टोक्यो 2020 में स्वर्ण पर Kidambi Srikanth की निगाहें, कोर्ट पर करेंगे वापसी

भारत के Kidambi Srikanth ने ब्ली-ब्ली इंडोनेशिया ओपन के दूसरे दिन जापान के Kenta Nishimoto से मुकाबला किया । (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
भारत के Kidambi Srikanth ने ब्ली-ब्ली इंडोनेशिया ओपन के दूसरे दिन जापान के Kenta Nishimoto से मुकाबला किया । (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

एक खिलाड़ी का जीवन बहुत तीव्र गति से बदलता है और परिवर्तन इतनी जल्दी होता है कि वह एक क्षण अपने खेल के शिखर पर होता है और एक साल के अंदर ही सब पलट जाता है। किसी भी खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बनाए रखना एक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है।

भारतीय बैडमिंटन सितारे, Kidambi Srikanth अगले साल होने वाले टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में PV Sindhu के बाद सबसे प्रबल दावेदार हैं और उनकी निगाहें सिर्फ स्वर्ण पर है।

अक्टूबर के महीने में शुरू होने वाले डेनमार्क ओपन में भाग लेने वाले Srikanth Kidambi ने Tokyo2020.org से खास बातचीत में अपने तैयारी, ओलंपिक खेलों और लॉकडाउन के बारे में बताया।

विश्व नंबर एक, चोट और ख़राब फॉर्म

साल 2017 में Srikanth अपने जीवन के सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे और उन्होंने चार सुपरसीरीज़ ख़िताब जीत कर विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी होने का दावा पेश किया था। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, Chen Long, Lee Hyun-il और Kenta Nishimoto जैसे बेहतरीन खिलाड़ियों को ध्वस्त कर, Srikanth ने अपनी कुशलता का परिचय समूचे विश्व को दिया।

अप्रैल 2018 में Srikanth ने विश्व नंबर 1 की रैंकिंग हासिल करी और ऐसा करने वाले वह दुसरे पुरुष खिलाड़ी बने। Prakash Padukone और Saina Nehwal के अलावा यह कीर्तिमान अपने नाम करने वाले वह तीसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। बैडमिंटन के शिखर पर उनका समय बहुत कम था और 2017 अक्टूबर में फ्रेंच ओपन जीतने के बाद उन्होंने अभी तक एक भी ख़िताब नहीं जीता हैं। घुटने में चोट और ख़राब फॉर्म के चलते, Srikanth की रैंकिंग में बहुत गिराव आया है पर उन्हें पता है कि गलती कहाँ हुई।

Srikanth ने बताया, 'बैडमिंटन एक ऐसा खेल है जिसमे चोट लगने के बाद वापसी करना और आते ही ख़िताब जीत पाना बहुत मुश्किल होता है। मुझे कहीं न कहीं लगता है मैंने वापसी करने में कुछ जल्दी कर दी और इसी वजह से मैं सर्वोच्च प्रदर्शन नहीं दिखा पाया।'

क्या Srikanth में वह शिखर दोबारा हासिल करने का आत्मविश्वास है?

'मैं विश्व नंबर एक रैंकिंग हासिल कर चुका हूँ और मुझे यकीन है की मैं दोबारा वहां पहुँच सकता हूँ। अपना 2017 का खोया हुआ फॉर्म हासिल करने का मेरा पूरा प्रयास रहेगा और मेरा लक्ष्य उस स्तर से भी अच्छा बैडमिंटन खेलने का होगा।'

फिटनेस, प्रदर्शन और चोट से संघर्ष

इस समय Kidambi Srikanth की विश्व रैंकिंग 14 है, और वह डेनमार्क ओपन की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया की डेनमार्क में खेलना विश्लेषण के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण होगा और अपना फॉर्म वापस लाने के लिए भी अहम होगा।

Srikanth ने कहा, ‘मैं 2017 में बहुत ही अच्छा खेल रहा था पर चोट लगना खेल का भाग है और इसको लेकर आप कुछ कर नहीं सकते। अगर आप वापसी करने के बाद अच्छा भी खेल रहे हों और ख़िताब न जीतें तो उस प्रदर्शन का कोई मायने नहीं होता। पिछले छे महीनों में मैंने अपनी फिटनेस पर काम किया है और अब मुझे स्वस्थ महसूस हो रहा है। अब मेरा लक्ष्य है की ओलंपिक खेलों के पहले कई प्रतियोगिताओं में भाग लूँ।'

फॉर्म में गिरावट आना और टॉप दस खिलाड़ियों के खिलाफ ख़राब प्रदर्शन, Kidambi Srikanth के लिए चिंता का विषय ज़रूर हैं लेकिन वह जानते हैं की अगर किसी भी बैडमिंटन खिलाड़ी के लिए घुटने की चोट के बाद वापसी करना बहुत मुश्किल होता है।

Srikanth कहते हैं, ‘अगर आप घुटने की बात करें तो वह एक बैडमिंटन खिलाड़ी के प्रदर्शन में बहुत महत्वपूर्ण होता है और आपका खेल उसके ऊपर बहुत निर्भर करता है। चाहे वह ड्रॉप शॉट हो या स्मैश, आपका घुटना हमेशा चलता रहता है और इसी वजह से घुटनों पर बहुत दबाव बनता है। मेरा खेल बहुत आक्रामक है और पॉइंट्स जीतने के लिए मुझे अपने घुटनों पर दबाव डालना पड़ता है। मुझे अपने घुटने को ठीक होने के लिए और समय देना चाहिए था।'

कैसे बीता Kidambi Srikanth का लॉकडाउन?

कोरोना महामारी के कारण लागू किये गए लॉकडाउन Srikanth का घुटना तो ठीक हुआ ही, साथ ही उन्हें अपने परिवार के साथ रहने का, सोने का और पब्जी खेलने का भी मौका मिला। पूरे देश में लॉकडाउन लागू होने के कुछ दिन पहले ही वह गुंटूर स्थित अपने घर पहुँच गए थे और जुलाई के अंत तक वहीँ रहे। आपको जान कर हैरानी होगी की उन्होंने दो हफ्ते खाने और सोने के अलावा कुछ नहीं किया।

Srikanth ने हस्ते हुए बताया, 'लॉकडाउन की शुरुआत में मैं सुबह उठता था और नाश्ता करने के बाद फिर सो जाता था। दिन में उठा, खाना खाया और सो गया फिर शाम को उठने के बाद रात का खाना खाया और सो गया।'

'मेरी सोने की क्षमता काफी ज़्यादा है और मुझे सोने के लिए प्रयास करने की ज़रुरत नहीं होती।'

क्या उन्हें वज़न बढ़ने का डर नहीं था? इसका जवाब देते हुए Srikanth ने कहा, 'मेरा सौभाग्य है की मैं चाहे जितना भी खा लूँ, वज़न नहीं बढ़ता और मेरे लिए यह एक लाभदायक बात है। लेकिन दो सप्ताह बाद मैंने अपनी फिटनेस पर ध्यान देना शुरू कर दिया।'

टोक्यो में स्वर्ण पर नज़र

अगले साल होने वाले ओलंपिक खेलों से पहले Kidambi Srikanth जितनी हो सकते उतनी प्रतियोगिताएं खेलना चाहते हैं। Kento Momota, Anders Antonsen, Chou Tien Chen और Anthony Ginting जैसे नए सितारों के बीच, Srikanth के लिए स्वर्ण जीतना आसान नहीं होगा लेकिन उनकी मानें तो यह असंभव भी नहीं है।

'मेरा लक्ष्य टोक्यो 2020 में स्वर्ण जीतना है और अगर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखा सकूँ तो पदक जीतने की मेरी दावेदारी और मज़बूत हो जाएगी।'

Srikanth में 2017 का अपना प्रदर्शन और टोक्यो में स्वर्ण जीतने का जूनून है और अगले महीने डेनमार्क में होने वाली प्रतियोगिता के साथ वह अपना जापान तक का सफर शुरू करेंगे।