'ड्रैग-फ्लिक तकनीक सीखना मेरे करियर के लिए एक टर्निंग पॉइंट रहा है' - Gurjit Kaur

Gurjit Kaur (गेटी इमेज)
Gurjit Kaur (गेटी इमेज)

भारतीय महिला हॉकी टीम की डिफेंडर और महत्वपूर्ण खिलाड़ी, Gurjit Kaur के लिए पिछले 2-3 साल बहुत ही अच्छे रहे हैं, न केवल टीम की सफलता की वजह से पर व्यक्तिगत दृष्टि से भी।  

2018 के एशियाई खेलों में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन दिखाया और भारत को रजत पदक जितने में अहम भूमिका निभाई थी। उसके ठीक एक साल बाद 2019 में, उन्होंने एफआईएच श्रृंखला के फाइनल्स में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा गोल करे।

उनकी सराहना पुराने खिलाड़ियों के साथ खेल विशेषज्ञ भी कर रहे हैं, और Gurjit ने इस सफलता के पीछे का मुख्या कारण भी बताया।

Gurjit ने खोजी छुपी प्रतिभा

हॉकी जैसे खेल में एक ड्रैग-फ्लिकर का महत्त्व कोई भी खिलाड़ी या कोच बता सकता है, और यह एक ऐसी जगह है जो एक टीम में किसी खास खिलाड़ी को ही मिलती है।

2012 के पहले 24-वर्षीय Gurjit को ड्रैग-फ्लिक तकनीक के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी, पर 2012 में जूनियर राष्ट्रीय कैंप में उनको इसके बारे में बारीकी से पता चला।

हॉकी इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, '2012 के कैंप से पहले मुझे ड्रैग-फ्लिक तकनीक के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी हालांकि मैं अभ्यास ज़रूर करती थी। कैंप में आने के बाद मैंने ड्रैग-फ्लिक तकनीक के मूल सिद्धांतों पे ध्यान दिया और उन्हें सीखा। मेरा प्रदर्शन समय के साथ बेहतर होता चला गया और मेरी तकनीक में बहुत सुधार आया है।

सफलता का कारण 'ड्रैग फ्लिक'

Gurjit यह भी मानती हैं की ड्रैग-फ्लिकर के तौर पर टीम में खेलने से उनके करियर को एक नयी और अच्छी दिशा मिली है।

'ड्रैग-फ्लिक तकनीक सीखना मेरे करियर के लिए एक टर्निंग पॉइंट रहा है। इस टीम में हर सदस्य की अलग ज़िम्मेदारी है और मुझे इस बात की ख़ुशी है की मैंन एक ड्रैग-फ्लिकर होने के नाते अपने दल के लिए मेहनत कर रही हूँ। मेरे बाकी साथियों की इसमें अहम भूमिका रही है और जो भी मेरे कोच हैं उन्होंने मेरा बहुत अच्छा मार्गदर्शन किया जिसकी वजह से मेरी तकनीक बहुत बेहतर हो गयी है,' उन्होंने हॉकी इंडिया से की गयी बातचीत में कहा।

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लक्ष्य टोक्यो, मंत्र कड़ा अभ्यास

2016 रियो ओलिंपिक में निराशा हाथ लगने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम इस बार चीज़ों और नतीजों को बदलना चाहेगी। टोक्यो में आयोजित होने वाले खेलों में पदक लाना एक ऐतिहासिक और दुर्गम लक्ष्य ज़रूर है पर असंभव नहीं और Gurjit के लिए कड़ी मेहनत और लगन से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण कुछ नहीं है।

'अगर आपको एक अच्छा खिलाड़ी बनना है तो कड़ा अभ्यास सबसे ज़रूरी है। मैंने अपने खेल पर बहुत काम किया है और उसका फल मुझे अब मिल रहा है। साथ ही साथ, मैं किसी भी स्थिति में हार नहीं मानती हूँ और यह सोच मुझे आगे भी काम आती रहेगी,' Gurjit ने स्पष्ट किया। 

भारत महिला हॉकी के इतिहास में यह तीसरी टीम है जो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेगी (1980 और 2016 के बाद) और Gurjit उस टीम का एक अहम् हिस्सा हैं।

क्या यह आत्मविश्वास पदक बनेगा? कहना मुश्किल है पर Gurjit की मानें तो टीम आसानी से हार नहीं मानेगी।