ओलिंपिक फुटबॉल में अमरीका के वर्चस्व की कहानी 

अमरीका की महिला फुटबॉल टीम के खिलाड़ी बीजिंग 2008 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद पदक समारोह में भाग लेती हुई। (फोटो Koji Watanabe/गेट्टी इमेजेस द्वारा)
अमरीका की महिला फुटबॉल टीम के खिलाड़ी बीजिंग 2008 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद पदक समारोह में भाग लेती हुई। (फोटो Koji Watanabe/गेट्टी इमेजेस द्वारा)

ओलिंपिक खेलों के इतिहास में कई देशों ने कुछ प्रतियोगिताओं में ऐसा प्रदर्शन दिखाया है कि उन्हें अविश्वसनीय से काम नहीं कहा जा सकता है। टोक्यो 2020 आपको कुछ ऐसे देश और उनके सितारों के बारे में बताएगा। हमारी इस श्रंखला के पहले भाग में हम आपको अमरीका की महिला फुटबॉल टीम के बारे में बताएँगे। 

शुरुआत की कहानी

अमरीका की महिला फुटबॉल टीम खेल के इतिहास में सबसे सफल टीमों में से एक है और उनका ओलिंपिक रिकॉर्ड इस बात का सबसे सटीक उदाहरण है। अपने ओलिंपिक इतिहास में अमरीका की महिला फुटबॉल टीम ने 1996 एटलांटा और 2012 लंदन ओलिंपिक खेलों के बीच चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। 

एक सफल फुटबॉल टीम होने से पहले अमरीका की महिला फुटबॉल टीम को बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था और अपने ही देश में पक्षपात के कारण महिलाओं के खेल को बढ़ावा नहीं दिया जाता था। सरकार ने टाइटल नौ पारित किया और इसके कारण पक्षपात का अमरीका में अंत हुआ जिसके बाद महिलाओं के लिए खेल में कई अवसर बने। 

राष्ट्रीय टीम के कोच Mike Ryan को वर्ष 1985 को इटली में होने वाली एक प्रतियोगिता के लिए टीम का चयन करने की ज़िम्मेदारी दी गयी थी लेकिन उनके पास एक हफ्ते से भी कम समय था और अभ्यास का भी समय नहीं था। अंत में उन्होंने टीम का चयन किया और अमरीका की महिलाओं ने चौथा स्थान प्राप्त किया लेकिन एक अनोखे सफर की शुरुआत हो चुकी थी।

इटली में खेलने के बाद अमरीका की फुटबॉल टीम के प्रदर्शन में सुधर आता रहा और 1986 में उसी प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। दो साल बाद फीफा द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में अमरीका को नॉर्वे के हाथों क्वार्टरफाइनल में हार का सामना करना पड़ा लेकिन 1991 में महिलाओं के पहले फीफा विश्व कप में उन्होंने हार का बदला लिया और नॉर्वे को 65000 दर्शकों के सामने फाइनल में 2-1 हराया।

लगातार संसाधनों की कमी होने के बाद भी अमरीका की राष्ट्रीय टीम ने अनेक प्रतियोगिताओं में भाग लिया और 1995 विश्व कप में तीसरा स्थान अपने नाम किया।

सबसे बड़ी जीत

अमरीका की टीम ने ओलिंपिक खेलों में बहुत सारे महत्वपूर्ण मुकाबले जीते हैं जिनमे 1996 एटलांटा में स्वर्ण और 2012 लंदन खेलों में जापान के विरुद्ध उनकी जीत शामिल हैं।

इस टीम की उपलब्धियों में एक ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीत हमेशा याद रखी जाएगी।

बीजिंग में आयोजित किये गए 2008 ओलिंपिक खेलों में अमरीका महिला फुटबॉल स्वर्ण जीतने के लिए सबसे प्रबल दावेदार नहीं था क्योंकि एक साल पहले ही उन्होंने ब्राज़ील के विरुद्ध विश्व कप सेमीफइनल में 4-0 की कड़ी हार का सामना करना पड़ा था। टीम के कोच Greg Ryan के कार्यकाल में यह टीम केवल दो मैच हारी थी और इसी कारण से उन्हें हटा दिया गया था। Ryan की जगह ली स्वीडन की कोच Pia Sundhage ने और यह इतिहास में सिर्फ दूसरा ऐसा क्षण था जब एक महिला राष्ट्रीय टीम की कोच बनी।

कठिनाई यहीं समाप्त नहीं हुई और जुलाई में एक मैच के दौरान टीम की सबसे अच्छी खिलाड़ियों में से एक Abby Wambach की टांग ओलिंपिक खेलों से कुछ हफ़्तों पहले टूट गयी।

अमरीका की शुरुआत बहुत ख़राब हुई और पहले राउंड में उन्हें पुराने प्रतिद्वंदी नॉर्वे के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन अगले दो मैचों में जापान और न्यूज़ीलैंड को हराने के बाद उन्होंने अपने ग्रुप में पहला स्थान पा लिया। क्वार्टरफाइनल में कनाडा के खिलाफ एक कड़े मुकाबले के बाद अमरीका सेमीफाइनल में पहुँची और जापान को परास्त कर रजत पदक पक्का कर लिया।

अमरीका का सामना 2008 बीजिंग ओलिंपिक के स्वर्ण पदक मुकाबले में ब्राज़ील से हुआ और यही दोनों टीम एथेंस 2004 खेलों में भी भिड़ी थी। मैच के निर्धारित 90 मिनट का समय पूरा हुआ लेकिन एक भी गोआल नहीं पड़ा था और मुकाबला अतिरिक्त टाइम में चला गया। छह मिनट के अंदर ही अमरीका की स्ट्राइकर Carli Lloyd ने एक बेहतरीन गोल मारा और स्वर्ण अपनी टीम के नाम कर दिया।

उस टीम की खिलाड़ी Heather Mitts ने 2018 में द गार्डियन को बताया, "नॉर्वे के खिलाफ हुए मुकाबले में जो कुछ भी गलत हो सकता था हुआ लेकिन हमने एक दुसरे से कहा कि हम आने वाले मैच जीत सकते हैं। यह सफर कुछ अलग था लेकिन हमारी टीम के लिए बहुत खास रहा और हमने एकजुट होकर अपने देश को स्वर्ण दिलाया।"

लगातार दो ओलिंपिक स्वर्ण जीतने के बाद अमरीका ने दिखाया कि वह विश्व फुटबॉल कि सर्वश्रेष्ठ टीम है।

महत्वपूर्ण खिलाड़ी

अमरीका की महिला फुटबॉल टीम ने ओलिंपिक खेलों में अपना दबदबा 16 साल तक बनाए रखा और इस सफलता के लिए कई खिलाड़ियों का योगदान रहा है लेकिन Mia Hamm, Kristine Lilly, Julie Foudy, Brandi Chastain और Joy Fawcett कुछ ऐसे नाम हैं जो सर्वश्रेष्ठ रहेंगे। Hamm अपने दौर में विश्व की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी कही जाती थी और Lilly को बेहतरीन मिडफील्डर में से एक कहा जाता था। 

इन पांच खिलाड़ियों को "फैब फाइव" के नाम से विश्व मे जाना गया और इन्होने 2004 एथेंस खेलों में ब्राज़ील के विरुद्ध स्वर्ण जीतने में अमरीका की सहायता करी।

एथेंस में आयोजित 2004 ओलिंपिक खेलों में ब्राज़ील को हरा कर स्वर्ण जीतने के बाद अमरीका की महिला फुटबॉल टीम अपने पदकों के साथ ख़ुशी मनाती हुई। (फोटो गेट्टी इमेजेस के Jamie Squire द्वारा)
एथेंस में आयोजित 2004 ओलिंपिक खेलों में ब्राज़ील को हरा कर स्वर्ण जीतने के बाद अमरीका की महिला फुटबॉल टीम अपने पदकों के साथ ख़ुशी मनाती हुई। (फोटो गेट्टी इमेजेस के Jamie Squire द्वारा)
2004 Getty Images

आगे की कहानी

रियो 2016 ओलिंपिक खेलों में पहली बार ऐसा हुआ कि अमरीका स्वर्ण पदक के मुकाबले में नहीं पहुँच पाई और अगले साल उन्होंने कुछ बदलाव किए लेकिन टीम ने अपना दबदबा बनाये रखा।

अमरीका ने 2018 शीबिलीव्स कप, 2018 टूर्नामेंट ऑफ़ नेशंस जीता और उसके अगले वर्ष 2019 फीफा विश्व कप भी अपने नाम किया। इस जीत के साथ अमरीका महिलाओं का विश्व कप को चार बार जीतने वाला पहला देश बना और पूरी प्रतियोगिता में 26 गोल मारे और केवल तीन खाये।

अगले साले होने वाले टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में अपनी जगह बना ली है और फरवरी में कॉनकाकाफ ओलिंपिक क्वालीफाइंग चैंपियनशिप अपने नाम कर ली।

क्या अमरीका अपना ओलिंपिक ताज दोबारा जीत पायेगी?