भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय ने बताया कि क्यों केंटो मोमोटा को हराना है बेहद मुश्किल

जापान के केंटो मोमोटा ने 2019 में 11 टाइटल अपने नाम किए हैं। (Matt Roberts/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
जापान के केंटो मोमोटा ने 2019 में 11 टाइटल अपने नाम किए हैं। (Matt Roberts/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

केंटो मोमोटा और भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय का सामना 7 बार हुआ है और सातों बार जापानी शटलर ने जीत हासिल की है।

जापान के केंटो मोमोटा (Kento Momota) ने बैडमिंटन के कोर्ट पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर बहुत सी सुर्खियां बटोरी हैं। उनका नाम सिर्फ जापान में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में इज्ज़त से लिया जाता है इसका सबसे बड़ा सबूत है एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) का वह बयान जब उन्होंने केंटो मोमोटा को अपना सबसे सख्त और कड़ा प्रतिद्वंदी बताया।

मोमोटा उस समय विश्व नंबर दो खिलाड़ी थे जब एक इलीगल कैसिनो में जाने के लिए निपोन बैडमिंटन एसोसिएशन (Nippon Badminton Association) ने उन्हें बैन किया था। ग़ौरतलब है कि वह बैन उन्हें रियो ओलंपिक गेम्स से 4 महीने पहले लगा था और जब 2017 में उन्होंने वापसी की तब वह 282 रैंक पर पहुंच गए थे।

चैलेंजर सिर्किट से वर्ल्ड नंबर 1 बनने के पथ पर इस जापानी शटलर ने बहुत वाहवाही लूटी और भारतीय शटलर एचएस प्रणॉय का मानना है कि उस दौरान मोमोटा ने अपने खेल में भी काफी सुधार किया था।

ओलंपिक चैनल से बात करते हुए प्रणॉय ने बताया “इंटरनेशनल सिर्किट पर केंटो मोमोटा सबसे कंसिस्टेंट खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों में अपने खेल को काफी अच्छा किया है। थे।

“उनकी शॉट मारने की क्षमता काफ़ी अच्छी है। उनकी यह भी एक ख़ासियत है कि वह अपने प्रतिद्वंदी के रिटर्न को भी भांप लेते हैं और अगर आपको उन्हें हराना है तो आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा।”

उन्होंने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा “मेरे लिए केंटो मोमोटा अभी तक के सबसे कड़े प्रतिद्वंदी रहे हैं।”

ग़ौरतलब है कि यह दोनों खलाड़ी 7 बार एक दूसरे के आमने सामने आ चुके हैं। 2013 डेनमार्क ओपन में पहली बार इनकी भिडंत हुई थी और वहां से लेकर आगे तक एचएस प्रणॉय हमेशा उनसे हारे हैं।

जापान के केंटो मोमोटा ने 2019 में 11 टाइटल अपने नाम किए हैं। (Matt Roberts/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
जापान के केंटो मोमोटा ने 2019 में 11 टाइटल अपने नाम किए हैं। (Matt Roberts/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2019 Getty Images

बाएं हाथ का मिला फ़ायदा

बैन के बाद केंटो मोमोटा ने शानदार वापसी करते हुए जुलाई 2017 से लेकर फरवरी 2018 के बीच लगातार 39 मुकाबले जीते और एक बार फिर उन्होंने अपने कौशल का प्रमाण पेश कर दिया।

साल 2018 में मोमोटा को एशियन चैंपियनशिप, इंडोनेशिया ओपन और बाकी खिताबों को जीतते हुए देखा गया। इतना ही नहीं इस जापानी शटलर ने ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) का एक साल में 10 टाइटल जीतने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इस लिस्ट में उन्होंने 73 मुकाबले खेले और 67 में जीत दर्ज कर 11 खिताब अपने नाम किए।

प्रणॉय का यह भी मानना है कि बाएं हाथ से खेलेने की वजह से जापानी खिलाड़ी को फायदा भी मिला है जैसे कि दिग्गज लिन डान (Lin Dan) और ली चोंग वेई (Lee Chong Wei) को भी मिला था।

प्रणॉय ने आगे बात करते हुए कहा “यह हमारे लिए अप्रचलित है क्योंकि हम बाएं हाथ से खेलने वाले खिलाड़ियों के साथ अभ्यास नहीं करते हैं और प्रतियोगिता में एक दम से अपने खेल को बदलना मुश्किल हो जाता है।”

2010 यूथ ओलंपिक गेम्स के सिल्वर मेडल विजेता ने आगे कहा “हमे हर एंगल को बदलना पड़ता है और साथ ही शॉट सिलेक्शन और खेल के बाकी स्वरूपों को भी बदलना होता है जो बहुत अहम होते हैं। किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth), पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap) और बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) जैसे बाकी के भारतीय शटलर भी मोमोटा के खिलाफ खेल चुके हैं लेकिन मुकाबले में ज़्यादा कुछ कर नहीं पाए थे और इसका कारण भी प्रणॉय जानते हैं।

“केंटो मोमोटा एक डिफ़ेंसिव खिलाड़ी हैं लेकिन उन्हें अटैक करना भी पसंद है। उनकी ख़ूबी उनकी तीव्रता है साथ ही कोर्ट पर फुर्ती से भागना भी उनकी एक कला है।”

HS PRANNOY 2019 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में केनोतो मोमोटा को हराने के बेहद करीब थे। (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
HS PRANNOY 2019 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में केनोतो मोमोटा को हराने के बेहद करीब थे। (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2018 Getty Images

सब्र का फल मीठा

केंटो मोमोटा के डिफ़ेंस में कुछ कमिया भी हैं और उन्हें इंडोनेशिया के शटलर एंथोनी गिंटिंग (Anthony Ginting) ने 2019 चाइना ओपन और 2018 एशियन गेम्स में बख़ूबी बाहर निकाला था।

यह भी कहना गलत नही होगा कि एचएस प्रणॉय ने भी उनकी कमियों को भांप लिया था और 2019 BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान उनके सामने प्रदर्शन भी काफी अच्छा किया था।

एचएस प्रणॉय ने अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “उनके खिलाफ खेलते हुए हमे सब्र से काम लेना चाहिए और समय मिलने पर अपना बेसत शॉट देना चाहिए।”

“जब मैं मोमोटा के ख़िलाफ़ खेलता हूं तब मैं सब्र से काम लेता हूं और साथ ही कुछ चीज़ों के बारे में सोचता हूं पर सही समय आने पर उन्हें खेल में लाता हूं। मुझे लगता है कि पिछले साल हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में मैंने उनके ख़िलाफ़ पहले गेम में अच्छा प्रदर्शन किया था।”

एचएस प्रणॉय ने बातचीत को बढ़ाते हुए कहा “हां, कुछ दिन होते हैं जब आप अपने हिसाब से खेल नहीं पाते लेकिन बाकी दिनों पर आप अच्छा कर जाते हो। एंथोनी गिंटिंग वह कर पाए क्योंकि वह केंटो मोमोटा से तेज़ हैं।

केंटो मोमोटा के डिफ़ेंस में कुछ कमिया भी हैं और उन्हें इंडोनेशिया के शटलर एंथोनी गिंटिंग (Anthony Ginting) ने 2019 चाइना ओपन और 2018 एशियन गेम्स में बख़ूबी बाहर निकाला था।

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