अर्जुन पुरस्कार जीतने के बाद Akashdeep की निगाहें अब टोक्यो ओलंपिक पर

Akashdeep Singh (Alex Morton/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)
Akashdeep Singh (Alex Morton/ गेटी इमेजेज द्वारा फोटो)

भारत सर्कार ने हाल ही में अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की सूची निकली थी और उनमे से एक हैं हॉकी टीम के फॉरवर्ड Akashdeep Singh, जिन्हे अपने पिछले 4 साल के प्रदर्शन के लिए सराहना मिली है।

Akashdeep की निगाहें अब आने वाले टोक्यो ओलिंपिक पर होगी जहाँ वह भारतीय टीम को 1980 के बाद पहली बार पदक दिलाने की कोशिश करेंगे।

हॉकी इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा की टोक्यो ओलिंपिक में जगह बनाना उनके लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी और वह अपने प्रदर्शन को बरक़रार रखना चाहेंगे।

पुरस्कार ने बढ़ाया Akashdeep का मनोबल

अभी तक भारत के लिए Akashdeep कुल 194 मैच खेल चुके हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों में काफी अहम मुकाबलों में गोल दाग कर टीम को जीत भी दिलाई है।

इन मुकाबलों में उल्लेखनीय हैं 2019 में रूस के खिलाफ एफआईएच ओलंपिक क्वालीफ़ायर, 2018 एशिया खेलों में कांस्य पदक और एफआईएच सीरीज फाइनलस में जीत। अर्जुन पुरस्कार जीतने पर उन्होंने अपने साथियों और कोच को श्रेय दिया।

'मैं 2012 से भारत के लिए खेल रहा हूँ और यह मेरा सौभाग्य है की मुझे बहुत ही प्रतिभाशाली साथी मिले हैं। मेरा प्रदर्शन बहुत हद तक मेरे साथियों की वजह से है और मैं अपने परिवार को भी धन्यवाद देना चाहूंगा,' Akashdeep ने हॉकी इंडिया से कहा।

View this post on Instagram

Prove yourself to yourself, Not to others.

A post shared by Akashdeep Singh (@akashdeepsingh_27) on

'ओलिंपिक पहुंचना बड़ी उपलब्धि'

Akashdeep ने अपने करियर को देखते हुए यह भी कहा की ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करना उनके जीवन के सर्वश्रेष्ठ लम्हों में से एक रहेगा।

'पिछला साल हमारे लिए बहुत ज़रूरी था और एफआईएच श्रंखला के फाइनल्स में जीतना और उसके बाद एफआईएच ओलंपिक क्वालीफायर्स में कांस्य पदक लाना बहुत ज़रूरी था हमारे आत्मविश्वास के लिए। जिस मैच में हमने टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई किया था उसे मैं हमेशा याद रखूँगा, खास कर की स्टेडियम में जो माहौल था,' उन्होंने बताया।

भारत को अगर टोक्यो ओलिंपिक में पदक जीतना है तो Akashdeep का प्रदर्शन बहुत अहम रहेगा और उन्हें जापान में काफी गोल दागने पड़ेंगे। हालांकि उनकी उम्र अभी कुल 25 वर्ष है पर वह टीम का एक अटूट हिस्सा हैं और सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक भी हैं।

भारत ने अपना आखरी हॉकी पदक रूस में जीता था, क्या Akashdeep उस नाम को बदल के टोक्यो कर पाएंगे?