रियो 2016 में चूकने के बाद टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने पर दुती चंद की नज़र

भारत की Dutee Chand. (Lintao Zhang/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत की Dutee Chand. (Lintao Zhang/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

यूनिवर्सियाड और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली दुती चंद टोक्यो ओलंपिक के लिए प्रभावशाली रूप से आगे बढ़ रही हैं।

दिग्गज भारतीय स्प्रिंटर Dutee Chand ने रियो ओलंपिक के लिए 100 मीटर दौड़ में क्वालिफाई कर पहली भारतीय महिला एथलीट बनकर इतिहास रचा था। ऐसा 36 सालों में पहली बार हुआ था जब किसी भारतीय महिला एथलीट ने 100 मीटर की दौड़ में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया हो। उन्हें लगता है कि वो टोक्यो ओलंपिक के लिए अच्छी तरह से तैयार हो जाएंगी।

ओलंपिक तक पहुंचने वाले दुती चंद की प्रतिभा पर किसी को संदेह नहीं है, पिछले कुछ सालों के उनके करियर पर नज़र जाला जाए तो हमें पता चलेगा कि दुती चंद का सफर 2018 एशियाई खेलों में अपने ऐतिहासिक रजत पदक के साथ शुरू हुआ था।

जकार्ता में महिलाओं की 100 मीटर दौड़ में उनका रजत 32 सालों में उस श्रेणी में भारत का पहला पदक था। उससे पहले PT Usha ने 1986 में और 2002 में Sarasvati Saha ने स्वर्ण जीता था। 16 सालों में दुती चंद का 200 मीटर में रजत पदक भारत का पहला पदक था।

दुटि चंद 2019 में नेपोली में यूनिवर्सियाड में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय धावक बनीं, जबकि दुती चंद ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (Khelo India University Games) (KIUG) में दो स्वर्ण पदक (100 मीटर और 200 मीटर) जीता।

कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रकोप के कारण सभी खेल आयोजनों पर रोक लगा दी गई है, जिससे ओलंपिक को भी एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया था। दुती चंद का मानना ​​है कि वो अगले साल इसके लिए तैयार हो जाएंगी।

"मेरे पास टोक्यो ओलंपिक से पहले सभी आवश्यक समर्थन और ट्रेनिंग करने का संसाधन थे और मैं तैयार थी। अगले साल क्वालिफाइंग टूर्नामेंट शुरू होने वाले हैं और मुझे फिर से तैयार रहना होगा।''

रियो के लिए नहीं थीं पूरी तरह तैयार

हालांकि 2016 के ओलंपिक के लिए ओडिशा की इस एथलीट के लिए तैयारी करना आसान नहीं था।

हाइपरएंड्रोजेनिज्म विवाद के कारण दो साल तक प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य रहने के बाद, दुती चंद को तैयारी के लिए बहुत कम समय के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) द्वारा प्रतिस्पर्धा करने के लिए मंजूरी दी गई थी।

खेलों के शुरू होने से बमुश्किल दो महीने पहले वो बिना किसी परवाह के तूफान की तरह दौड़ीं, कजाकिस्तान में 26वें जी कोसानोव मेमोरियल मीट में रजत पदक जीतकर सुर्खियां बटोरा।

हालाँकि दुती चंद का पहला ओलंपिक अभियान गर्मी के कारण समय से पहले समाप्त हो गया, लेकिन उनकी संघर्ष की कहानी को पूरी दुनिया ने देखा।

ओडिशा की स्प्रिंटर ने रियो पहुंचने के लिए इकोनॉमी क्लास में तीन उड़ानों में 36 घंटे की यात्रा की और अपने कोच के बिना रुकी थीं। उनके कोच की एक्रेडेशन के मुद्दों की वजह से उनकी यात्रा पर रोक लग गई थी।

दुती चंद के पास ओलंपिक के लिए पहना जाने वाला स्पाइस-आउट (जूते) की सिर्फ एक जोड़ी थी और ये बात उनके कोच ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक ऑनलाइन रिटेल साइट ने उन्हें ओलंपिक से कुछ दिन पहले एक नई जूतों की जोड़ी भेंट करने का फैसला किया था।

ओलंपिक चैनल के साथ एक इंटरव्यू में दुती चंद ने अपने रियो अभियान को याद करते हुए कहा कि, "मुझे रियो ओलंपिक खेलों की ट्रेनिंग के लिए बहुत समय नहीं मिला प्रतिबंध [हाइपरएंड्रोजेनिज़्म] के कारण मुझपर मानसिक दबाव भी था।” 

दूटी चंद ने कहा, "लेकिन, मुझे पीटी उषा के बाद से 100 मीटर की दौड़ में 36 साल बाद प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली भारतीय होने पर गर्व था। मैंने रियो के एथलीटों से बहुत कुछ सीखा, कैसे ट्रेनिंग की जाए और खुद को कैसे फिट रखा जाए।”

20 साल की दुती चंद ने 2017 एशियाई चैंपियनशिप में 100 मीटर और 4X100 मीटर स्पर्धा में दो कांस्य पदक जीतकर निराशा को पीछे छोड़ दिया था और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

गति बढ़ाने की है जरूरत

दुनिया भर के अधिकांश एथलीटों की तरह, दुती चंद भी अपने घर के कामकाज तक ही सीमित हैं जो अब भी उन्हें एक्टिव बनाती है।

हालांकि, स्प्रिंटर का मानना है कि उन्हें फिर से हाई लेवल पर प्रतिस्पर्धा शुरू करने से पहले अपनी सर्वश्रेष्ठ गति वापस पाने के लिए हाई-लेवल की ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी।

दुती चंद ने कहा, "हम प्रतियोगिताओं के बिना जीवित रह सकते हैं लेकिन ट्रेनिंग के बिना ये मुश्किल है। मुझे फिर से गति प्राप्त करने में लगभग छह महीने लगेंगे।”

“हम धावक हैं और हमारे ट्रेनिंग में घंटों तक ट्रैक पर अभ्यास करना होता है। हमारा शरीर सीधे तैयार नहीं हो सकता। इसलिए, हम पहले ट्रेनिंग को फिर से शुरू करने का इंतज़ार कर रहे हैं।”

आगे की योजनाओं पर कोरोना का कहर

उनकी क्वालिफिकेशन अभी भी अधर में लटकी हुई है, दुती चंद ने ओलंपिक में जाने के लिए अपनी योजना को चाक-चौबंद कर दिया था, जो मूल रूप से जुलाई 2020 में तय हुआ था, लेकिन COVID -19 से फैले दुनियाभर में प्रकोप ने सब कुछ रोक दिया।

दुती चंद ने कहा, “मैंने अपनी क्वालिफिकेशन के अवसरों को बढ़ाने के लिए जर्मनी जाने और वहां ट्रेनिंग करने की योजना बनाई थी, और साथ ही साथ इवेंट्स में भाग लिया। लेकिन सब कुछ अब बंद हो गया है।”

ओलंपिक को एक साल के लिए स्थगित करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने 29 जून 2021 को क्वालिफिकेशन अवधि के लिए नई समय सीमा जारी की है।

एथलेटिक्स फेडरेशन (IAAF) के इंटरनेशनल एसोसिएशन ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन अवधि को दिसंबर 2020 तक निलंबित कर दिया है।

दुती चंद को अब खुद को तैयार करने और महिलाओं की 100 मीटर स्पर्धा के लिए 11.15 सेकंड के कट-ऑफ मार्क को पूरा करने के लिए एक साल से अधिक का समय है। हालांकि, ट्रनिंग नहीं करना ही सिर्फ दुती चंद की चिंता नहीं है।

“अब मेरे पास कोई योजना नहीं है, लेकिन मैं अपने प्रबंधक से बात करूंगी और हमें अगले साल के लिए प्रायोजकों की तलाश करनी होगी। हमें अपने अभ्यास के लिए उचित ट्रेनिंग सेंटर का भी चयन करना होगा।”

ओलंपिक चैनल द्वारा!