Billy Mills: वो धावक जिसने सामाजिक चुनौतियों को परास्त कर जीता ओलंपिक स्वर्ण

अमेरिका के William Mills टोक्यो 1964 ओलिंपिक खेलों की 10000 मी दौड़ को जीतते हुए।
अमेरिका के William Mills टोक्यो 1964 ओलिंपिक खेलों की 10000 मी दौड़ को जीतते हुए।

वर्ष 1964 के अक्टूबर महीने में टोक्यो ने पहली बार ओलिंपिक खेलों की मेज़बानी करि थी और हम आपको बताएंगे उस प्रतियोगिता के कुछ ऐतिहासिक क्षण जो 56 साल बाद आज भी याद किये जाते हैं। इस बार हम आपको बताएंगे Billy Mills के बारे में और उनके अद्भुत 10000 मी दौड़ की स्वर्ण पदक विजय के बारे में।

पहले की कहानी

Billy Mills एक ऐसे व्यक्ति थे जिनसे किसी ने उम्मीद नहीं करि थी वह ओलंपिक खेलों में पदक जीतेंगे लेकिन जब वह टोक्यो से 1964 में वापस आये, वह विश्व के सर्वश्रेष्ठ सितारों में से एक बन चुके थे। इतना ही नहीं, Mills ने पूरे विश्व में मानवीय कार्यों और सामाजिक न्याय के लिए आवाज़ उठाई।

ओगलाला लकोटा जनजाति के बाशिंदे Mills का बचपन गरीबी में बीता और उन्होंने बहुत छोटी आयु में अपने माता पिता को खो दिया था। कठिनाइयों से गुज़र रहे Mills को खेल के रूप में एक सहारा मिला और उन्होंने धावक बनने का निश्चय किया। उन्होंने कैनसस विश्वविद्याल से एथलेटिक्स में छात्रवृत्ति हासिल करि और तीन बार एनसीएए क्रॉस कंट्री दौड़ के विजेता बने।

एक बेहद शानदार धावक होने के बाद भी Mills को जाति पक्षपात का सामना करना पड़ा और इससे उनके खेल पर काफी असर हुआ जिसके कारण उन्हें आत्महत्या का भी विचार आया। लेकिन Mills ने हार नहीं मानी और अपने आलोचकों को परास्त करने के लिए अपना लक्ष्य सुनिश्चित कर लिया। उन्होंने ठान लिया की ओलंपिक खेलों की 10000 मी दौड़ में स्वर्ण जीतेंगे।

अमेरीका के मरीन्स में अफसर बनने के बाद Mills ने ओलंपिक खेलों की 10000 मी दौड़ और मैराथन प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बना ली।।

अहम् क्षण

ओलंपिक खेलों के कुछ समय पहले Mills को एक बहुत बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा और उन्हें पता चला कि वह डायबिटीज के रोगी हैं जिसके कारण उनकी दौड़ पर गहरा असर पड़ रहा था।

चाहे कोई भी कठिनाई रही हो, Mills अपने ओलिंपिक सपने पर नज़र बनाये रहे और मेहनत करते रहे। उन्होंने अपने अभ्यास को भी बदला और आंतरिक बल बढ़ाने के लिए कड़ा प्रयास किया।

कड़े अभ्यास और दृढ निश्चय के साथ Mills जब 1964 में टोक्यो पहुंचे तो उनका आत्मविश्वास बहुत उच्च स्तर पर था।

सारे विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों की निगाहें ऑस्ट्रेलिया के विश्व रिकॉर्ड धारक Ron Clarke और 1963 मेडिटरेनीयन खेलों में 10000 मी की दौड़ जीतने वाले Mohammed Gammoudi पर थीं।

जब दौड़ शुरू हुई तो Clarke ने बढ़त बना ली और Mills के साथ अन्य धावक भी उनकी गति का मुकाबला नही कर पा रहे थे लेकिन जब 5000 मीटर की दूरी पार हुई तो एक बहुत एहम बदलाव आया। Mills को अपनी गति मिली और कुछ क्षणों के लिए बढ़त बना ली लेकिन Clarke फिर आगे निकल गए।

दौड़ के आखरी दो लैप में सिर्फ चार धावक स्वर्ण जीतने के दावेदार थे और Mills उनमें से एक थे। Mills का मुकाबला Clarke से था और Gammoudi उन दोनों के पीछे थे।

अंतिम लैप में दौड़ पहुँच चुकी थी और Mills ने Clarke को थोड़ी देर के लिए पछाड़ दिया पर यह कामयाबी बहुत कम समय के लिए था। Mills को Clarke का हाथ लगा और उनका संतुलन बिगड़ गया जिसकी वजह से वह तीसरे नंबर पर पहुँच गए।

Mills ने जीवन में कभी भी हार नहीं मानी थी और ओलंपिक खेलों में भी ऐसा ही कुछ हुआ। उन्होंने अपने आप को प्रोत्साहित किया और विश्वास दिलाया की आखरी 50 मीटर में अगर पूरा ज़ोर लगा दें तो स्वर्ण उन्ही का होगा।

दौड़ के आखरी कुछ क्षणों में Clarke और Gammoudi को पछाड़ते हुए अंतिम रेखा पर करि और स्वर्ण अपने नाम कर लिया। Mills ने 28:24:4 के समय के साथ एक नया ओलंपिक रिकॉर्ड स्स्थापित किया।

ओलंपियन Billy Mills के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama (Chip Somodevilla/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
ओलंपियन Billy Mills के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama (Chip Somodevilla/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2013 Getty Images

आगे क्या हुआ

अगर आप Mills से पूछेंगे तो वह आपको बताएंगे की उन्होंने ओलंपिक खेलों की एक प्रतियोगिता के अंदर दो मुकाबलों का सामना किया।

वर्ल्ड एथलेटिक्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने अपने आप से दौड़ के समय कहा कि मैं जीत तो जाऊंगा लेकिन शायद अंतिम रेखा पर पहले न पहुँच पाऊं।'

एक देशी अमेरीकी होने से जुड़े संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने एक साथ दो दौड़ों में भाग रहा था और उसमे से पहली थी अपने दुखी अन्त: मन के घाव को ठीक करने की दौड़। मैंने वह मुकाबला करते हुए ओलंपिक स्वर्ण जीत लिया।'

संन्यास लेने के बाद Mills को अपने जीवन का अगला लक्ष्य मिल गया और वह था अपने समुदाय के लिए एक प्रेरणा के रूप में उभरना।

सन 1986 में Mills ने Eugene Krizak के साथ मिल कर रनिंग स्ट्रांग फॉर अमेरीकी इंडियन यूथ संस्था की स्थापना करि।

इस संस्था के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'हमारी संस्था का लक्ष्य वृद्धों का सशक्तिकरण और युवाओं के सपनों को सच करना था।'

सामाजिक कार्य के लिए Mills को 2012 में अमेरीकी राष्ट्रपति Barack Obama द्वारा राष्ट्रपति नागरिक पदक से सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में 2014 में एक उत्सव का भी आयोजन किया गया।

'नफरत के विरुद्ध लड़ने के लिए यह सबसे बड़ा सम्मान है और मुझे गर्व है की मुझे यह मिला।'

Mills आजकल टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों के लिए उत्साहित है और वह अपने परिवार के साथ उस जगह फिर जाना चाहेंगे जहाँ उन्होंने 56 साल पहले स्वर्ण पदक जीता था।

'टोक्यो में हुए 1964 ओलंपिक खेलों की वजह से जापान को एक देश के रूप में बहुत लाभ हुआ था और पूरे विश्व में उसका नाम भी हुआ। अगर साल 2021 की बात करें तो जापान फिर से वैश्विक एकता का कार्य कर सकता है।'

Mills का सम्मान करने वाले कई धावक और खिलाड़ी एक प्रतिमा बना कर उन्हें टोक्यो में सम्मानित करना चाहते हैं।

इसके बारे में Mills ने कहा, 'मैं चाहता हूं की यह प्रतिमा विश्व एकता, सम्मान, चरित्र और अनेकता में एकता का एक प्रतीक बने।'