‘में दबाव में अच्छा प्रदर्शन करता हूँ’ - घुड़सवार Fouaad Mirza ने एक विशेष बातचीत में किया खुलासा

Fouaad Mirza
Fouaad Mirza

घुड़सवारी का खेल यूरोप में काफी प्रसिद्ध हो सकता है, लेकिन भारत में, इसके बारे में अभी भी काफी बात की जानी बाकी है।

Fouaad Mirza एक भारतीय घुड़सवार है, जो देश के इतिहास में दो दशकों में, टोक्यो ओलंपिक खेलों 2020 के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले खिलाड़ी है।

2018 एशियाई खेलों में, Mirza ने व्यक्तिगत और टीम दोनों स्पर्धाओं में दो रजत पदक जीते थे - 1982 के बाद से यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय।

इस बीच, उन्होंने अक्टूबर 2019 में पोलैंड के Strzegom में आयोजित CCI3 * -S इवेंट में स्वर्ण पदक भी जीता था।

इतना ही नहीं, बल्कि बेंगलुरु के इस घुड़सवार को भारत सरकार द्वारा उसी वर्ष अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

Tokyo2020.org के साथ एक विशेष इंटरव्यू में, भारतीय घुड़सवार ने बहुत सी चीजों पर बात की - जिसमें उनकी योग्यता, उनके घोड़े के साथ संबंध, वह खेलों से क्या अपेक्षा रखते हैं और इन कठिन समय के दौरान वह कैसे खुद की देखभाल कर रहे हैं।

Tokyo2020.org - घुड़सवारी के खेल के लिए आपका जुनून कैसे शुरू हुआ? इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आपने इस खेल में आने का विचार कैसे किया?

Fouaad Mirza - यह कुछ ऐसा था जो मैंने खुद चुना। इस खेल को खेलने का फैसला केवल मेरा था, किसी ने मुझ पर दवाब नहीं डाला था। यह कुछ ऐसा था जिसकी तरफ में शुरू से आकर्षित था। मेरे पास शायद शब्द भी नहीं हैं समझाने के लिए। मेरा बचपन घोड़ों को देखते हुए और उनके साथ समय बिताते हुए ही निकला, डिनर टेबल पर भी सिर्फ इसी के बारे में बात होती थी। मैंने इंग्लैंड की Northampton University में पढ़ाई पूरी की। जब में वहां पढ़ भी रहा था, तो मुझे पता था की इसके बाद मेरे को क्या करना है। में हमेशा से घुड़सवारी करना चाहता था। और बाद में मेरे पास मेरे सपनों को पूरा करने का मौका आया और मैंने इससे जाने नहीं दिया।

Fouaad Mirza
Fouaad Mirza

Tokyo2020.org - आप पहले भारतीय हो जिन्होंने 20 साल में पहली बार घुड़सवारी में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। आपको कैसा महसूस होता है?

Fouaad Mirza - मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ था, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन यह पूरी यात्रा का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। मैं इस समय वहां जाने और ओलंपिक में अपना अच्छा प्रदर्शन करने में अपना ध्यान केंद्रित कर रहा हूं । मेरी कुछ आदत ही ऐसी है, में चीज़ों को स्वीकार जरूर करता हूं लेकिन उन्हें अपने दिमाग में चढ़ने नहीं देता।

Tokyo2020.org - आप कई रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत में घुड़सवारी के खेल का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। इसके बारे में आपका क्या कहना है, और आपको उन लोगों से क्या कहना है जो आपके नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं?

Fouaad Mirza - मैं कहूंगा की चलते रहे, रुके नहीं। यह खेल आसान नहीं है और भारत में इसकी स्तिथि अब आगे से बेहतर हो रही है । इस खेल में लोग अपना भविष्य जरूर बना सकते है। मेरे केस में भी, में अभी सोच रहा था की, 'हाँ, अब में ओलंपिक में जाऊंगा, पर उसके बाद क्या? इस खेल को अभी इस देश में काफी और प्रसिद्ध होना है, तो देखे क्या होता है। उन लोगों से मैं कहना चाहूंगा जो इस खेल में आना चाहते है या जिन के दिमाग में वह सवाल आये थे जो उस वक़्त मेरे दिमाग में आये थे की - क्या यह खेल में सारी उम्र खेल सकता हूं, या में बस तभी तक खेल सकता हूं जब तक में जवान हूं? - आप सोचें ना और आगे बढ़े। भविष्य बहुत अच्छा होने वाला है।

Tokyo2020.org - आपकी पहली ओलंपिक को स्थगित कर दिया गया है। क्वालीफाई करने से लेकर, यह पता लगाने तक अब खेलों को अगले साल आयोजित किया जाएगा - अपने इस सफर के बारे में अपने विचार साझा करें?

Fouaad Mirza - मैं सच कहूं तो मेरे को धक्का लगा था यह जान के, पर अंत में, यह जरूरी है की आप हर चीज़ की पॉजिटिव साइड देखे। पिछले साल मेरा सबसे पसंदीदा घोड़ा, Seigneur Medicott घायल हो गया था। वह एक बहुत की टैलेंटेड घोड़ा है, और ओलंपिक खेलों में वही में घोड़ा होता। और भी घोड़े अच्छे है पर वह उन् सब से बेहतर है। चोट के कारण उसने पिछला पूरा सीजन मिस किया पर अब वो धीरे धीरे ठीक हो रहा है और ट्रैनिंग भी कर रहा है। उससे पूरी तरह से ठीक होने में अभी वक़्त लगेगा। तो मैं कहूंगा की खेलों का स्थगित होना मेरे लिए उतना भी बुरा नहीं है।

Tokyo2020.org - हमें अपने घोड़े के साथ अपने संबंध के बारे में बताएं। उसके साथ आपका रिश्ता कैसा है?

Fouaad Mirza - हर एक राइडर अलग होता है, और में एक राइडर हूं जो घोड़ों को जानना चाहता हूं। उनके साथ समय बिता कर की में अपने समभंद उनके साथ अच्छे करता हूं। मैंने उन सभी को कुछ उपनाम भी दिए है, और अगर उन्हें उन नामों से बुलाओ तो उन्हें अच्छा लगता है। मेरे लिए वह सब स्टेबल में एक नंबर नहीं है बल्कि एक प्रत्येक व्यक्ति हैं, और मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है।

मुझे लगता है हमारा खेल एक अनोखा खेल है क्यूंकि घोड़ा एक ऐसा जानवर हैं जिससे आप कुछ भी ज़बरदस्ती नहीं करवा सकते। यह तभी काम करेगा जब आपका रिश्ता इसके साथ अच्छा होगा। वह वास्तव में हमारे लिए बहुत कुछ करते है, हम पर बहुत भरोसा करते

Tokyo2020.org - क्या आपको लगता है कि अगर आप अगले साल खेलों में सफल होते हैं, तो खेल के रूप में घुड़सवारी भारत में और प्रसिद्ध होगा?

Fouaad Mirza - मैं निश्चित रूप से वहां जाके अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और यह सब इस बात पर निर्भर करता हैं स्थिति तब कैसे होती है, पर में अपने आप को एक मौका जरूर दूंगा। में यह कहना चाहता हूं की हम वहां जायेंगे और जीतेंगे, पर देखते है 12 महीने बाद क्या होता है। मुझे लगता है मुझे दबाव की जरूरत है, जब में दबाव में होता हूं, में अच्छा प्रदर्शन करता हूं। उस टाइम में खेल पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करता हूं।है

Fouaad Mirza अपने  घोड़े के साथ
Fouaad Mirza अपने घोड़े के साथ

Tokyo2020.org - COVID 19 ने दुनिया को काफी प्रभावित किया है। आप खुद जर्मनी में हैं, तालाबंदी के तहत कई देशों में से एक। आप अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल कैसे कर रहे हैं?

Fouaad Mirza - यह सभी के लिए काफी मुश्किल है, कई लोगों के लिए शायद थोड़ा जयदा। मेरे केस में, मैं बहुत भाग्यशाली हूं। में अपने घोड़ो से करीब 30 मीटर की दुरी पर रहता हूं, तो यही कारण है मुझे ट्रैनिंग करने में जयदा परेशानी नहीं आती। और इसी वजह से में अपने घोड़ो का ख्याल भी अच्छे से रख सकता हूं। मेरा सारा दिन इसी में निकल जाता है।

में सुबह ही ट्रैनिंग करना शुरू कर देता हूं और शाम करीब 6 - 6:30 तक करता हूं। फिर रात में 9-10 दोबारा से स्टेबल पर वापिस जाता हूं यह देखने की सब ठीक है या नहीं। क्या घोड़ी ने अच्छे से खाना खाया या नहीं। तो में कहूंगा मेरे लिए कुछ जयदा बदला नहीं। हर दिन की मेरी यही दिनचर्या रहती है और में बहुत भाग्यशाली महसूस करता हूं।

मुझे बहार जाके ट्रैन करने की जरूरत नहीं पड़ती क्यूंकि सब कुछ मेरे पास है, में बहुत लकी हूं इस मामले में। मैं जर्मनी के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में रहता हूं (Bergedorf, Ganderkesee), और जर्मनी का यह दक्षिण क्षेत्र है जहाँ इस महामारी का जयदा प्रभाव पढ़ा है। जिस गॉंव में मैं रहता हुईं वहां लोग वैसे बहुत काम है, तो यहाँ सोशल डिस्टन्सिंग आम बात है।