इनक्रेडिबल टीम्स: हंगरी की 50 के दशक की वॉटर पोलो टीम

1956 में मेलबर्न में स्वर्ण पदक जीतने वाले हंगरी के Gyorgy Karpati, वॉटर पोलो में चार या अधिक ओलंपिक पदक जीतने वाले आठ पुरुष एथलीटों में से एक हैं।
1956 में मेलबर्न में स्वर्ण पदक जीतने वाले हंगरी के Gyorgy Karpati, वॉटर पोलो में चार या अधिक ओलंपिक पदक जीतने वाले आठ पुरुष एथलीटों में से एक हैं।

ओलंपिक खेलों के इतिहास में कई टीमें इतनी ऊंचाइयों तक पहुंची हैं कि उन्हें केवल अविश्वसनीय ही कहा जा सकता है। टोक्यो 2020 इन अविस्मरणीय टीमों और स्टार खिलाड़ियों की कहानियों को फिर से दर्शाता है जिन्होंने उन्हें ओलंपिक खेलों को रोमांचक बनाने और नए आयामों तक पहुंचने में मदद की। श्रृंखला के अगले भाग में, हम हंगरी की पुरुष वॉटर पोलो टीम को देखते हैं, जिन्होंने 50 के दशक में पूल पर अपना दबदबा बनाया था।

शुरुआती दौर

जब से ओलंपिक खेलों में वॉटर पोलो खेल की शुरुआत हुई, हंगरी हमेशा वॉटर पोलो का पावरहाउस साबित हुआ है। आंकड़े खुद बोलते हैं - उन्होंने 27 ओलंपिक खेलों में से 22 में भाग लिया, जिसमें नौ स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य जीते। वे 1928 और 1980 के बीच बिना असफल हुए ओलंपिक पोडियम पर भी बने रहे थे। और शायद इससे भी ज्यादा काबिले तारीफ, उन्होंने 2000 और 2008 के बीच लगातार तीन स्वर्ण पदक जीत कर इस खेल पर अपना सिक्का जमाया।

इसलिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के ओलंपिक खेलों में Magyars को देखना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, हंगरी की टीम को इस नाम से भी जाना जाता है, साथ ही उनका प्रदर्शन हमेशा उच्च श्रेणी का रहा। लंदन 1948 में, टीम ने रजत पदक अर्जित किया और हेलसिंकी 1952 में, उन्होंने स्वर्ण पदक पर अपनी जीत दर्ज की। लेकिन ठीक चार साल बाद ओलंपिक इतिहास का सबसे प्रसिद्ध वॉटर पोलो मैच हंगरी और यूएसएसआर के बीच मेलबर्न में हुआ, जिसने इतिहास में नए पन्नों का आगाज़ किया।

हेलसिंकी 1952 ओलंपिक खेलों में हंगरी की वॉटर पोलो टीम।
हेलसिंकी 1952 ओलंपिक खेलों में हंगरी की वॉटर पोलो टीम।
© 1952 / Comité International Olympique (CIO)

सबसे बड़ी जीत

कई बार, सबसे बड़ी जीत भी अंतिम चरण नहीं होती।

1956 में मेलबोर्न में, सोवियत और हंगरी के बीच हुआ सेमीफाइनल खेल "पानी में खून" के रूप में प्रसिद्ध हो गया। ओलंपिक खेलों की शुरुआत से कुछ दिन पहले, बुडापेस्ट में एक क्रांति शुरू हुई, जिसका यूएसएसआर ने दमन किया। इस तरह के संदर्भ में, सेमीफाइनल स्पष्ट रूप से दोनों देशों के बीच बेहद तनावपूर्ण था।

हालांकि, खेल में हंगरी का वर्चस्व था, जो 4-0 से आगे था। लेकिन खेल के अंतिम क्षणों में, सोवियत संघ के Valentin Prokopov ने हंगरी के खिलाड़ी Ervin Zador को चेहरे पर मुक्का मारा, और "पानी में वाकई खून" उतर आया।

मैच रोक दिया गया और हंगरी स्कोर विजेता घोषित किया गया।

फाइनल में, Zador अपनी चोट के कारण नहीं खेल सके, हंगरी ने यूगोस्लाविया को 2-1 से हराकर अपना चौथा ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता।

ओलंपिक वॉटर पोलो का कठिन निर्णय
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वॉटर पोलो को सबसे अधिक शारीरिक क्षमता वाला खेल समझा जाता है। जानिए क्यों 1956 के मेलबर्न खेलों में हुए इस खेल के मैच को सबसे अधिक याद किया जाता है।

प्रमुख खिलाड़ी

1956 में मेलबर्न में Zador के अलावा जिन्होंने चार मैचों में पांच गोल का रिकॉर्ड बनाया, साथ ही यूएसएसआर के खिलाफ प्रसिद्ध "ब्लड इन द वॉटर" खेल में दो गोल शामिल थे, वे दो दिग्गज खिलाड़ी जो स्क्वाड का भी हिस्सा थे, उनमें से एक थे Dezső Gyarmati, उन्होंने पांच ओलंपिक पदक अर्जित किए। कुल मिलाकर (3 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य और दूसरे खिलाड़ी थे, GyörgyKárpáti, जिन्होंने 4 पदक (3 स्वर्ण और 1 कांस्य) जीते।

Gyarmati का जिक्र अक्सर इतिहास में सबसे अच्छे वॉटर पोलो खिलाड़ियों के रूप में किया जाता है। उन्हें "दुनिया का सबसे तेज वॉटर पोलो प्लेयर" कहा जाता था (वह 58.5 सेकंड में 100 मीटर तैर सकते थे), उनके पास दोनों हाथों को समान क्षमता के साथ आगे पीछे चलाने की प्रतिभा थी, आगे या पीछे खेल सकते थे, वे एक महान स्कोरर होने के साथ-साथ एक प्लेमेकर भी थे।

Kárpáti, जिनका दुर्भाग्य से इस साल जुलाई में निधन हो गया, एक अलग तरह के खिलाड़ी थे, जैसा कि उन्होंने एक साक्षात्कार में एक बार खुद को वर्णित किया था - “मैं सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं था, मेरे पास सबसे बड़ा कौशल नहीं था और मेरा डीलडौल भी सामान्य आकार का है, मैं बहुत बड़ी कद काठी नहीं रखता हूं। लेकिन मैं हमेशा इससे और अधिक की चाहत रखता था, किसी और की तुलना में बहुत अधिक। शायद यही मेरी सफलता की कुंजी थी।"

और अब आगे...

वास्तविकता यह है कि पूरे इतिहास में हंगेरियन वॉटर पोलो टीमों में से कई को" अविश्वसनीय "माना जा सकता है।

Magyars को व्यावहारिक रूप से ओलंपिक में सफल होने से कोई नहीं रोक सका, लेकिन कुछ टीमें थीं, जो विशेष रूप से अधिक प्रभावशाली थीं। Tamás Faragó के नेतृत्व में, हंगरी ने 1972, 1976 और 1980 में ओलंपिक पदक अर्जित किए। बीस साल बाद, उन्होंने लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते (2000 से 2008 के बीच), वॉटर पोलो में ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाली दूसरी टीम बन गई, जिस ने इतिहास रचा, ग्रेट ब्रिटेन टीम पहले नंबर पर थी।

1998-2008 दशक में Tibor Benedek, Tamas Kásás, Tamás Molnár या Gergely Kiss, जैसे खिलाड़ियों के साथ हंगेरियन टीम ने जीत और वह सब कुछ हासिल किया, जो इन जैसे खिलाड़ियों के साथ ही संभव था और जिसका कि इतिहास गवाह है।

हालांकि, बीजिंग 2008 के बाद से हंगरी ओलिंपिक मंच पर कुछ खास नहीं कर पाया, लेकिन हाल ही में उनके द्वारा अर्जित स्वर्ण पदक और 2020 की यूरोपियन चैंपियनशिप में उनकी सफलता, जिसने उन्हें टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई किया, यह दर्शाती है कि शायद यह कुछ नया करने की शुरुआत हो।

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