टोक्यो का सपना पूरा न हो पाने की वजह से अब पेरिस ओलंपिक पर होगी जिमनास्ट राकेश पात्रा की नज़र

भारत के Rakesh Patra ग्लास्गो 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के 7वें दिन SECC Precinct में मेंस ऑल-अराउंड फाइनल के दौरान रिंग्स में प्रतिस्पर्धा करते हुए। (Paul Gilham/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत के Rakesh Patra ग्लास्गो 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के 7वें दिन SECC Precinct में मेंस ऑल-अराउंड फाइनल के दौरान रिंग्स में प्रतिस्पर्धा करते हुए। (Paul Gilham/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

28 वर्षीय भारतीय जिमनास्ट ने अपने कंधे की चोट से उबरने के बाद फिर से ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया है। वह उम्र को मात देकर 2024 ओलंपिक खेलों में खुद के हुनर को साबित करना चाहते हैं।

25 वर्षीय Rakesh Patra साल 2015 में ग्लासगो विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने के बाद साल 2016 में रियो ओलंपिक खेलों में बहुत कम अंतर से अपनी जगह पक्की करने से चूक गए थे। इसके बाद आशाओं से भरपूर इस जिमनास्ट को टोक्यो ओलंपिक से बहुत उम्मीदें थीं।

रोमन रिंग्स के इस एथलीट ने 2015 में ग्लासगो में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद विश्व रैंकिंग में 25वां स्थान हासिल किया था। वहीं, रियो 2016 में जगह बनाने के लिए शीर्ष 24 में शामिल होना जरूरी था। ऐसे में राकेश पात्रा महज़ एक स्थान पीछे रहने की वजह से रियो ओलंपिक का हिस्सा नहीं बन सके। 

रियो के बाद पात्रा दुनिया के शीर्ष जिमनास्टों में शामिल होने में कामयाब रहे। इसके बाद मर्सिन में आयोजित किए गए FIG वर्ल्ड चैलेंज कप, मेलबर्न वर्ल्ड कप और गोल्ड कोस्ट में आयोजित किए गए 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार चौथा स्थान हासिल करने की वजह से ओडिशा के इस जिमनास्ट को सुर्खियों में ला दिया था।

लेकिन कंधे की चोट ने एक बार फिर पात्रा के शानदार सफर को रोक दिया। जनवरी 2019 में राकेश पात्रा के बाएं कंधे में बुरी चोट लगी और उन्हें एक एथलीट के जीवन के सबसे बुरे सपने यानी सर्जरी से गुजरना पड़ा।

राकेश पात्रा ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, "मैंने पहले टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का सोचकर इसपर नियंत्रण करने की कोशिश की, लेकिन मेरा कंधा इतनी बुरी हालत में था कि मैं अपना हाथ भी नहीं उठा पा रहा था।"

उनके कंधे की सर्जरी इस साल जनवरी में मुम्बई में हुई। मंदिरों के शहर पुरी में रहने वाले राकेश पात्रा ने आगे कहा, "यह [कंधा] पूरी तरह बेकार हो चुका था और मेरे पास आखिरी विकल्प सर्जरी कराना ही था। तब मैंने टोक्यो ओलंपिक के बारे में नहीं सोचा।”

राकेश पात्रा ने स्लोवेनिया में 2019 वर्ल्ड कप और इस साल मई के अंत में क्रोशिया में अपनी आखिरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसके बाद से वह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं।

परेशानियों पर पाया काबू

राकेश पात्रा का जीवन मुश्किलों और बाधाओं से भरा हुआ रहा है। एक गरीब परिवार से आने वाले राकेश पात्रा घास-फूस की झोपड़ी में रहते थे। उन्होंने बचपन में अपने उसी आशियाने को धूं-धूं कर जलते हुए देखा। जिसके बाद उन्हें और उनके परिवार को किसी रेफ्यूजी की तरह दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं।

पात्रा को आगे चलकर उनके चाचा Suvendu Patra से प्रेरणा मिली, जो पूर्व अंतरराष्ट्रीय जिमनास्ट थे। फिर उसी के बाद महज़ 11 साल की उम्र में उन्होंने जिमनास्टिक के इस खेल में अपने कदम रखे।

राकेश पात्रा ने याद करते हुए कहा, पहली बार जब मेरे चाचा मुझे अपने साथ झाड़ेश्वरी क्लब ले गए तो मैंने लोगों को साल्टो, फ्रंट साल्टो, बैक फ्लिप, फ्रंट फ्लिप और कई अन्य कई चीजें करते हुए देखा।”

भारत के Rakesh Patra ग्लास्गो 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के 7वें दिन SECC Precinct में मेंस ऑल-अराउंड फाइनल के दौरान रिंग्स में प्रतिस्पर्धा करते हुए। (Paul Gilham/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत के Rakesh Patra ग्लास्गो 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के 7वें दिन SECC Precinct में मेंस ऑल-अराउंड फाइनल के दौरान रिंग्स में प्रतिस्पर्धा करते हुए। (Paul Gilham/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2014 Getty Images

“जब मैंने इसे करने की कोशिश की, तो मैं गिर गया। लेकिन, उसके बाद से मैं इसे सीखना चाहता था।”

उसके बाद से इस जिमनास्ट ने एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने 2010 में भारतीय नौसेना के लिए काम करना शुरू किया और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अपनी क्षमताओं की झलक दिखानी शुरू कर दी।

हालांकि, भले ही उन्होंने कुछ बड़े इवेंट में लगातार चौथा स्थान हासिल किया हो, लेकिन वह 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2016 के ओलंपिक में जगह नहीं बना सके। इन्हीं सब से पता चलता है कि राकेश पात्रा का करियर शुरुआती दौर में बहुत अच्छा नहीं रहा है। यहां तक की उनकी किस्मत ने भी उनका साथ नहीं दिया।

राकेश पात्रा ने बताया, “Dipa Karmakar भी 26वें (2016 ओलंपिक क्वालिफिकेशन के दौरान) स्थान पर रहीं थीं, लेकिन उनके आगे के दो कोरियाई एथलीट डोपिंग की वजह से बाहर कर दिए गए। इसलिए, वह शीर्ष 24 (क्वालिफाई) में पहुंच गईं।

कड़ी मेहनत से उम्र को देना चाहते हैं मात

अब जब राकेश पात्रा अपनी चोट से उबरकर वापस लौट आए हैं और टोक्यो ओलंपिक खेलों को अगले साल आयोजित किया जाएगा, तो ऐसे में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप या किसी बाहरी अवसर के ज़रिए ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई करने की उम्मीद में फिर से ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया है।

लेकिन राकेश पात्रा को पता है कि चोट के बाद आए लम्बे विराम के बाद पेरिस में होने वाले 2024 ओलंपिक खेलों का लक्ष्य रखना ज्यादा उचित और सही होगा।

लेकिन उनके इस सपने में उम्र एक बाधा बन सकती है। पेरिस ओलंपिक आने तक राकेश पात्रा 32 साल के हो जाएंगे और देखा जाए तो जिमनास्ट युवाओं और शक्ति का खेल है। ऐसे में पात्रा का मानना है कि वह कड़ी मेहनत और सावधानी से योजना बनाकर अपनी उम्र को मात दे सकते हैं।

पात्रा ने कहा, “मैं मानता हूं कि शरीर थोड़ा धीमा हो जाता है। हम 18 से 25 की उम्र के बीच अपने शीर्ष पर होते हैं। जब आप 30 साल के हो जाते हैं तो आपको 25 साल की उम्र की तुलना में दोगुना मेहनत करनी होगी... अगर आप मानसिक तौर पर मज़बूत हैं तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है।"

राकेश पात्रा के पास प्रेरणा के लिए 1992 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता Oksana Chusovitina और चार बार के ओलंपिक पदक विजेता Iordan Iovtchev जैसे एथलीट हैं।

राकेश पात्रा ने कहा, "ओक्साना चुसोविटिना 45 साल की हैं और अभी भी वर्ल्ड इवेंट्स में पदक जीतती हैं। हमारे पास Jordan Jovtchev जैसे एथलीट भी हैं, जो 42 साल की उम्र में भी प्रतिस्पर्धा कर रहे थे और यहां तक कि वे रिंग्स के इस खेल में ओलंपिक के फाइनल में भी पहुंचे थे।"

बचपन में उनके घर में लगी आग आज भी राकेश पात्रा के अंदर जल रही है। इसलिए वह तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक अपने ओलंपिक सपने को साकार नहीं कर लेंगे।

ओलंपिक चैनल द्वारा!