स्वर्ण नहीं तो कुछ नहीं, Bajrang Punia रचना चाहते हैं टोक्यो ओलिंपिक खेलों में इतिहास

भारतीय पहलवान Bajrang Punia 2018 कामनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद ख़ुशी मनाते हुए।
भारतीय पहलवान Bajrang Punia 2018 कामनवेल्थ खेलों में स्वर्ण जीतने के बाद ख़ुशी मनाते हुए।

टोक्यो 2020 से एक खास बातचीत में उन्होंने अपने जीवन, सोशल मीडिया और ओलिंपिक स्वर्ण के लक्ष्य के बारे में बताया।

साल था 2016 और भारत के लिए रियो ओलिंपिक खेलों में Yogeshwar Dutt फ्रीस्टाइल कुश्ती के 65 किग्रा वर्ग में भाग ले रहे थे। पहले राउंड में Yogeshwar का मुकाबला मंगोलिया के Ganzorigiina Mandakhnaran से हुआ और वह हार गए। पूरे देश को हरयाणा के इस दिग्गज पहलवान से बहुत उम्मीदें थी लेकिन भारत में बैठे 21 वर्षीय Bajrang Punia को थोड़ी ज़्यादा निराशा हुई। उस समय भारत के इस युवा पहलवान के पास ओलिंपिक खेलों में भाग लेने का अवसर था लेकिन Yogeshwar को अपना गुरु मानने वाले Bajrang ने रिश्तों को ज़्यादा महत्त्व देते हुए यह मौका जाने दिया।

रियो ओलिंपिक खेलों के बाद Bajrang ने टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों को अपना लक्ष्य बना लिया और उनकी एकाग्रता का एक छोटा सा प्रतीक है उनके व्हाट्सएप पर लगी फोटो जिसमे ओलिंपिक स्वर्ण पदक है। पिछले चार सालों में यह फोटो न बदली गयी है और ऐसा करने का Bajrang Punia का अगले पांच महीनों तक कोई इरादा नहीं है।

टोक्यो 2020 से बात करते हुए उन्होंने कहा, "साल 2016 के ओलिंपिक खेलों के बाद मैंने यह तस्वीर लगायी थी और आज तक नहीं बदली है। इसके पीछे का कारण सरल है और वह है की यह फोटो मुझे मेरे लक्ष्य की याद दिलाती है। मेरा एक ही लक्ष्य है - ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतना - और मैं उसके लिए लगातार मेहनत कर रहा हूँ।

हर खिलाड़ी का सपना होता है ओलिंपिक खेलों में अपने देश के लिए स्वर्ण जीतना और मेरा भी है। साल 2016 में मैं रियो ओलिंपिक खेलों में मैं भाग नहीं ले पाया था क्योंकि Yogi भाई मेरे भार वर्ग में थे और इसलिए मैंने टोक्यो 2020 खेलों को अपना लक्ष्य बनाया। यह फोटो अब टोक्यो ओलिंपिक खेलों के बाद ही बदलेगी।"

भारत के इतिहास में कई महान पहलवान रहे हैं लेकिन बहुत ही कम ऐसे हैं जो Bajrang के कौशल और लोकप्रियता का मुकाबला कर पाएं। हरयाणा के इस पहलवान की आयु भले ही सिर्फ 27 साल हो लेकिन पूरे विश्व में Bajrang Punia पहलवानी के लोकप्रिय नामों में से एक हैं। उनकी कुश्ती का तरीका, मैट पर उनके पैंतरे और विनम्र स्वभाव की सब प्रशंसा करते हैं।

विश्व चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ खेल, एशियाई खेल और एशियाई चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले Bajrang Punia साल 2021 में होने वाले टोक्यो ओलिंपिक खेल उनके जीवन के पहले होंगे और वह भारत के लिए पदक जीतने के सबसे प्रबल दावेदारों में से एक हैं। साल 2020 सबके लिए कठिन रहा और बहुत सारे खिलाड़ी जो टोक्यो ओलिंपिक खेलों में भाग लेने की तैयारी कर रहे थे वह घर पर ही बंद रह गए लेकिन Bajrang का पालसफा इस बात को लेकर साफ़ था।

उन्होंने कहा, "अगर जीवित रहते तो ओलिंपिक खेलों में भाग ले ही लेते। अपनी जान बचाना और जीवित रहना उस समय ज़्यादा ज़रूरी था। खिलाड़ी होने के नाते दुःख ज़रूर हुआ था लेकिन मुझे इस बात की ख़ुशी थी की एक साल अतिरिक्त मिला अपनी कमियों को सुधारने के लिए।"

जिस सरलता से Bajrang जीवन की बड़ी बातों को संक्षेप में कह देते हैं वह काफी अद्भुत है।

कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने सबको घर पर रहने को मज़बूर कर दिया लेकिन जब स्थिति में थोड़ा सुधार आया तो Bajrang अभ्यास के लिए अमरीका गए थे।

अमरीका में अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "लॉकडाउन के बाद हम कहीं बाहर खेलने नहीं गए थे और अमरीका में हम सुबह शाम दोनों समय अभ्यास करते थे। जिस विश्वविद्यालय में मैं अभ्यास कर रहा था वह कोरोना को लेकर बहुत सतर्क थे और हर रोज़ जाने से पहले हमारा टेस्ट होता था। वहां पर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करने का मौका मिलता था और इसका बहुत फायदा मुझे हुआ। मेरा लक्ष्य था अपने खेल को लॉकडाउन के बाद सुधारना और अमरीका में खेलने से मेरी काफी सहायता हुई।"

अमरीका में बिताये समय और वहां की गयी मेहनत का परिणाम Bajrang को मार्च में आयोजित हुई प्रतियोगिता में दिखा जब उन्होंने आसानी से रोम रैंकिंग श्रृंखला में आसानी से स्वर्ण जीत लिया और पूरे विश्व को एक बार फिर अपने कौशल का परिचय दिया। स्वर्ण पदक के मुकाबले में Bajrang का सामना मंगोलिया के Tulga Tumur Ochir से हुआ और शुरुआत में वह पीछे हो गए लेकिन भारत के नंबर एक पहलवान ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया।

आधुनिकता और तकनीकी बढ़त लेना ज़्यादातर खिलाड़ियों के लिए 21वीं सदी में स्वाभाविक है लेकिन Bajrang उन पहलवानों में से हैं जो आज भी दूध और घी जैसी घर की बनी हुई चीज़ों का सेवन करते हैं। विनम्रता, आदर और कड़ी कुछ ऐसे सिद्धांत और धारणाएं हैं जिनके ऊपर Bajrang Punia की पहलवानी टिकी हुई है। चाहे परिवार हो या गुरु का आशीर्वाद, Bajrang के लिए सब बहुत ज़रूरी है।

मिट्टी के अखाड़ों से अपनी पहलवानी शुरू करने वाले Bajrang Punia आज विश्व कुश्ती के शिखर पर हैं लेकिन उनकी शुरुआत बहुत ही सरल परिस्थितियों में हुई थी। उन्हें अपने बचपन का वह समय याद है जब अखाड़े में दंगल लड़ने के लिए उन्हें एक रुपए मिलता था या कुछ दर्शक उन्हें खाने के लिए फल देते थे। अब Bajrang विश्व के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक हैं लेकिन वह अपने परिवार के सहयोग और दोस्तों को महत्त्व आज भी नहीं भूले हैं।

"जब मिटटी में खेलते थे तो कभी सेब कभी संतरा या दो रुपया मिलता था। मैंने मिट्टी में खेलना 2015 के बाद बंद किया क्योंकि मैट पर गेम बहुत तेज़ चलती है। अपने अंदर की सारी शक्ति मैट पर आपको छह मिनट के अंदर लगानी होती है और यह थोड़ा कठिन भी होता है।"

दोस्तों और परिवार के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे हमेशा से ही मेरे परिवार का सहयोग मिला है और मेरे दोस्तों ने कभी भी मुझसे नकारात्मक बात नहीं करि। चाहे मेरा परिवार हो या मेरे दोस्त, सब लोगों ने मुझे जीतने का आत्मविश्वास दिलाया है।"

सोशल मीडिया, टोक्यो और Takuto Otoguro

मार्च 2021 के पहले दिन Bajrang Punia ने एक ट्वीट के ज़रिये यह घोषणा करि की वह सोशल मीडिया को कुछ समय के लिए बंद कर रहे हैं। टोक्यो ओलिंपिक खेलों के लगभग पांच महीने पहले लिया गया यह निर्णय Punia के लिए बहुत ज़रूरी था और इसके पीछे का कारण उन्होंने साफ़ शब्दों में बताया।

"सोशल मीडिया एक ऐसी चीज़ है जो आपके जीवन को बहुत प्रभावित करती है और आज के समय में इसका महत्त्व बढ़ता जा रहा है। जब सोशल मीडिया पर हम ज़्यादा सक्रीय रहते हैं तो ज़्यादा परेशान भी रहते हैं। मेरे पास जब खली समय था लॉकडाउन में मैं सोशल मीडिया पर सक्रीय था लेकिन अब ओलिंपिक खेल पास आ रहे हैं और मैंने यह निर्णय लिया की मैं यह सब छोड़ कर जो मेरे अंदर कमियां हैं वह अभ्यास में सुधारूंगा। सोशल मीडिया ज़रूरी नहीं है और यह हम बाद में भी कर सकते हैं।"

लक्ष्य के प्रति इतना दृढ निश्चय रखने वाले Bajrang को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए विदेश जाना तो अच्छा लगता है लेकिन वहां घूमना उनके लिए ज़रूरी नहीं है। उनका एक मात्र लक्ष्य प्रतियोगिता में जीत और स्वर्ण पदक होता है।

Bajrang फ्रीस्टाइल कुश्ती के 65 किग्रा वर्ग में विश्व के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों में से एक हैं लेकिन विश्व चैंपियन रह चुके जापान के Takuto Otoguro आने वाले टोक्यो खेलों में उनके और स्वर्ण के बीच की सबसे बड़ी बाधा हैं। जापान के इस धुरंधर पहलवान से Bajrang का सामना दो बार हुआ है और दोनों मुकाबलों में Otoguro ने जीत हासिल करि है।

इस मुकाबले और चुनौती के बारे में बात करते हुए, Bajrang ने कहा, "Otoguro अच्छा खिलाड़ी है और उसने मुझे दोनों बाउट में हराया है लेकिन मैं अपनी कमियों पर काम कर रहा हूँ। सिर्फ Otoguro को हराने के लक्ष्य से मैं ओलिंपिक खेलों के लिए तैयारी नहीं कर रहा और उस प्रतियोगिता में कई शानदार खिलाड़ी होंगे। अगर मेरा स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला Otoguro से हुआ तो मैं उसके लिए बिलकुल तैयार हूँ।"

पांच साल पहले Bajrang Punia ने टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने को अपना लक्ष्य बनाया था और अब विश्व की सबसे बड़ी खेल प्रतियोगिता में पांच महीने से भी कम समय है। उनके व्हाट्सएप की फोटो में ओलिंपिक स्वर्ण तो है लेकिन वह खुद नहीं हैं। जुलाई-अगस्त में जब वह ओलिंपिक मैट पर उतरेंगे तो 100 करोड़ भारतीयों की आशाओं को अपने कन्धों पर रख कर और मिट्टी में जीते हुए उस एक रूपए की याद उनके दिमाग में ताज़ा होगी। क्या वह फ़ोन की फोटो बदलेगी? अगस्त में मिलेगा जवाब।