Ariya Jutanugarn: मैं अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना चाहती हूँ

थाईलैंड की Ariya Jutanugarn ने 2020 लेडीज स्कॉटिश ओपन के दौरान एक शॉट खेला। (Mark Runnacles/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
थाईलैंड की Ariya Jutanugarn ने 2020 लेडीज स्कॉटिश ओपन के दौरान एक शॉट खेला। (Mark Runnacles/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

थाईलैंड की गोल्फ खिलाड़ी ने मैदान में वापसी करि और अब उनकी निगाहें अगले साल होने वाले टोक्यो 2020 खेलों पर होगी। 

Ariya Jutanugarn ने 11 वर्ष की आयू में उन्होंने पहली बार किसी गोल्फ प्रतियोगिता में भाग लिया और किसी भी एलपीजीए प्रतिस्पर्धा में खेलने वाले वह सबसे काम उम्र की गोल्फर बनी। उनकी प्रतिभा का परिचय विश्व को बहुत ही जल्दी मिल गया और अगले कुछ सालों में Jutanugarn ने कई ख़िताब जीते।

वर्ष 2016 में वह गोल्फ विश्व के सबसे तेज़ चमकते सितारों में से एक बन चुकी थी और उन्होंने विश्व नंबर दो का पद हासिल किया।

उन्होंने उसी वर्ष इतिहास की रचना कर के दिखाई और 20 वर्ष की आयु में महिलाओं का ब्रिटिश ओपन ख़िताब जीत लिया और थाईलैंड के लिए मेजर प्रतियोगिता जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनी।

'मैंने कभी कल्पना भी नहीं करि थी की मैं मेजर चैंपियनशिप जीतने वाली थाईलैंड की पहली खिलाड़ी बनूँगी लेकिन मुझसे पहले जो भी खिलाड़ी थे उन्होंने मुझे बहुत प्रेरणा दी थी। मेजर प्रतियोगिता जीतना मेरा हमेशा से सपना था और जब मैंने ख़िताब जीतना शुरू किया तो मुझे विश्वास हो गया की मैं यह कर सकती हूँ।'

रियो 2016 ओलंपिक खेलों के दौरान दूसरे दौर के दौरान एक्शन में थाईलैंड की Ariya Jutanugarn (Scott Halleran/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
रियो 2016 ओलंपिक खेलों के दौरान दूसरे दौर के दौरान एक्शन में थाईलैंड की Ariya Jutanugarn (Scott Halleran/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 Getty Images

रियो 2016 ओलिंपिक खेलों में गोल्फ ने 102 साल बाद अपनी वापसी करि और Jutanugarn पदक जीतने की प्रबल दावेदारों में से एक थी लेकिन शायद भाग्य को यह मंज़ूर नहीं था।

महिलाओं की गोल्फ प्रतियोगिता के तीसरे राउंड में Jutanugarn को घुटने में चोट लग गयी और वह उसके आगे नहीं खेल पायी। वह निर्णय बहुत कठिन था और उसे याद करते हुए Jutanugarn को अभी भी दुःख होता है।

'मुझे उस समय बहुत निराशा महसूस हुई क्योंकि पहले राउंड में बढ़त मेरे पास थी और मुझे यह निर्णय अपने घुटने की सलामती के लिए लेना पड़ा क्योंकि अगर उस समय में खेलती रहती तो बहुत बुरा होते।'

ओलिंपिक खेलों में निराशा हाथ लगने के बाद भी Jutanugarn ने हार नहीं मानी और रियो 2016 के बात उन्होंने गोल्फ कोर्स पर वापसी करि और सबको चकित कर दिखाया। कैनेडियन महिला ओपन के रूप में उन्होंने वर्ष 2016 का पांचवा ख़िताब अपने नाम किया।

उनके आक्रामक और आकर्षक खेल की सराहना तो होती ही रहती है पर Jutanugarn की सहनशीलता और संघर्ष करने की शक्ति ही उनके चरित्र को दर्शाता है।

वर्ष 2017 तक वह विश्व् की नंबर एक गोल्फर बन चुकी थी और ऐसा करने वाली वह तीसरी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी। इतनी ही नहीं, Jutanugarn ने थाईलैंड का गोल्फ इतिहास पूर्ण रूप से परिवर्तित कर दिया और 2018 में उन्हें एलपीजीए द्वारा साल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

सर्वश्रेष्ठ बनने का सफर

Jutanugarn का सफर कोई संजोग या सौभाग्य की कहानी नहीं है। गोल्फ के शिखर पर पहुंचने के लिए उन्हे कड़ी मेहनत और बहुत त्याग करना पड़ा।

इस बारे में विस्तार से बताते हुए, उन्होंने कहा, 'मेरे पिता की एक गोल्फ के सामान की दुकान थी और मैंने बचपन में काफी समय वहां बिताया। मैं काफी शैतान थी और एक जगह पर टिकती नहीं थी जिसके कारण मेरे पिता ने मुझे एक पटर थमा दिया।'

'एक नया खिलौना पा कर मैं बहुत खुश थी और मुझे उस पटर के साथ खेलने में बहुत आनंद आता था पर मेरे पिता ने देखा की मैं शॉट्स बड़ी आसानी से खेल पा रही थी और बस वहीँ से मेरा गोल्फ का अभ्यास शुरू हो गया।

Ariya और उनकी बहन ने शौकिया प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया और जब माता पिता को दिखा की उनकी बेटियों में अच्छा खिलाड़ी बनने की क्षमता है तो उन्होंने अपना जीवन त्याग उन दोनों की सफलता के लिए सोचना शुरू कर दिया

'शौकिया गोल्फ में ख़िताब जीतने के लिए धन राशि नहीं मिलती और मैं एक सामान्य परिवार से थी। गोल्फ खेलने के लिए पैसे की ज़रूरत थी और मेरे करियर के लिए माता पिता ने अपना घर बेच दिया। एक समय पर हमारा पैसा और संपत्ति समाप्त होने की कगार पर थे।'

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों ने Jutanugarn को सहनशील और कृत-निश्चय बनाया।

'मुझे एलपीजीए के लिए क्वालीफाई करने की जल्दी थी और मेरी कोशिश थी कि गोल्फ के सहारे पैसे कमा कर अपने परिजनों का ध्यान रख पाऊं।'

Jutanugarn का संघर्ष उनके जूनून का प्रतीक है।

'मेरा लक्ष्य साफ़ था - विश्व सर्वश्रेष्ठ गोल्फर बन के दिखाना और अपने परिवार का ध्यान रखना। इसके अलावा मुझे कोई दूसरी बात से न फर्क पड़ता था न मेरे मस्तिष्क में कभी आती थी और न ही मुझे कभी लगा कि मैं कोई त्याग कर रही हूँ।

गोल्फ खेलने के अलावा Ariya और बहन Moriya एक संस्थान चलाते हैं जो थाईलैंड में परिवारों की सहायता करता है।

'परिवारों और बच्चों की सहायता हमारा लक्ष्य था और अब हमने इसे पूरा कर लिया है।'

साल 2018 में दोनों बहनों ने हैबिटैट विद ह्यूमैनिटी परियोजना के साथ सांझेदारी में एक थाईलैंड के परिवार के लिए घर बनाया और Jutanugarn इसे अपनी कामयाबी मानती हैं।

थाईलैंड में युवाओं के लिए Jutanugarn एक प्रेरणा स्त्रोत हैं।

'हमारे देश में गोल्फ की लोकप्रियता बढ़ रही है और बहुत से युवा इस में रूचि ले रहे हैं। मेरा फ़र्ज़ है कि जैसे मुझे कम उम्र में सहायता मिली, इन युवाओं को भी मिले और इनके अंदर भी सर्वश्रेष्ठ बनने का आत्मविश्वास आ जाये।'

एक चुनौतीपूर्ण साल

विश्व का नंबर एक खिलाड़ी होना आसान नहीं है और Jutanugarn को इसके असर के बारे में अच्छे से पता है।

'मेरा प्रयास हमेशा यही रहा की मैं हर प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाऊं और जब वह होने लगा तो नंबर एक का ख़िताब एक अधिलाभ के रूप में था। सफलता के कारण मेरी आवाज़ को पूरी दुनिया में सुना जाने लगा और मैं अपने आपको युवाओं का प्रतिनिधि समझने लगी। बदलाव लाना और उनकी बात विश्व तक पहुँचाना मेरा कर्त्तव्य था।'

Jutanugarn को जब लग रहा था की गोल्फ के शिखर पर उनकी जगह सुरक्षित है, साल 2019 उनके लिए अच्छा नहीं गया और वह एक भी ख़िताब नहीं जीत पायी जिसकी वजह से उनकी रैंकिंग गिर गयी। इस समय वह दुनिया की नंबर 17 खिलाड़ी हैं और Jutanugarn को पता है की गोल्फ के शिखर पर पहुंचना कितना मुश्किल कार्य है।

'साल 2018 में मिली कामयाबी के बाद चीज़ें आसान नहीं थी लेकिन मेरे जीवन में इतने सारे उतर चढ़ाव रहे हैं कि मुझे इन परिस्थितियों का सामना करने में कोई कठिनाई नहीं हुई। इतने साल वही चीज़ हर बार करने के बाद भी न जीतना थोड़ा निराशाजनक ज़रूर होता पर हमें निरंतर बेहतर होने का प्रयास करते रहना चाहिए।'

गोल्फ कोर्स पर वापसी

Jutanugarn ने साल 2020 की शुरुआत में कुछ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और कोरोना महामारी के कारण जो विराम लगा उसके बाद उन्होंने स्कॉटिश ओपन में भाग लिया।

'छह महीने के विराम के बाद खेलना बहुत अच्छा लगा और आने वाली प्रतियोगिता के लिए तैयारी में आसानी हो गयी।'

'शुरुआत में मुझे सफर करने में थोड़ा डर ज़रूर लगा और इसी कारण से मैंने स्कॉटलैंड ओपन तक इंतज़ार किया। एलपीजीए ने बहुत अच्छा प्रबंध किया और सारे खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सारे कदम उठाये हैं।'

Jutanugarn के लिए उनकी एकाग्रता परिणाम पर काम और प्रदर्शन पर ज़्यादा है।

'रैंकिंग मेरे लिए उतनी ज़रूरी नहीं है और मैं अपने खेल को सुधारने पर ध्यान दे रही हूँ। हर प्रतियोगिता में मैं अपना पूरा प्रयास करुँगी और उसके बाद अच्छे परिणाम अपने आ जायेंगे।'

'यह बात सही है कि एक खिलाड़ी का आकलन रैंकिंग् से होता है लेकिन मेरे लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं है। गोल्फ खेल कर मुझे ख़ुशी मिलती है, चाहे वह प्रतियोगिता हो या अभ्यास हो।'

रियो 2016 ओलंपिक खेलों में थाईलैंड की Ariya Jutanugarn ने महिला गोल्फ के पहले दौर के दौरान तीसरे टी से अपने शॉट खेले। (Scott Halleran/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
रियो 2016 ओलंपिक खेलों में थाईलैंड की Ariya Jutanugarn ने महिला गोल्फ के पहले दौर के दौरान तीसरे टी से अपने शॉट खेले। (Scott Halleran/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
2016 Getty Images

टोक्यो 2020 में दूसरा मौका

बेहद सफलता और खिताबों के बाद भी Jutanugarn की महत्वाकांक्षाएं अभी पूर्ण नहीं हुई हैं और जो खेल रियो 2016 में जो अधूरा रह गया वह काम पूरा करना उनका लक्ष्य है।

'आशा करती हूँ कि मुझे आने वाले ओलिंपिक खेलों में भाग लेने का मौका मिलेगा। रियो ओलिंपिक खेलों में भाग लेना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी।'

ओलिंपिक खेलों में भाग लेना उनका सपना ज़रूर है लेकिन Jutanugarn का मानना है की वह किसी दबाव में नहीं आएँगी।'

"मेरा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाना रहेगा और जैसा मेरा खेल होगा वैसा ही परिणाम आएगा। मैं ओलिंपिक खेलों के लिए उसी तरह तैयारी करुँगी जैसे बाकी प्रतियोगिताओं के लिए करती हूँ।'

एक खिलाड़ी होने के तौर पर Jutanugarn के लिए टोक्यो 2020 एक व्यक्तिगत लड़ाई भी होगी।

'ओलिंपिक खेलों में भाग लेना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है चाहे वह कोई भी खेल हो और इसी वजह से हम कड़ी मेहनत करते हैं।'