चोट से ठीक होने के बाद मुक्केबाज़ Manish Kaushik राष्ट्रिय कैम्प में लेंगे भाग 

MANISH

अगले साले होने वाले टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करना अभी भी Kaushik का सपना।

कोरोना महामारी के कारण लगी पाबंदियों ने खेल कार्यों को काफी समय तक स्थगित कर दिया था लेकिन टोक्यो 2020 के दृष्टिकोण से कुछ खेलों के राष्ट्रीय कैम्प आरम्भ हो चुकें हैं और मुक्केबाज़ी उनमे से एक है। पटियाला में हो रहे इस मुक्केबाज़ी कैम्प पर Manish Kaushik कि नज़र है और वह उम्मीद करते हैं कि अगले महीने बाकी खिलाड़ियों के साथ इसका हिस्सा बनेंगे।

चोट से ठीक होने का प्रतीक्षा

Kaushik को बाज़ू में लगी एक चोट के कारण राष्ट्रीय कैम्प में सीधा प्रवेश नहीं मिल पाया था और पुणे में स्थित आर्मी खेल संस्था में इस समय अभ्यास कर रहे हैं। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद से वह पुणे में ही थे और अब आशा करते हैं की अगले महीने कैम्प में भाग लेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा हूँ और जबसे लॉकडाउन में थोड़ी ढिलाई दी गयी तो मैं यहाँ आ गया था। अब मैं आशा करता हूँ की अगले महीने कैम्प में शामिल हो सकूंगा।"

टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेल में विलंब होने के कारण Kaushik को एक जीवनदान मिला है क्योंकि उन्हें अम्मान में आयोजित एशिया और ओशिनिया क्वालीफाइंग मुकाबलों में चोटिल हो गए थे। एक मैच के दौरान उन्हें बाज़ू में चोट लग गयी और उन्हें लगा कि वह ओलिंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाएंगे।

ओलिंपिक सपने को पूरा करने का लक्ष्य

जब अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति ने ओलिंपिक खेलों को विलंबित कर दिया तो Kaushik को दूसरा मौका मिला। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर ओलिंपिक खेल अपनी मूल योजना के अनुसार आयोजित होते तो मेरे लिए बहुत मुश्किल होता लेकिन यह विलंब मेरे लिए सौभाग्यपूर्ण रहा है।"

लॉकडाउन में कड़ी मेहनत करते हुए Kaushik ने अपने वज़न पर ध्यान रखा और अपने प्रतिद्वंदियों के खेल पर भी नज़र बनाये रखी। अपनी चोट से जल्दी ठीक होने के लिए उन्होंने विशेषज्ञों की भी सहायता ली और अपने स्वास्थय को सुधारने का पूरा प्रयास किया।

उन्होंने बताया, "ओलिंपिक खेलों में अभी थोड़ा समय बाकी है और मैं मेहनत करता रहूँगा। बहुत सारे खिलाड़ी ओलिंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करते हैं लेकिन दो ही मुक्केबाज़ आज तक पदक जीत पाए हैं और मेरा लक्ष्य वह तीसरा खिलाड़ी बनना है। मैंने अपना वज़न वर्ग अभी कुछ समय पहले ही बदला है और उसके लिए मेहनत करना बहुत ज़रूरी है।"

भारत के लिए ओलिंपिक खेलों में सिर्फ दो मुक्केबाज़ों ने पदक जीते हैं और Vijender Singh अथवा Mary Kom के बाद वह तीसरे पदक विजेता बनना चाहते हैं। अगले साल होने वाली एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप Kaushik के लिए महत्वपूर्ण होगी और वह आशा करेंगे कि भाग ले सकें।