ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए क्या हैं विकास कृष्ण के प्लान?

Vikas Krishan Yadav (Alex Livesey/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
Vikas Krishan Yadav (Alex Livesey/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

ओलंपिक में दो बार देश का प्रतिनिधित्व कर चुके बॉक्सर विकास कृष्ण टोक्यो ओलंपिक में पूरी कोशिश करेंगे कि वह किसी विरोधी को स्कोर न कर दें।

जब भी आप भारतीय मुक्केबाज़ विकास कृष्ण यादव (Vikas Krishan Yadav) से बात करते हैं तो उनमें बॉक्सिंग की समझ और आत्मविश्वास जरूर दिखता है। वह खिलाड़ी जिसने दो दशक तक बॉक्सिंग में देश का प्रतिनिधित्व किया हो, वह अपनी फाइट की तरह की बात करते हैं, उनकी बातों में स्पष्ट विचार होते हैं।

इसीलिए तो जब दो बार के ओलंपियन कहते हैं कि वह टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लिए किसी को कोई मौका नहीं दूंगा और न ही उन्हें स्कोर करने दूंगा तो किसी को आश्चर्य नहीं होता।

विकास कृष्ण ने ओलंपिक चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि “मैं ट्रेनिंग भी उसी माइंड सैट से करता हूं, जिस माइंड सैट से मैं रिंग में उतरता हूं। मैं ओलंपिक में कोशिश करूंगा कि कोई मुझे छू भी नहीं पाएगा, मैं वहां केवल जीत से संतुष्ट नहीं होना वाला, मुझे टोक्यो में डोमिनेट करना है।”

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हालांकि एशियन ओलंपिक क्वालिफायर्स (Asian Olympic Qualifiers) में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद से विकास कृष्ण को रिंग में कम ही मौके मिले हैं।

भारतीय बॉक्सर का मानना है कि उन्होंने शक्तिशाली पंच और पैरों की मूवमेंट पर काफी काम किया है लेकिन उनका डिफेंस और स्टेमिना कम है, जिस पर यह मुक्केबाज लगातार काम कर रहा है

विकास ने कहा कि “डिफेंस की वजह से मैं थोड़ी पीछे चला गया। मुझे लगता है कि मेरी वेट कैटेगिरी में मैं बाकी विरोधियों से ज्यादा शक्तिशाली हूं, मैंने जिन भी कोचों के साथ काम किया है, उन्हें भी ऐसा ही लगता है। मैं ज्यादा पावरफुल और क्विक हूं, ये चीजों मेरे अंदर जन्म से हैं और मैंने इनका उपयोग अपने करियर में अच्छे से किया है।

इसके अलावा उन्होंने कहा “लेकिन अब मैं अपने धीरज पर काम कर रहा हूं, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मैं तीन राउंड में शीर्ष पर रहूं। किसी को भी पॉइंट नहीं देना है। मैं इसी को सोचते हुए लगातार ट्रेनिंग कर रहा हूं। जब भी आप मुझे रिंग में दिखेंगे तो मै विरोधी को कोई मौका नहीं दूंगा, चाहे वह पहला राउंड हो या तीसरा।”

बेसिक की ओर लौटे विकास

अब विकास कृष्ण ने बेसिक से शुरुआत की है, यहां तक की पिछले कुछ महीनो में देखा गया है कि विकास खेल के बेसिक पर बहुत ध्यान दे रहे हैं। किसी के लिए जो एमेच्योर में अपना नाम कमा के आया हो, उन्हें ऐसा करते देखना आश्चर्यजनक लगता है लेकिन समय के साथ इसका फायदा भी पता चल जाता है

भारतीय बॉक्सर ने कहा “मैं मुक्केबाजी दो दशकों से कर रहा हूं और इस दौरान मैं एक पैटर्न का पालन किया है, मैंने खुद से ये नहीं पूछ मैं ऐसा क्यों कर रहा हूं। लेकिन अब मुझे लगता है कि मैंने जो हासिल किया है, वह अपनी मेहनत और काबिलियत की वजह से किया है। इसके बावजूद मैं जब अपनी पिछली बाउट देखता हूं तो यही सोचता हूं कि मैं क्या कर रहा हूं। मेरी तकनीक काफी खराब होती है।”

दो बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले विकास ने आगे कहा कि “मैं जब भी अपनी रियो 2016 और लंदन 2012 ओलंपिक की पहली बाउट देखता हूं तो यही सोचता हूं कि कितना खराब बॉक्सर है। इसका मुख्य कारण असंतुलन है। मैं तेज पंच मारने की कोशिश करता हूं और नीचे झुक जाता हूं, इसके बाद कोई तरीका नहीं है कि मैं सीधा खड़ा रह सकूं। इसके अलावा मेरे डिफेंस में भी कोई लचीलापन नहीं था। मैं या तो पीछे जाता था या डिफेंड के लिए ब्लॉक करता था।”

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अब बदलते समय के साथ उनके डिफेंस में भी परिवर्तन साफ देखा जा सकता है और अब वह अपने ट्रेडमार्क हुक के साथ और भी मजबूत हैं।

विकास कृष्ण मानते हैं कि उन्हें कुछ साल पहले बदलाव का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्होंने कभी इसके बारे में ज्यादा सोचा नहीं था। अब, वह खुश है कि वह इस पर काम कर रहे हैं।

जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स द्वारा प्रायोजित भारतीय मुक्केबाज का कहना है, "मुझे लगता है कि 2017 में ऐसा हुआ था जब मैंने पहली बार अपनी तकनीक में बदलाव करने के बारे में सुना था।"

जेएसडब्ल्यू के इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (IIS) में पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका से रोनाल्ड सिम्स जूनियर एक अनुभवी मुक्केबाजी कोच के रूप में आए थे। उस समय सिम्स ने जो सलाह भारतीय बॉक्सर की दी, उस पर उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

विकास कृष्ण ने बताया कि मैंने उन्हें ट्रेनिंग करते देखा लेकिन मुझे वह पसंद नहीं आई। उस समय मैं थोड़ा घमंडी था, (मुझे सब कुछ पता है) मैं उस समय ऐसा था। मैंने लंबे समय तक ये किया है और मैं सब जानता हूं। लेकिन इसके बाद मैं उन्हें अच्छे से जानने लगा। मुझे लगा वह सही कह रहे हैं, अगर मैं बॉक्सिंग में पांचवी ग्रेड पर हूं तो वह 12वें पर है।” 

इसके आगे उन्होंने कहा कि “यह आईआईएस में था, जब कोच रॉन ने मुझे हुक करते समय अपना पैर घुमाने के लिए रोका। उन्होंने मुझे किसी भी शीर्ष मुक्केबाज को देखने के लिए कहा कि मैं देखूं कि क्या वह भी ऐसा ही करते हैं क्या। मैंने कुछ मुकाबलों को देखा और अंतर देखा और उन्हें अपने खेल में लागू करना शुरू किया।” 

पिछले कुछ महीनों में कोच रॉन के साथ वर्जीनिया के चार्ल्स ह्यूस्टन में समय बिताने वाले विकास ने कहा कि “उसके बाद मैंने उसी तरह से प्रहार और बचाव करना शुरू कर दिया, जैसे वह करते हैं। मैं अब कम कलाई मोड़ता हूं, जिससे मैं और मजबूत हो गया हूं। इसी के साथ मैं अपना बैलेंस भी बनाए रखता हूं।”

लेकिन जिस बॉक्सर ने दो दशको तक अपने तरीके से मुक्केबाजी की हो, उनके लिए अपनी तकनीक में बदलाव करना कितना मुश्किल था।

इस पर उन्होंने कहा कि “मैं दो बार ओलंपिक में गया, मैं एक मुक्केबाज के तौर पर वहां पहुंचा। मैंने उसी तरीके से ट्रेनिंग की, जैसे सब करते हैं। अब ये मेरा आखिरी ओलंपिक है इसलिए इस बार भी मैं ऐसा करूंगा तो टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जात सकता हूं। लेकिन शायद ऐसा हो सकता, इससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। मुझे बस गोल्ड जीतना है और मुझे इससे कम कुछ मजूंर नहीं है। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।”

ओलिंपिक चैनल द्वारा