‘’अगर मैं फिट रही, तो जरुर ओलंपिक में वापसी कर सकती हूं’’ – Geeta Phogat

Geeta Phogat
Geeta Phogat

रेसलिंग में भारत का नाम रोशन करने वाली Geeta Phogat ने अपनी वापसी के बारे में खुलकर बात की, कौन जानता है वह अगले साल खेले जाने वाले ओलंपिक में वह रेसलिंग में पदक जीत इतिहास रच दें।

भारत, फ्रीस्टाइल रेसलिंग और ओलंपिक की आपस में एक अद्दभुत कहानी रही है। इस खेल के पिछले कुछ दशकों में भारत का हॉकी में बहुत बड़ा इतिहास रहा है। ऐसे ही रेसलिंग भी ओलंपिक में एक पॉवरहाउस की तरह सामने आई है।

चाहे वह Sakshi Malik, Bajrang Punia, Sushil Kumar हों या Yogeshwar Dutt, सभी ने इस खेल में देश को गौरवान्वित करने में अपनी भूमिका निभाई है। हालाँकि अगर घड़ी की सुइयों को 10 साल पीछे ले जाएं तो हम पाएंगे कि Geeta Phogat ने इस खेल में वाकई में कमाल का प्रदर्शन किया है।

आप सभी को बता दे कि Geeta लंदन ओलंपिक खेल 2012 में क्वालीफाई करने वाली सबसे पहली भारतीय रेसलर बनीं थीं । Geeta ने टोक्यो 2020.org से बात की और कई विषयों पर अपनी राय व्यक्त की।

शुरूआत कहाँ से हुई...

Tokyo2020.org - आप ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली महिला भारतीय पहलवान हैं। अपने जीवन के सफर के बारे में बताइए। हमने इसे आपकी और आपकी बहन Babita के जीवन पर आधारित फिल्म Dangal में देखा है, लेकिन हम इसे आपके शब्दों में सुनना चाहते हैं।

Geeta – हमने अपनी पसंद से रेसलिंग शुरू नहीं की थी, हमारे पापा चाहते थे कि हम रेसलर बनें और एक दिन ओलंपिक में मेडल जीतें। मेरे पापा भी रेसलर हैं, मेरे दादाजी भी रेसलर थे । उस वक़्त मैट रेसलिंग नहीं थी, मिट्टी पे दंगल होते थे ।

2000 में Karnam Malleswari जी ने जब वेटलिफ्टिंग में मेडल जीता, तो मेरे पापा ने देखा की अख़बारों में, न्यूज़ चैनल में इतना उनका नाम आया, सरकार की तरफ से भी बहुत कुछ मिला। तो मेरे पापा को लगा, 'मेरी भी तो 4 बेटियां हैं, तो क्यों नहीं मैं अपनी बेटियों को गेम में डालू, मेरी बेटियां भी ओलंपिक मेडल जीतेंगी।" तो उन्होंने इस सोच के साथ, हमे रेसलिंग में लगा दि"

'नहीं' मेरे लिए कोई विकल्प नहीं था!

चाहे आप दुनिया में कितना भी नाम क्यों ना कमा लो लेकिन अपने खेल में नाम कमाने के लिए आपको बहुत मेहनत से गुजरना पड़ता है । इसमें कोई शॉर्ट-कट नहीं है। Geeta के लिए भी कहानी कोई अलग नहीं थी । Geeta के लिए शुरुआत बिल्कुल भी आसान नहीं थी, लेकिन उन्हें जल्दी इस बात का एहसास हुआ कि उन्हें क्या करना है और किस प्रकार कठिन परिश्रम करना है।

Tokyo2020.org – शुरुआत में यह कैसा था?

Geeta – कुछ एक हफ्ता अच्छा लगा होगा, लेकिन उसके बाद वह बोलते हैं न पूरे ज़ोर से हार्डवर्क स्टार्ट हो गया था । सुबह 4 बजे उठना, गर्मी के समय 3:30 बजे उठना, सो धीरे धीरे हफ्ते, 10 दिन के बाद ऐसा लगने लगा कि नहीं, नहीं करना यह । लेकिन 'नहीं' का चॉइस ही नहीं था हमारे पास। उस टाइम बस स्कूल जाते, फिर स्कूल से वापिस आना, और फिर ट्रेनिंग।

उस टाइम पिताजी भी कहते थे, या तो अभी कुछ 5-6 साल मेहनत कर लो और फिर पूरी ज़िन्दगी ऐश और आराम करना, या अभी कुछ साल मौज करलो, लेकिन फिर पूरी ज़िन्दगी स्ट्रगल करते रहना। पिताजी की ही बदौलत है, परिवार की बदौलत हैं, जो आज हम यहाँ है।

ओलंपिक के स्थगन ने मुझे वापसी के बारे में सोचने का समय दिया है"

2010 में, Geeta कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं थीं। यह सभी पदक उनके लिए कई वर्षो तक एक यादों की तरह उनके साथ रहे, साल 2015 के दोहा एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने अपना अंतिम मान्यता प्राप्त कांस्य पदक जीता।

32 वर्षीय Geeta जो एक बेबी बॉय की माँ भी हैं जिसे वह "छोटा पहलवान" कहकर भी पुकारती है, उनका ऐसा मानना है कि ओलंपिक का एक साल स्थगित हो जाना उनके पास उनकी वापसी का एक बेहतर मौका लेकर आया है। मौजूदा समय में उनका पूरा ध्यान फिटनेस पर है।

“अभी ओलिंपिक 2021 में स्थगित हो गयी है, देखते हैं फिटनेस के उपर डिपेंड करता है। कोशिश तो बिल्कुल रहेगी। आप जिस भी फ़ील्ड में हों, उसे छोड़ने का मन नहीं करता। और यह है ही ऐसा एक फील्ड, फिटनेस बना के रखनी पड़ती हैं, सेहत के लिए भी अच्छा है। और मेडल जीतना हैं, जब देश का तिरंगा लहराता है ना तब अलग ही खुशी होती है। और मेरे बेटे को भी तो देखना हैं कि उसकी माँ क्या कर सकती है।“

"अपनी बेटियों का समर्थन करें"

Tokyo2020.org – आप दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा रही हैं। आपने बहुत सारी युवा लड़कियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। क्या आप इसके बारे में कुछ कहना चाहती हैं?

Geeta – “हमें भी यह चीज़ हमारे पिताजी से मिली हैं कि कभी डरना नहीं किसी से, जो भी है वो बोल देना है, किसी से दबना नहीं, अकेले लड़ाई लड़ना। मेरे पिताजी ने मुझे बहुत सख्त बनाया यह सब सिखा कर। हमारे समय लड़कियों के लिए उतने टूर्नामेंट होते भी नहीं थे, आज के दौर में तो हर 15 दिन में लड़कियों की दंगल होती हैं, कुश्तियां होती हैं, फिर चाहे कोई भी गांव या शहर हो। उसके अलावा सरकार की तरफ से भी इतने कम्पटीशन होते हैं, U14, U16 , U17 , U23 - इतने सारे टूर्नामेंट्स होते हैं साल में।“

“लेकिन लड़कियों के माता-पिता को मैं यह कहना चाहती हूं कि अपनी बेटियों को आगे लेकर आओ, उन्हें सपोर्ट करना चाहिए, क्योंकि जब परिवार का सपोर्ट मिल जाता है तो वह एक ऐसा सपोर्ट होता है, कि उसके बाद बेटियां कुछ भी कर सकती हैं। बेटियां किसी से कम नहीं हैं, यह सच है।"

Punia, Vinesh ओलंपिक में भारत को गौरवान्वित कर सकते हैं

कुश्ती एक ऐसा खेल है जहाँ भारत का मानना है कि वे टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में बहुत सारे पदक जीत सकते हैं। हालांकि अभी तक कई भारतीय पहलवानों ने टोक्यो गेम्स के लिए क्वालीफाई नहीं किया है, लेकिन Geeta को लगता है कि इस सूची में दो पदक के दावेदार हैं।

“जो क्वालीफाई हो चुके हैं, उनमें से सबसे ज्यादा मुझे उम्मीद है - मैं पक्षपाती हो सकती हूं क्योंकि वह मेरा परिवार है, मेरी चचेरे बहन Vinesh Phogat और Bajrang Punia बहुत अच्छे हैं। सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि वह मेरे परिवार से हैं, बल्कि उनकी परफॉरमेंस और उनका जो फॉर्म हैं, वह भी टॉप लेवल पर है।“

“क्योंकि अब यह स्थगित हुआ है तो मेरी कोशिश जारी रहेगी की मैं हिस्सा ले सकू।“