बताएंगे।

PV Sindhu का उदय - आगामी स्टार

PV Sindhu का जन्म एथलीटों के परिवार में हुआ था।

हैदराबाद में जन्मी और पली-बढ़ी, Pusarla Venkata Sindhu - जिन्हें अब PV Sindhu के नाम से जाना जाता है, वह P. V. Ramana और P. Vijaya की बेटी हैं - दोनों ने ही वॉलीबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वास्तव में, उनके पिता, P. V. Ramana उस वॉलीबॉल टीम का हिस्सा थे जिन्होंने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में भी कांस्य पदक जीता था।

हालांकि उनके माता-पिता पेशेवर वॉलीबॉल खिलाड़ी थे, किंतु Sindhu ने 2001 के ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन, Pullela Gopichand की सफलता से प्रेरित होने के बाद एक खेल के रूप में बैडमिंटन को चुना।

उन्होंने 8 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था और सिकंदराबाद में Mehbooba Ali के मार्गदर्शन में इस खेल की पहली मूल बातें सीखीं। बाद में, वह गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल हो गईं, जो उनके घर से लगभग 56 किलोमीटर दूर थी, और वह वहां नियमित रूप से प्रशिक्षण लिया करती थी।

हालांकि, गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में शामिल होने के बाद, PV Sindhu ने विभिन्न आयु समूहों (अंडर -10, अंडर -13 और अंडर -14) के तहत कई खिताब जीते।

जारी रहा जीत का सिलसिला

Sindhu उम्र के साथ अपने खेल में और बेहतर हो रही थी।

अपनी प्रारंभिक सफलता के बाद, 2012 में एक 16 वर्षीय के रूप में, उन्होंने एशियाई जूनियर चैंपियनशिप जीती, जहां उन्होंने जापानी खिलाड़ी, Nozomi Okuhara को फाइनल में 18-21, 21–17, 22-20 से हराया।

कुछ महीने बाद, उन्होंने चीन मास्टर्स सुपर सीरीज़ टूर्नामेंट के क्वार्टर में 2012 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, Li Xuerui को 21-19, 9–21, 21-16 को हराकर दुनिया को चौंका दिया।

सफलता उनके कदम चूम रही थी; एक साल बाद, उन्होंने अपना पहला ग्रैंड प्री स्वर्ण पदक जीतकर भारत की शान बढ़ाई। Sindhu को सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद 2013 में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में एकल स्पर्धा में भारत की दूसरी पदक विजेता के रूप में भी ताज पहनाया गया, जहां वह अंतिम चैंपियन, Ratchanok Intanon से हार गईं थीं।

उसी वर्ष, PV Sindhu को भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

2014 में, रियो खेलों से दो साल पहले, Sindhu ने क्वार्टरफाइनल में Busanan Ongbamrungphan को हराकर एशियाई चैंपियनशिप में अपना पहला पदक जीता था। उसी वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में, भारतीय शटलर सेमीफाइनल में भी पहुँचीं, जहाँ उन्हें कनाडा की स्वर्ण पदक विजेता, Michelle Li के साथ मुकाबले में हार का मुँह देखना पड़ा।

इतना ही नहीं बल्कि Carolina Marin के खिलाफ कोपेनहेगन में 2014 वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में हारने के बाद, उन्होंने अपना दूसरा कांस्य भी जीता था।

खैर उस समय कौन जानता था कि इसी Carolina Marine के खिलाफ PV Sindhu 2016 रियो खेलों में कुछ साल बाद इतिहास रचेंगी।

अब समय आ गया मेरे पहले ओलंपिक खेलों का

2015 में एक गंभीर स्ट्रेस फ्रैक्चर से पीड़ित होने के बाद, Sindhu रियो 2016 में अपने पहले ओलंपिक खेलों के लिए तैयार थी।

हालांकि, उस दौरान 21 साल की उम्र में वह भविष्य के लिए एक उज्जवल सितारे के रूप में जरुर दिख रही थी, लेकिन रियो खेलों में लोगों का ये नहीं पता था कि उन्हें Sindhu से क्या उम्मीद रखनी चाहिए।

इसलिए जब भारत की 2012 की ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, Saina Nehwal ग्रुप चरणों में हारने के बाद ओलिंपिक से बाहर हो गई, तो एक अरब से अधिक भारतीय लोगों की उम्मीदें देश के लिए पदक जीतने के लिए इस युवा खिलाड़ी पर आ टिकीं।

Sindhu के शब्दों में, उन्होंने दबाव महसूस नहीं किया और इसके बजाय, उनके ड्रॉ को देखते हुए, उन्होंने कहा कि वह एक समय में केवल एक मैच के बारे में सोच रही थी।

मैं शुरू से ही पदक के बारे में नहीं सोच रही थी। कठिन ड्रॉ को देखते हुए, मुझे पता था कि मुझे एक समय में एक मैच के बारे में सोचना होगा।

भारतीय शटलर को शानदार शुरुआत मिली। उन्होंने अपने पहले मैच में हंगरी की Laura Sarosi को 21-8, 21-9 से हराया। अगले दौर में, उन्होंने कनाडा की Michelle Li का सामना किया, जिन्हें उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में आगे बढ़ने के लिए 19-21, 21-15, 21-17 से हराया।

Sindhu ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा; चीनी तायपेई की Tai Tzu-ying के खिलाफ अंतिम 16 मैच में, उन्होंने संभवतः अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक का प्रदर्शन किया और अपने प्रतिद्वंद्वी को सीधे सेटों (21-13, 21-15) में हराया।

अब क्वार्टरफाइनल में, उन्होंने Wang Yihan को 22-20, 21-19 से हराया, जो दो वर्षों में Wang पर Sindhu की दूसरी जीत भी थी। परिणामस्वरूप, भारत की PV Sindhu सेमीफाइनल में पहुंच गई और उन्होंने खुद को कम से कम कांस्य पदक दिलाने की गारंटी दी।

लेकिन, वह स्वर्ण के अलावा किसी और पदक के लिए नहीं जाना चाहती थी।

ओलंपिक में इस अनुशासन में देश का पहला स्वर्ण पदक जीतने की अपनी खोज में, Sindhu ने सेमीफाइनल चरण में Nozomi Okuhara का सामना किया, और उसे 21-19, 21-10 से हराकर ओलंपिक खेलों में अपनी पहली उपस्थिति में फाइनल में प्रवेश किया।

अब क्या, सभी की नज़र अपने देश के लिए स्वर्ण जीतने और इतिहास रचने के लिए 21 वर्षीय एथलीट पर थी।

PV की रजत पदक पर जीत

स्वर्ण पदक मैच में Sindhu का दो बार की वर्ल्ड चैंपियन और विश्व की नंबर एक खिलाड़ी, स्पेन की Carolina Marine से सामना होना था।

Sindhu के लिए यहां फाइनल में Carolina को हराना काफी चुनौतीपूर्ण होना था।

हालांकि, भारतीय शटलर पहले गेम में शीर्ष पर थी, उन्होंने पहला गेम 21-19 से जीता, लेकिन Carolina ने अविश्वसनीय वापसी की और शेष दो सेटों में 21-12, 21-15 से जीत दर्ज की और अंत में स्वर्ण पदक मैच जीता।

यह Sindhu और भारत के एक अरब लोगों के लिए काफी दुखदाई था, उन सबका दिल टूट गया था।

इस सभी के बावजूद, Sindhu ने ओलंपिक खेलों में पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था।

अब, Sindhu उन मुट्ठी भर बैडमिंटन खिलाड़ियों में से हैं जो पहले ही टोक्यो खेलों के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं, और वह अपने पिछले बार के परिणाम को बेहतर करने और बैडमिंटन में अपने देश के लिए एक स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद कर रही हैं।

स्पेन की Carolina Marin ने रियो ओलंपिक में महिला एकल स्वर्ण पदक मैच जीतने के बाद भारत की PV Sindhu को गले लगाया। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
स्पेन की Carolina Marin ने रियो ओलंपिक में महिला एकल स्वर्ण पदक मैच जीतने के बाद भारत की PV Sindhu को गले लगाया। (Clive Brunskill/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 Getty Images