अतीत को जाने - पानी में खून

Erwin Zador न्यूयॉर्क शहर में 5th Annual Tribeca Film Festival के दौरान फिल्म Freedom's Fury के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस में भाग लेते हैं।
Erwin Zador न्यूयॉर्क शहर में 5th Annual Tribeca Film Festival के दौरान फिल्म "Freedom's Fury" के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस में भाग लेते हैं।

ओलंपिक खेल चैंपियन, रिकॉर्ड और अद्भुत कहानियों से भरे हुए हैं, लेकिन इसके अलावा, कुछ याद रखने वाले अजीब, मजाकिया, भावनात्मक और दुखद क्षण भी शामिल हैं। हम हर हफ्ते आपके लिए कुछ कहानियाँ लाएँगे जो या तो आपके चेहरे पर मुस्कान लाएँगी या आपको रुला देंगी। इस हफ्ते: मेलबोर्न के पानी में खून।

जब मेलबर्न ओलंपिक 1956 शुरू हुआ, तो हंगरी पहले से ही वाटर पोलो में एक पावरहाउस था। 1928 के Amsterdam ओलंपिक में सफल होने के अलावा, उन्होंने 1932, 1936 और 1952 खेलों में तीन गोल्ड मैडल जीते थे । USSR भी उस वर्ष काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन यह मैच का राजनीतिक संदर्भ था जिसने चीज़ों को रोमांचक बनाया।

नवंबर 1956 की शुरुआत में, सोवियत संघ ने बुडापेस्ट में एक छात्र विरोध का दमन किया, जिससे दोनों देशों के बीच बेहद तनावपूर्ण संबंध बन गए। उसी दौरान हंगरी की टीम, जो उस वक़्त पहाड़ों पे खेलों की तैयारी कर रही थी, ने एक गोली की आवाज़ सुनी। बादमे उन्हें उन सब की सुरक्षा के लिए चेकोस्लोवाकिया ले जाया गया.

मैच

मेलबोर्न में एक महीने बाद, हंगरी की टीम ने अपने सभी विरोधियों को आराम से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। उन्होंने इस प्रक्रिया में 20 गोल किए और केवल तीन गोल खाए। सोवियत टीम को हालांकि पहले दौर में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन यह पांच मैचों में Petre Mshvenieradze के नौ गोल थे जिसने उन्हें टूर्नामेंट में आगे बढ़ने में मदद की। ऐसा लग रहा था कि इन दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल का मुबाकल एक यादगार मुकाबला होगा, लेकिन मैच शुरू होने से पहले तनाव काफी ज्यादा था।

हालाँकि मैच शुरू से पहले, हंगरी के कप्तान Dezso Gyarmati ने सोवियत के कप्तान से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। हंगरी ने एक बहुत शानदार शुरुआत की, जिसमें Gyarmati ने खेल में जल्दी से स्कोर किया। जल्द ही, हंगरी की टीम 4-0 की बढ़त के साथ सोवियत टीम पर हावी थी। लेकिन पूल के भीतर तनाव बढ़ रहा था, जिसमें कई बेईमानी हुई और मुक्कों का आदान-प्रदान भी हुआ।

आइकॉनिक तस्वीर

मैच समाप्त होने से एक मिनट पहले, सोवियत के Valentin Prokopov ने हंगरी के Erwin Zador के गाल पर एक मुक्का मारा, और हर जगह उसका खून बिखरा गया। Zador को स्विमिंग पूल से बाहर निकाला गया, जहां एक पूल-साइड फोटोग्राफर ने उनके खूनी चेहरे का एक शॉट लिया। यह एक ऐसी तस्वीर है जो खेलों के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित चित्रों में से एक बन गई है। उस वक़्त भीड़ उग्र थी, मैच रद्द कर दिया गया और हंगरी को विजेता घोषित किया गया।

परिणाम

कुछ दिनों बाद, हंगरी ने यूगोस्लाविया के खिलाफ फाइनल जीता - 1952 में हेलसिंकी में उन्होंने जो खिताब जीता था, उसे बरकरार रखा। "पानी में खून", जैसा कि मीडिया द्वारा उपनाम दिया गया था - इस मैच का इतिहास कई सालों तक सभी को बताया गया था। यह ओलंपिक खेलों के महान क्षणों में से एक बन गया। 50 साल बाद, इस पर 'Freedom's Fury' नाम की एक फ़िल्म बनाई गई।

ओलंपिक वॉटर पोलो का कठिन निर्णय
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