भारतीय हॉकी टीम के कोच ग्राहम रीड और उनकी पत्नी को हिंदी से हो गया है प्यार, भारतीय व्यंजन को भी करते हैं बहुत पसंद!

Graham Reid

ऑस्ट्रेलियाई हॉकी कोच ग्राहम रीड और उनकी पत्नी जूलिया महीनों से बेंगलुरु के SAI कैंपस में हैं। दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए उनका प्यार बढ़ गया है।

अतुल्य भारत की सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक भोजन की विविधता है। हर राज्य अपने अलग विविधता के लिए जाना जाता है। भारत में हर राज्य में भोजन की इतनी विविधता है कि किसी भी विदेशी को आकर्षित कर सकता है।

उत्तर भारतीय की तंदूरी भोजन से लेकर दक्षिण में चेट्टीनाड तक और मुंबई के वड़ा-पाव से लेकर पूर्वी भारत की मछली करी और चावल तक, उप-महाद्वीप में आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए भोजन सबसे शानदार अनुभव होता है।

मसालेदार हो या तीखा, तरल हो या मीठा, भारतीय भोजन में इतनी विविधता है कि आपको दूर रहना मुश्किल हो जाएगा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) और उनकी पत्नी जूलिया (Julia) भी भारतीय भोजन के स्वाद से बच नहीं सके।

ऑस्ट्रेलियाई पति-पत्नी की जोड़ी पिछले एक साल से बेंगलुरु के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कैंपस में रह रही है, जहां कई बेहतरीन शेफ भी हैं।

जूलिया-रीड ओलंपिक चैनल को बताती हैं, "यहां का खाना बहुत शानदार है। यहाँ के शेफ वास्तव में अच्छे हैं।"

ग्राहम रीड ने कहा, “मैं विशेष रूप से यहां सांभर को बहुत पसंद करता हूं। मेरे लंच में हर दिन कम से कम एक कटोरी सांभर होता है।”

"हमारे यहां कुछ अलग शेफ हैं और उनमें से प्रत्येक अपने स्वयं के ट्विस्ट और स्वाद को इसमें जोड़ते हैं, इसलिए हमारे पास भी कुछ विविधताएँ हैं।"

ग्राहम और जूलिया रीड दुनिया के कई जगहों पर रह चुके हैं - वे ऑस्ट्रेलिया में बड़े हुए हैं, उन्होंने नीदरलैंड में ग्राहम रीड के समय में डच टीम के सहायक कोच के रूप में समय बिताया है और अब वो पिछले डेढ़ साल से भारत में हैं।

ग्राहम रीड ने कहा, "मुझे लगता है कि लॉकडाउन में सबसे शानदार चीजों में से एक ये है कि रसोइयों को खाना पकाने के साथ थोड़ा प्रयोग करने की अनुमति दी,"

उन्होंने कहा, "हम भाग्यशाली थे कि टीम घर गई थी, इसलिए उन्हें प्रतिबंधों का पालन नहीं करना पड़ा।"

जल्द ही हिंदी में बात करेंगे रीड

भले ही भारत में उन्होंने भोजन का आनंद खूब लिया है, लेकिन ग्राहम और जूलिया रीड को पछतावा है कि वो भारतीय भाषाओं में संवाद करना नहीं सीख रहे हैं - चाहे वो राष्ट्रभाषा हिंदी हो या स्थानीय भाषा कन्नड़।

जूलिया रीड ने कहा, "जब से हम यहां आए हैं, तब से हमने कुछ भी नहीं सीखा है, ये वास्तव में एक बड़ी शर्मिंदगी वाली बात है।" "हम बिल्कुल भी अच्छा नहीं कर रहे हैं।"

ग्राहम रीड ने अपना बचाव करते हुए कहा कि, उन्हें लगता है कि नई भाषा सीखना अधिक कठिन है क्योंकि वे बड़े हो गए होते हैं।

ग्राहम रीड ने कहा, "जब मैं नीदरलैंड में था तब मैंने डच भाषा में बात की थी, लेकिन बात ये है कि मैं पहले से ही थोड़ा बहुत जानता था। मैंने इसे अपने 20 साल की उम्र में सीखा क्योंकि मैं वहां लीग में खेलता था।”

उन्होंने कहा, '' स्थानीय भाषाओं को सीखना हमारी इच्छाओं की शीर्ष चीजों में से एक है। भारतीय हॉकी टीम के बारे में सबसे अच्छी बात ये भी है कि विभिन्न खिलाड़ियों द्वारा कई भाषाएं बोली जाती हैं, हालाँकि हिंदी शायद सबसे आम भाषा है।”

जूलिया ने जल्द ही इसके बारे में कुछ करने का मन बना लिया है।

उन्होंने कहा कि, "मुझे लगता है कि एक बार जब चीजें फिर से खुलने लगेंगी, तो हमें कोई न कोई शिक्षा मिलेगी। स्पष्ट रूप से अपने आप से ये काम नहीं हो पाएगा।”

वैसे, जूलिया अपने पति के शिविर में खिलाड़ियों को अंग्रेजी और कम्युनिकेशन स्किल सिखाती हैं। वो ग्राहम रीड के लिए परफेक्ट जोड़ीदार रही हैं क्योंकि भारतीय टीम अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के लिए तैयारी कर रही है।

ओलिंपिक चैनल द्वारा!