Anders Antonsen और जीने की कला

डेनमार्क के Anders Antonsen ने 2018 इंडोनेशिया ओपन में मेंस सिंगल्स फाइनल मैच के दौरान चीनी ताइपे के Chou Tien Chen के खिलाफ मुकाबला किया। (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)
डेनमार्क के Anders Antonsen ने 2018 इंडोनेशिया ओपन में मेंस सिंगल्स फाइनल मैच के दौरान चीनी ताइपे के Chou Tien Chen के खिलाफ मुकाबला किया। (Robertus Pudyanto/ गेटी इमेज द्वारा फोटो)

डेनमार्क के 23 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपने जीवन और अगले साल होने वाले ओलिंपिक खेलों के बारे में बात करी। 

बीजिंग ओलिंपिक खेलों की पुरुष बैडमिंटन सिंगल्स प्रतियोगिता फाइनल को पूरा विश्व देख रहा था और सबकी नज़र स्वर्ण के लिए मुकाबला कर रहे Lee Chong Wei और LIN Dan पर थी।

एक तरफ जहाँ पूरा विश्व बैडमिंटन का यह रोमांचक मुकाबला देख रहा था, 11 वर्ष के Anders Antonsen अपने घर के आँगन में एक मित्र के साथ खुद खेल रहे थे। उस शाम को 10 साल से ऊपर हो गए हैं और विश्व के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक बनने के बाद भी Antonsen का रवैया वही है।

अगर डेनमार्क के बैडमिंटन इतिहास के बारे में बात करें तो यह बात साफ़ होती है की यह खेल स्कैंडेनेविया स्थित देश में बहुत लोकप्रिय है और Poul-Erik Høyer Larsen, Peter Gade, Jan Ø. Jørgensen, Camilla Martin, Thomas Stuer-Lauridsen और Lene Køppen जैसे कई खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं।

अगले साल होने वाले ओलिंपिक खेलों Antonsen के पहले होंगे और वह डेनमार्क के लिए बैडमिंटन स्वर्ण जीतने वाले दुसरे खिलाड़ी बनने का प्रयास करेंगे।

विरासत में मिला बैडमिंटन 

Antonsen के परिवार का बैडमिंटन से बहुत गहरा संबंध हैं।

टोक्यो 2020 से बात करते हुए Antonsen ने बताया, "मेरे पिता को बैडमिंटन क्लब में काम करते हुए 25 साल हो चुके हैं और वह खुद भी एक खिलाड़ी थे। अगर आप उनसे पूछेंगे तो वह कहेंगे कि उनका स्तर बहुत उच्च था लेकिन ऐसा है नहीं।"

Antonsen अपने पिता द्वारा संचालित क्लब में रोज़ स्कूल के बाद जाते थे और वहीँ से उन्हें बैडमिंटन से प्रेम हो गया। उन्होंने कहा, "मेरे भाई को भी बैडमिंटन में रूचि थी और वहां जाना मेरे लिए बहुत स्वाभाविक था।"

"मैंने उस क्लब में इतना समय बिताया और उसके कारण मेरा खेल सुधरता गया। अगर मेरे पिता वहां काम नहीं करते तो शायद मैं कहीं और जाता। मेरी माँ भी उसी क्लब में काम करती थी और शायद आप कह सकते हैं की मेरा जन्म बैडमिंटन में हुआ।"

उन्होंने ने बहुत कम आयु से बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था और इसके कारण उनका आत्मविश्वास हमेशा से उच्च स्तर का रहा है।

आरहुस से विश्व टूर तक

एक युवा Anders ने बहुत कम आयु में विश्व स्तर पर सफलता पाना शुरू कर दिया और उन्होंने यह निश्चय कर लिया था कि इसी खेल में अपना करियर बनाएंगे। उन्होंने बहुत साफ़ शब्दों में अपने माता पिता को बता दिया की पढ़ाई में उनकी कोई रूचि नहीं थी और बैडमिंटन ही उनका जीवन है।

"मैं सिर्फ तीन दिन के लिए हाई स्कूल गया और मैंने यह निर्णय लिया कि मुझे वापस नहीं जाना। मैं क्लब में काम कर रहे अपने पिता के पास गया और उन्हें बता दिया कि स्कूल मैं वापस नहीं जाऊंगा। मुझे यह जीवन नहीं जीना और मेरा लक्ष्य कुछ और है।"

Antonsen ने बैडमिंटन की दुनिया में कदम रखा और वह LEE Chong Wei, LIN Dan और CHEN Long के साथ खेलने की तैयारी करने लगे। अगले कुछ सालों में डेनमार्क के इस युवा ने यूरोपीय जूनियर चैंपियनशिप, आयरिश ओपन और बेल्जियन अंतर्राष्ट्रीय जैसी प्रतियोगिताएं जीती और विश्व को अपने कौशल का दिया।

एक विश्व स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनने के बाद उन्होंने NISHIMOTO Kenta से लेकर CHOU Tien Chen का मुकाबला किया और अपना बचपन का सपना पूरा किया।

अगले साल टोक्यो में आयोजित होने वाले ओलिंपिक खेल Antonsen के पहले होंगे और उनका लक्ष्य साफ़ है - स्वर्ण पदक।

उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी यही कहा है और मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक ही है।"

"यह कहना शायद हास्यास्पद होगा की मैं ओलिंपिक खेलों में भाग लूंगा और क्वार्टरफाइनल पहुँचने से संतुष्ट हो जाऊंगा। मुझे खेल का शिखर हासिल करना है और ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण जीतने से बड़ा कुछ भी नहीं है। मैं ओलिंपिक खेलों के लिए शायद सबसे प्रबल दावेदार नहीं हूँ और इस वजह से मुझे अपना स्तर सुधारना होगा।"

डेनमार्क ओपन, लॉकडाउन और पुरानी यादें

कोरोना महामारी से लड़ रहे विश्व के लिए एक बहुत कठिन समय में खेल सुख का स्त्रोत है और डेनमार्क ओपन के साथ बैडमिंटन की वापसी हुई। बहुत सारे बड़े नाम इस प्रतियोगिता का भाग नहीं थे लेकिन Antonsen, Rasmus Gemke और Chou Tien Chen ने दर्शकों को अनेक रोमांचक और शानदार मुकाबले देखने का मौका दिया।

Antonsen ने सेमिफाइनल में Chou को हराया और अपने ही देश के Rasmus Gemke के साथ फाइनल मुकाबला पक्का कर लिया। बहुत लोग शायद यह नहीं जानते की Gemke वही व्यक्ति हैं जिनके साथ Antonsen 2008 में अपने घर के सामने बैडमिंटन खेल रहे थे। 

विशेषज्ञों और दर्शकों ने Antonsen को इस फाइनल का सबसे प्रबल दावेदार माना था लेकिन उनके मित्र Gemke ने शायद अपने जीवन का सबसे अच्छा मैच खेला और ख़िताब जीतने की कगार पर थे।

मुकाबले के बारे में बात करते हुए Anders ने कहा, "ऐसे मैच में आपकी भावनाओं से बहुत असर पड़ता है और अपने मित्र के साथ खेलना थोड़ा अलग होता है।"

"आप फाइनल में खेलने के लिए उत्सुक होते हैं और जब आपको पता चले की मुकाबला बचपन के मित्र से है तो बात अलग हो जाती है। वह मुकाबला मेरे लिए बहुत भावुक था और जब मैच समाप्त हुआ तो हम दोनों बहुत ज़्यादा थक चुके थे।"

अंत में Antonsen ने फाइनल मुकाबला 18–21, 21–19, 21–12 से जीता और 2019 के बाद अपना पहला बीडब्लूएफ विश्व टूर ख़िताब जीता। एक मुश्किल लॉकडाउन के बाद यह ख़िताब एक प्रेरणा के रूप में उनके के जीवन में आया। 

लॉकडाउन के बारे में उन्होंने कहा, "बहुत मुश्किल था वह समय और मुझे यह ज्ञात हुआ की समय रहते आपको सब चीज़ें कर लेनी चाहिए क्योंकि कल क्या होगा यह आप कह नहीं सकते।"

अंत में Antonsen ने फाइनल मुकाबला 18–21, 21–19, 21–12 से जीता और 2019 के बाद अपना पहला बीडब्लूएफ विश्व टूर ख़िताब जीता। एक मुश्किल लॉकडाउन के बाद यह ख़िताब एक प्रेरणा के रूप में उनके के जीवन में आया। 

लॉकडाउन के बारे में उन्होंने कहा, "बहुत मुश्किल था वह समय और मुझे यह ज्ञात हुआ की समय रहते आपको सब चीज़ें कर लेनी चाहिए क्योंकि कल क्या होगा यह आप कह नहीं सकते।"

आत्मविश्वास, ओलिंपिक खेल और टोक्यो 2020

एक सोशल मीडिया संवाद के दौरान Antonsen से पूछा गया था कि क्या उनके अंदर अति-आत्मविश्वास क्यों है तो उन्होंने कहा कि अगर यह उनके स्वभाव में है तो वह कुछ नहीं कर सकते।

"बहुत सारे लोग यह कहते हैं की मेरे अंदर कुछ ज़्यादा आत्मविश्वास है और यह बचपन से है। मुझे इसके पीछे का कारण नहीं पता लेकिन एक बात साफ़ है की मेरा खेल अच्छा है और इसी कारण जब भी मैं कोर्ट पर कदम रखता हूँ तो मेरा आत्मविश्वास बहुत बढ़ा होता है।"

अगर Antonsen को अगले साल टोक्यो ओलिंपिक खेलों में थोड़ा दबाव महसूस हो तो यह स्वाभाविक होगा क्योंकि उनका मुकाबला Chen, Chou, Viktor Axelsen और MOMOTA Kento से होगा।

टोक्यो 2020 ओलिंपिक खेलों में भाग लेने के अलावा Antonsen जापान जाने के लिए उत्सुक हैं और उन्हें एशिया के इस देश की सभ्यता अच्छी लगती है।

Antonsen ने टोक्यो के बारे में कहा, "मुझे वहां का खाना बहुत अच्छा लगता है और मुझे सुशी बेहद पसंद है। जापान की सुशी की बात ही कुछ और होती है। वह देश बहुत अलग है और वहां के लोगों का व्यव्हार बहुत ही उच्च स्तर का होता है। वहां के लोग बहुत ही सभ्य होते हैं और यह बात मुझे बहुत पसंद है।"

डेनमार्क का खेल इतिहास बदलने के लिए Antonsen को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खेलना पड़ेगा और अगर वह ऐसा कर पाए तो स्वर्ण पदक असंभव नहीं होगा।